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Bangladesh: कट्टरपंथियों की धमकी के बाद रुका भगवान राम की मूर्ति का निर्माण कार्य, ढहाने की दी थी चेतावनी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
Published by: अमन तिवारी
Updated Wed, 17 Jun 2026 09:19 AM IST
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सार
बांग्लादेश के रंगपुर में कट्टरपंथियों की धमकी के बाद भगवान राम की मूर्ति का निर्माण रोक दिया गया है। कट्टरपंथी संगठनों ने मूर्ति को ढहाने और हिंसा फैलाने की चेतावनी दी थी। इलाके में शांति बनाए रखने के लिए मंदिर समिति ने यह फैसला लिया है।
भगवान राम की मूर्ति का निर्माण रोक गया
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पड़ोसी देश बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा और प्रताड़ना की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। शेख हसीना की सरकार हटने के बाद से वहां हालात और भी ज्यादा खराब हो गए हैं। अब ताजा मामला रंगपुर संभाग के पलाशबाड़ी इलाके से सामने आया है, जहां कट्टरपंथियों के दबाव में भगवान राम की एक निर्माणाधीन मूर्ति का काम रोक दिया गया है।
मंदिर समिति ने क्या कहा?
मंदिर समिति ने जानकारी दी है कि उन्हें कट्टरपंथी संगठनों से लगातार धमकियां मिल रही थीं। इन संगठनों ने चेतावनी दी थी कि वे मूर्ति को ध्वस्त कर देंगे और इलाके में हिंसा फैलाएंगे। क्षेत्र में शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए मंदिर प्रबंधन ने फिलहाल निर्माण कार्य को स्थगित करने का फैसला किया है।
मंदिर समिति के एक सदस्य ने मीडिया को बताया कि समाज और देश के हित को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि भविष्य में अगर जरूरत महसूस हुई, तो वे सभी पक्षों को बुलाएंगे और उनके सुझाव लेने के बाद ही काम को दोबारा शुरू करने पर विचार करेंगे।
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कैस शुरू हुआ विवाद?
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब 'इंसाफ कायमकारी छात्र श्रमिक जनता' नाम के एक कट्टरपंथी संगठन से जुड़े उपदेशक ने इस मूर्ति को लेकर धमकी दी। सोशल मीडिया पर वायरल हुए बयानों में इस उपदेशक ने मांग की कि पलाशबाड़ी में बन रही भगवान राम की मूर्ति को बुलडोजर से तोड़ देना चाहिए। उसने प्रशासन को अल्टीमेटम दिया कि अगर सरकार ने इसे नहीं हटाया, तो आम लोग खुद इसे तोड़ देंगे।
ये भी पढ़ें: US: नौकरी और H-1B वीजा के बदले ₹94 लाख मांगने का आरोप, अमेरिका में भारतीय कर्मचारी ने मालिक पर किया केस
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस कट्टरपंथी उपदेशक ने न केवल मूर्ति को निशाना बनाया, बल्कि कई भड़काऊ भाषण भी दिए। उसने भारत और दक्षिण एशियाई देशों के बीच क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर भी आपत्तिजनक बातें कहीं। उसकी इन बातों से इलाके में तनाव काफी बढ़ गया, जिसे देखते हुए मंदिर प्रबंधन ने निर्माण कार्य रोकने का फैसला किया।
बता दें कि बांग्लादेश में हालिया राजनीतिक संकट के बाद से ही अल्पसंख्यक हिंदू समाज लगातार उपद्रवियों के निशाने पर है। वहां हुई हिंसा में कई हिंदुओं की जान जा चुकी है, जबकि उनके घरों, दुकानों और धार्मिक स्थलों में तोड़फोड़ व नुकसान पहुंचाया गया है। इन हिंसक घटनाओं के कारण वहां रहने वाले अल्पसंख्यक समुदाय में डर और असुरक्षा का माहौल है।
मंदिर समिति ने क्या कहा?
मंदिर समिति ने जानकारी दी है कि उन्हें कट्टरपंथी संगठनों से लगातार धमकियां मिल रही थीं। इन संगठनों ने चेतावनी दी थी कि वे मूर्ति को ध्वस्त कर देंगे और इलाके में हिंसा फैलाएंगे। क्षेत्र में शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए मंदिर प्रबंधन ने फिलहाल निर्माण कार्य को स्थगित करने का फैसला किया है।
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मंदिर समिति के एक सदस्य ने मीडिया को बताया कि समाज और देश के हित को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि भविष्य में अगर जरूरत महसूस हुई, तो वे सभी पक्षों को बुलाएंगे और उनके सुझाव लेने के बाद ही काम को दोबारा शुरू करने पर विचार करेंगे।
कैस शुरू हुआ विवाद?
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब 'इंसाफ कायमकारी छात्र श्रमिक जनता' नाम के एक कट्टरपंथी संगठन से जुड़े उपदेशक ने इस मूर्ति को लेकर धमकी दी। सोशल मीडिया पर वायरल हुए बयानों में इस उपदेशक ने मांग की कि पलाशबाड़ी में बन रही भगवान राम की मूर्ति को बुलडोजर से तोड़ देना चाहिए। उसने प्रशासन को अल्टीमेटम दिया कि अगर सरकार ने इसे नहीं हटाया, तो आम लोग खुद इसे तोड़ देंगे।
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रिपोर्ट्स के अनुसार, इस कट्टरपंथी उपदेशक ने न केवल मूर्ति को निशाना बनाया, बल्कि कई भड़काऊ भाषण भी दिए। उसने भारत और दक्षिण एशियाई देशों के बीच क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर भी आपत्तिजनक बातें कहीं। उसकी इन बातों से इलाके में तनाव काफी बढ़ गया, जिसे देखते हुए मंदिर प्रबंधन ने निर्माण कार्य रोकने का फैसला किया।
बता दें कि बांग्लादेश में हालिया राजनीतिक संकट के बाद से ही अल्पसंख्यक हिंदू समाज लगातार उपद्रवियों के निशाने पर है। वहां हुई हिंसा में कई हिंदुओं की जान जा चुकी है, जबकि उनके घरों, दुकानों और धार्मिक स्थलों में तोड़फोड़ व नुकसान पहुंचाया गया है। इन हिंसक घटनाओं के कारण वहां रहने वाले अल्पसंख्यक समुदाय में डर और असुरक्षा का माहौल है।