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US: ट्रंप सरकार का बड़ा कदम, 'इंडो-पैसिफिक कमांड' का नाम बदला; क्या हैं अमेरिका के इस फैसले के मायने?
पीटीआई, वॉशिंगटन
Published by: नितिन गौतम
Updated Wed, 17 Jun 2026 10:01 AM IST
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सार
अमेरिका की इंडो पैसिफिक कमांड ने अपना नाम बदलकर फिर से यूएस पैसिफिक कमांड कर लिया है। 8 साल पहले ट्रंप सरकार के दौरान ही इसका नाम बदला गया था। अब फिर से नाम बदलने के पीछे की ट्रंप सरकार की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।
यूएस का बड़ा फैसला
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अमेरिका ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अपने यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड (USINDOPACOM) का नाम बदलकर फिर से यूएस पैसिफिक कमांड (USPACOM) कर दिया है। इसके साथ ही 2018 में लिया गया आठ साल पुराना फैसला भी पलट दिया गया है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने मंगलवार को इसकी घोषणा करते हुए कहा कि यह बदलाव कमांड के ऐतिहासिक गौरव और विरासत को सम्मान देने के लिए किया गया है। इस कमांड की स्थापना साल 1947 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी एस. ट्रूमैन ने की थी।
रक्षा विभाग के बयान के अनुसार, '1 जनवरी 1947 को स्थापित यह कमांड 70 वर्षों से अधिक समय तक यूएस पैसिफिक कमांड के नाम से संचालित होती रही। यह अमेरिका की एकीकृत सैन्य कमांडों में सबसे पुरानी और सबसे बड़ी कमांड है।' गौरतलब है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान ही वर्ष 2018 में इसका नाम बदलकर यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड कर दिया गया था।
ऐतिहासिक विरासत का सम्मान: पेंटागन
अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने कहा कि पुराने नाम की बहाली कमांड की गहरी ऐतिहासिक जड़ों को सम्मान देती है और प्रशांत क्षेत्र में तैनात सैन्यकर्मियों के बीच गर्व और सामूहिक भावना को मजबूत करेगी। बयान में कहा गया, 'द्वितीय विश्व युद्ध के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था स्थापित करने से लेकर कोरियाई युद्ध, वियतनाम युद्ध और अनेक मानवीय अभियानों के समन्वय तक, यूएस पैसिफिक कमांड का नाम सैन्य विरासत और क्षेत्रीय साझेदारियों का प्रतीक रहा है।"
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भारत की पश्चिमी सीमा तक फैला है दायरा
रक्षा विभाग के मुताबिक, नाम बदलने के बावजूद कमांड के अधिकार क्षेत्र में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसका संचालन क्षेत्र अमेरिका के पश्चिमी तट से लेकर भारत की पश्चिमी सीमा तक फैला हुआ है। पेंटागन ने साफ किया कि कमांड का मूल मिशन और क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर एक स्वतंत्र एवं खुले क्षेत्र को बनाए रखने की प्रतिबद्धता पहले की तरह जारी रहेगी।
2018 में क्यों बदला गया था नाम?
साल 2018 में तत्कालीन अमेरिकी रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने कमांड का नाम बदलकर इंडो-पैसिफिक कमांड करने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के बीच बढ़ती रणनीतिक और आर्थिक परस्पर जुड़ाव को देखते हुए यह बदलाव किया गया है। मैटिस ने उस समय कहा था कि यह कमांड 'बॉलीवुड से हॉलीवुड तक और पेंगुइन से ध्रुवीय भालुओं तक' फैले विशाल क्षेत्र की जिम्मेदारी संभालती है और अमेरिका की राष्ट्रीय रक्षा रणनीति में इसकी अहम भूमिका है।
क्या हैं इसके मायने?
साल 2018 में जब यूएस पैसिफिक कमांड का नाम बदलकर इंडो पैसिफिक कमांड किया गया था तो इसे अमेरिका और भारत के रणनीतिक रिश्तों में आ रही तेजी के तौर पर देखा गया था। बीते कुछ वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच कई ऐसे समझौते हुए, जिससे दोनों देशों के रणनीतिक संबंध काफी मजबूत हुए थे। हालांकि ट्रंप सरकार के दूसरे कार्यकाल में भारत और अमेरिका के रिश्तों में खटास आई है। पहले टैरिफ को लेकर और फिर ऑपरेशन सिंदूर में युद्धविराम के मुद्दे पर भारत और अमेरिकी सरकार के बीच मतभेद दिखे। इस सबके बीच अब अमेरिका का इंडो पैसिफिक कमांड का नाम बदलना कई सवाल खड़े कर रहा है।
रक्षा विभाग के बयान के अनुसार, '1 जनवरी 1947 को स्थापित यह कमांड 70 वर्षों से अधिक समय तक यूएस पैसिफिक कमांड के नाम से संचालित होती रही। यह अमेरिका की एकीकृत सैन्य कमांडों में सबसे पुरानी और सबसे बड़ी कमांड है।' गौरतलब है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान ही वर्ष 2018 में इसका नाम बदलकर यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड कर दिया गया था।
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ऐतिहासिक विरासत का सम्मान: पेंटागन
अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने कहा कि पुराने नाम की बहाली कमांड की गहरी ऐतिहासिक जड़ों को सम्मान देती है और प्रशांत क्षेत्र में तैनात सैन्यकर्मियों के बीच गर्व और सामूहिक भावना को मजबूत करेगी। बयान में कहा गया, 'द्वितीय विश्व युद्ध के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था स्थापित करने से लेकर कोरियाई युद्ध, वियतनाम युद्ध और अनेक मानवीय अभियानों के समन्वय तक, यूएस पैसिफिक कमांड का नाम सैन्य विरासत और क्षेत्रीय साझेदारियों का प्रतीक रहा है।"
भारत की पश्चिमी सीमा तक फैला है दायरा
रक्षा विभाग के मुताबिक, नाम बदलने के बावजूद कमांड के अधिकार क्षेत्र में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसका संचालन क्षेत्र अमेरिका के पश्चिमी तट से लेकर भारत की पश्चिमी सीमा तक फैला हुआ है। पेंटागन ने साफ किया कि कमांड का मूल मिशन और क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर एक स्वतंत्र एवं खुले क्षेत्र को बनाए रखने की प्रतिबद्धता पहले की तरह जारी रहेगी।
2018 में क्यों बदला गया था नाम?
साल 2018 में तत्कालीन अमेरिकी रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने कमांड का नाम बदलकर इंडो-पैसिफिक कमांड करने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के बीच बढ़ती रणनीतिक और आर्थिक परस्पर जुड़ाव को देखते हुए यह बदलाव किया गया है। मैटिस ने उस समय कहा था कि यह कमांड 'बॉलीवुड से हॉलीवुड तक और पेंगुइन से ध्रुवीय भालुओं तक' फैले विशाल क्षेत्र की जिम्मेदारी संभालती है और अमेरिका की राष्ट्रीय रक्षा रणनीति में इसकी अहम भूमिका है।
क्या हैं इसके मायने?
साल 2018 में जब यूएस पैसिफिक कमांड का नाम बदलकर इंडो पैसिफिक कमांड किया गया था तो इसे अमेरिका और भारत के रणनीतिक रिश्तों में आ रही तेजी के तौर पर देखा गया था। बीते कुछ वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच कई ऐसे समझौते हुए, जिससे दोनों देशों के रणनीतिक संबंध काफी मजबूत हुए थे। हालांकि ट्रंप सरकार के दूसरे कार्यकाल में भारत और अमेरिका के रिश्तों में खटास आई है। पहले टैरिफ को लेकर और फिर ऑपरेशन सिंदूर में युद्धविराम के मुद्दे पर भारत और अमेरिकी सरकार के बीच मतभेद दिखे। इस सबके बीच अब अमेरिका का इंडो पैसिफिक कमांड का नाम बदलना कई सवाल खड़े कर रहा है।