{"_id":"6a3ca23aeae7d6a7980ec63a","slug":"earthquakes-high-risk-countries-nepal-t-rkiye-morocco-level-of-danger-extent-of-devastation-tragedy-history-2026-06-25","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"किन देशों में भूकंप की आशंका अधिक?: आपदाओं में नेपाल से तुर्किये और मोरक्को तक कितना खतरा, तबाही का आलम क्या?","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
किन देशों में भूकंप की आशंका अधिक?: आपदाओं में नेपाल से तुर्किये और मोरक्को तक कितना खतरा, तबाही का आलम क्या?
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला।
Published by: Jyoti Bhaskar
Updated Thu, 25 Jun 2026 09:06 AM IST
विज्ञापन
सार
Earthquakes: वेनेजुएला और जापान में आए भूकंप के बाद एक सवाल ये भी उठ रहा है कि दुनिया के किन देशों में भूकंप की आशंका अधिक होती है। बीते कुछ वर्षों में भूकंप जैसी आपदा के कारण नेपाल, तुर्किये और मोरक्को में बड़े पैमाने पर नुकसान हुए हैं। इन देशों में कितना खतरा होता है, बीती आपदाओं में तबाही का आलम क्या रहा? जानिए इस खबर में
भूकंप के झटके (सांकेतिक)
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
विस्तार
पश्चिम एशियाई देश तुर्किये में अक्सर विनाशकारी भूकंप आते हैं, जिससे सैकड़ों लोगों की जान चली जाती है। यहां की एक कहावत है 'भूगोल एक नियति है', जो भूकंप के प्रति यहां के लोगों की जागरूकता दर्शाती है। तुर्किये चार टेक्टोनिक प्लेटों के जंक्शन पर स्थित है, जो इसकी भूकंपीय संवेदनशीलता का मुख्य कारण है। तुर्किये का अधिकांश हिस्सा एनाटोलियन प्लेट पर है। यह प्लेट पूर्व में ईस्ट एनाटोलियन फॉल्ट, पश्चिम में अरेबियन प्लेट और उत्तर में यूरेशियन प्लेट से घिरी है।
बीते दो दशकों में कितनी बढ़ी भूकंप की संख्या?
दरअसल, पृथ्वी का बाहरी आवरण टेक्टोनिक प्लेटों से बना है, जो ठोस चट्टान के विशाल स्लैब हैं और मेंटल पर तैरते रहते हैं। डेमरन न्यूज एजेंसी के अनुसार, तुर्किये में 485 आधिकारिक फॉल्ट लाइनें हैं। पिछले एक दशक में 120 से अधिक नई फॉल्ट लाइनें बनी हैं, जिससे भूकंप की संख्या में वृद्धि हुई है। तुर्किये के आपदा और आपातकालीन प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक, 2020 में 33,000 से अधिक भूकंप के झटके महसूस किए गए। इनमें से 33 से अधिक की तीव्रता 4.0 रिक्टर स्केल से ज्यादा थी। 2021 में यह आंकड़ा 24,000 था, जबकि दो दशक पहले यह हजार से कम था।
विज्ञापन
विज्ञापन
तुर्किये में भूकंप के मूल कारणों में क्या-क्या?
एनाटोलियन टेक्टोनिक प्लेट यूरेशियन, अरेबियन और अफ्रीकी प्लेटों के बीच स्थित है। इन प्लेटों में दबाव बढ़ने पर एनाटोलियन प्लेट प्रभावित होती है। तुर्किये के नीचे एनाटोलियन प्लेट घड़ी की विपरीत दिशा में घूमती है, जिसे अरेबियन प्लेट धक्का देती है। यह यूरेशियन प्लेट से टकराती है, जिससे तीव्र भूकंप आते हैं। अफ्रीकन प्लेट लगातार एनाटोलियन प्लेट के नीचे धंस रही है।
सबसे विनाशकारी फॉल्ट लाइन कहां?
तुर्किये में सबसे विनाशकारी फॉल्ट लाइन नॉर्थ एनाटोलियन फॉल्ट लाइन (एनएएफ) है। यहां एनाटोलियन और यूरेशियन प्लेटें आपस में मिलती हैं, यह क्षेत्र इस्तांबुल कहलाता है। धरती के भीतर मुख्य तौर पर सात प्लेटें लगातार घूमती रहती हैं। इनके टकराने से फॉल्ट लाइन जोन बनते हैं, दबाव बढ़ता है और प्लेटें टूटकर ऊर्जा छोड़ती हैं, जिससे भूकंप आता है।
भूकंप से भारत के लिए क्या सबक, हाई-रिस्क जोन में कौन से राज्य?
अमेरिका के वाशिंगटन विश्वविद्यालय के भूकंप वैज्ञानिकों के मुताबिक अगली बड़ी दरार इस सदी के अंत तक ही फटेगी। आफ्टरशॉक्स का सिलसिला जारी है। 'खतरा अभी टला नहीं' इस पहलू को रेखांकित करते हुए वैज्ञानिकों ने कहा, समुद्रतटीय इलाकों में दहशत है। आफ्टरशॉक्स से पेसिफिक रिंग ऑफ फायर क्षेत्र में समुद्री लहरें अब भी रुक-रुक कर रौद्र रूप धारण कर रही हैं। रिंग ऑफ फायर एक विशाल टेक्टोनिक बेल्ट है जो दक्षिण अमेरिकी तटों से उत्तरी अमेरिका, जापान, फिलीपीन, इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड व रूस के कामचटका तक फैला है।
वैज्ञानिकों ने भारत के किन इलाकों को आगाह किया?
अगस्त-सितंबर 2025 में कामचटका में भूकंप के बाद अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों ने इसे मेगाक्वेक बताते हुए कहा कि ये आपदा भारत के लिए भी गंभीर सबक है। वैज्ञानिकों के मुताबिक रूस के सुदूर-पूर्वी कामचटका प्रायद्वीप के तट पर आए 8.8 तीव्रता के भूकंप ने न केवल पृथ्वी की परतों को चीरा, बल्कि वैज्ञानिकों की भविष्यवाणियां भी झकझोर दीं। नेशनल ज्योग्राफिक के रॉबिन जॉर्ज एंड्रयूज की रिपोर्ट के अनुसार, 2011 की फुकुशिमा आपदा के बाद यह सबसे बड़ा भूकंप है, जिसने समुद्र तल को तोड़ विशाल ऊर्जा महाविस्फोट किया।
वैज्ञानिकों ने भारत के किन इलाकों को आगाह किया?
अगस्त-सितंबर 2025 में कामचटका में भूकंप के बाद अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों ने इसे मेगाक्वेक बताते हुए कहा कि ये आपदा भारत के लिए भी गंभीर सबक है। वैज्ञानिकों के मुताबिक रूस के सुदूर-पूर्वी कामचटका प्रायद्वीप के तट पर आए 8.8 तीव्रता के भूकंप ने न केवल पृथ्वी की परतों को चीरा, बल्कि वैज्ञानिकों की भविष्यवाणियां भी झकझोर दीं। नेशनल ज्योग्राफिक के रॉबिन जॉर्ज एंड्रयूज की रिपोर्ट के अनुसार, 2011 की फुकुशिमा आपदा के बाद यह सबसे बड़ा भूकंप है, जिसने समुद्र तल को तोड़ विशाल ऊर्जा महाविस्फोट किया।
- भारत में तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह सुनामी व भूकंप के लिए उच्च जोखिम वाले क्षेत्र माने जाते हैं।
- अंडमान-निकोबार सबडक्शन जोन : मेगाथ्रस्ट भूकंप और सुनामी के लिहाज से सबसे संवेदनशील।
- पूर्वी तट तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल 2004 की तरह पुनः सुनामी की चपेट में आ सकते हैं।
- हिमालयन फॉल्ट लाइन : उत्तराखंड, हिमाचल, सिक्किम, कश्मीर और असम में बड़े भूकंपों की संभावना बनी रहती है।