होर्मुज पर सख्ती: ईरान की मंजूरी के बिना नहीं गुजर सकेंगे जहाज; तीन तेल टैंकर लौटे, वार्ता पर भी मंडराया संकट
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) ने चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को तेहरान द्वारा तय मार्गों और नियमों का पालन करना होगा। आईआरजीसी की चेतावनी के बाद कम से कम तीन विदेशी तेल टैंकरों को वापस लौटना पड़ा। वहीं, सिंगापुर के झंडे वाले एक जहाज पर हमले के बाद तनाव और बढ़ गया है। आइए, विस्तार से मामले को जानते हैं...
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विस्तार
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान ने अपना रुख और सख्त कर लिया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने साफ कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाज केवल उन्हीं मार्गों का इस्तेमाल कर सकेंगे, जिन्हें तेहरान की मंजूरी मिली होगी। ईरान की इस चेतावनी के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच संबंध पहले से ही तनावपूर्ण बने हुए हैं।
होर्मुज को लेकर आईआरजीसी ने क्या चेतावनी दी?
ईरान के सरकारी प्रसारक के अनुसार, आईआरजीसी ने कहा है कि होर्मुज क्षेत्र में केवल ईरान और उसकी नौसेना के नियम लागू होंगे। आईआरजीसी का कहना है कि चाहे जहाज ईरानी जलक्षेत्र से गुजरें या ओमान के प्रस्तावित वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करें, उन्हें ईरानी अधिकारियों के साथ पूरा समन्वय करना होगा। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि कोई जहाज इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह बयान ओमान द्वारा जहाजों के लिए नए मार्ग घोषित किए जाने के तुरंत बाद आया है।
तीन तेल टैंकरों को क्यों लौटना पड़ा?
ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, कम से कम तीन विदेशी तेल टैंकरों ने बिना अनुमति होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने की कोशिश की थी। आईआरजीसी की चेतावनी के बाद इन जहाजों को वापस लौटना पड़ा। हालांकि इन टैंकरों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इस घटना ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस निर्यात होता है। यदि इस मार्ग पर आवाजाही प्रभावित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।
सिंगापुर के जहाज पर हमले से क्यों बढ़ा तनाव?
तनाव उस समय और बढ़ गया, जब सिंगापुर के झंडे वाले एक जहाज पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला किया गया। इस हमले की जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली है। ईरान ने भी इस हमले की जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है, लेकिन उसने इससे इनकार भी नहीं किया है। इस घटना के बाद संयुक्त राष्ट्र ने होर्मुज में फंसे करीब 11,000 नाविकों को बचाने के लिए चलाए जा रहे अपने मिशन को रोक दिया। सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच समुद्री व्यापार पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
क्या अमेरिका-ईरान वार्ता में होर्मुज सबसे बड़ा मुद्दा बनेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी वार्ता का सबसे बड़ा मुद्दा बन सकता है। ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम गरीबाबादी ने स्पष्ट कहा है कि एक तटीय देश होने के नाते ईरान की सहमति के बिना कोई समानांतर समुद्री मार्ग या फैसला स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि ईरान के हितों को नजरअंदाज किया गया, तो तेहरान आवश्यक कदम उठाएगा। ऐसे में होर्मुज को लेकर बढ़ती तनातनी वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा दोनों के लिए नई चुनौती बन सकती है।