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US: क्या न्याय विभाग के काम में हस्तक्षेप कर रहे ट्रंप? लाइव नेशन के खिलाफ एंटी ट्रस्ट मामले में लगे आरोप
पीटीआई, वॉशिंगटन
Published by: नितिन गौतम
Updated Thu, 25 Jun 2026 07:53 AM IST
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सार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर न्याय विभाग के कामकाज में दखल देने के आरोप लग रहे हैं। ये आरोप लाइव नेशन केस के मामले में लगे हैं, जिसमें न्याय विभाग और लाइव नेशन के बीच समझौता हो गया है। अब एक कोर्ट फाइलिंग से पता चला है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने लाइव नेशन के सीईओ से निजी तौर पर बातचीत की थी।
डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
अदालत में दाखिल दस्तावेज से खुलासा हुआ है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मनोरंजन क्षेत्र की दिग्गज कंपनी लाइव नेशन और उसकी सहायक टिकटिंग कंपनी टिकटमास्टर के खिलाफ चल रहे लंबे समय से लंबित एंटीट्रस्ट (प्रतिस्पर्धा-विरोधी) मुकदमे के अचानक निपटारे से कुछ सप्ताह पहले कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की थी। लाइव नेशन के वकीलों ने सोमवार को अदालत को बताया कि ट्रंप और कंपनी के सीईओ माइकल रैपिनो ने फरवरी में एंटीट्रस्ट मुकदमे को लेकर बातचीत की थी, हालांकि किसी संभावित समझौते की ठोस शर्तों पर चर्चा नहीं हुई थी।
क्या है लाइव नेशन मामला
लाइव नेशन, लाइव इवेंट का आयोजन करने वाली मशहूर कंपनी है। यह विश्वभर में हर साल हजारों संगीत कार्यक्रमों का आयोजन करती है, जिसमें करोड़ों लोग शामिल होते हैं। कंपनी पर टिकटों की बिक्री और उनकी कीमत तय करने में एकाधिकार बनाने का आरोप है, जिसे लेकर कंपनी के खिलाफ अमेरिका के कई राज्यों ने मुकदमा दायर किया था। इसी मुकदमे में अब समझौता हो गया है, जिसे लेकर आरोप लग रहे हैं कि ट्रंप ने इसमें दखल दिया है, जिससे कंपनी सख्त कार्रवाई से बच गई है।
कई राज्य समझौते का विरोध कर रहे
वकीलों ने यह भी बताया कि फरवरी और मार्च के दौरान कंपनी तथा न्याय विभाग के बीच हुई कई आमने-सामने की बैठकों, वीडियो कॉन्फ्रेंस, टेलीफोन कॉल और लिखित संवादों में व्हाइट हाउस के वकील भी शामिल थे। मार्च में मुकदमे की सुनवाई शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद न्याय विभाग ने समझौते की घोषणा कर दी थी। हालांकि अधिकांश राज्यों ने इस समझौते का विरोध किया था। उनका कहना था कि यह समझौता टिकटमास्टर के जरिए कॉन्सर्ट स्थलों और लाइव कार्यक्रमों की टिकट बिक्री पर कंपनी लाइव नेशन के वर्चस्व को सीमित करने के लिए काफी नहीं है।
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जूरी ने निष्कर्ष निकाला कि कंपनी एकाधिकार की स्थिति में थी, जिससे कॉन्सर्ट दर्शकों और खेल प्रेमियों को नुकसान पहुंचा। हालांकि इसके बावजूद भी समझौता होने को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। व्हाइट हाउस ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और संबंधित सवालों को न्याय विभाग के पास भेज दिया। वहीं न्याय विभाग ने भी तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
न्याय विभाग की स्वतंत्रता पर उठे सवाल
यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब न्याय विभाग की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठ रहे हैं और आलोचकों का कहना है कि व्हाइट हाउस तथा राष्ट्रपति की ओर से हस्तक्षेप के कारण उसकी स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है। गौरतलब है कि न्याय विभाग और दर्जनों राज्यों ने मिलकर ही लाइव नेशन के खिलाफ यह एंटीट्रस्ट मुकदमा दायर किया था।
न्यूयॉर्क में जूरी ने पाया कि टिकटमास्टर की प्रतिस्पर्धा-विरोधी गतिविधियों के कारण 22 राज्यों में लोगों को प्रति टिकट औसतन 1.72 अमेरिकी डॉलर अतिरिक्त भुगतान करना पड़ा। अदालत कंपनियों को यह राशि उपभोक्ताओं को लौटाने का आदेश दे सकती है।
क्या है लाइव नेशन मामला
लाइव नेशन, लाइव इवेंट का आयोजन करने वाली मशहूर कंपनी है। यह विश्वभर में हर साल हजारों संगीत कार्यक्रमों का आयोजन करती है, जिसमें करोड़ों लोग शामिल होते हैं। कंपनी पर टिकटों की बिक्री और उनकी कीमत तय करने में एकाधिकार बनाने का आरोप है, जिसे लेकर कंपनी के खिलाफ अमेरिका के कई राज्यों ने मुकदमा दायर किया था। इसी मुकदमे में अब समझौता हो गया है, जिसे लेकर आरोप लग रहे हैं कि ट्रंप ने इसमें दखल दिया है, जिससे कंपनी सख्त कार्रवाई से बच गई है।
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कई राज्य समझौते का विरोध कर रहे
वकीलों ने यह भी बताया कि फरवरी और मार्च के दौरान कंपनी तथा न्याय विभाग के बीच हुई कई आमने-सामने की बैठकों, वीडियो कॉन्फ्रेंस, टेलीफोन कॉल और लिखित संवादों में व्हाइट हाउस के वकील भी शामिल थे। मार्च में मुकदमे की सुनवाई शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद न्याय विभाग ने समझौते की घोषणा कर दी थी। हालांकि अधिकांश राज्यों ने इस समझौते का विरोध किया था। उनका कहना था कि यह समझौता टिकटमास्टर के जरिए कॉन्सर्ट स्थलों और लाइव कार्यक्रमों की टिकट बिक्री पर कंपनी लाइव नेशन के वर्चस्व को सीमित करने के लिए काफी नहीं है।
जूरी ने निष्कर्ष निकाला कि कंपनी एकाधिकार की स्थिति में थी, जिससे कॉन्सर्ट दर्शकों और खेल प्रेमियों को नुकसान पहुंचा। हालांकि इसके बावजूद भी समझौता होने को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। व्हाइट हाउस ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और संबंधित सवालों को न्याय विभाग के पास भेज दिया। वहीं न्याय विभाग ने भी तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
न्याय विभाग की स्वतंत्रता पर उठे सवाल
यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब न्याय विभाग की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठ रहे हैं और आलोचकों का कहना है कि व्हाइट हाउस तथा राष्ट्रपति की ओर से हस्तक्षेप के कारण उसकी स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है। गौरतलब है कि न्याय विभाग और दर्जनों राज्यों ने मिलकर ही लाइव नेशन के खिलाफ यह एंटीट्रस्ट मुकदमा दायर किया था।
न्यूयॉर्क में जूरी ने पाया कि टिकटमास्टर की प्रतिस्पर्धा-विरोधी गतिविधियों के कारण 22 राज्यों में लोगों को प्रति टिकट औसतन 1.72 अमेरिकी डॉलर अतिरिक्त भुगतान करना पड़ा। अदालत कंपनियों को यह राशि उपभोक्ताओं को लौटाने का आदेश दे सकती है।