UNGA: 'भारत शांति-सुरक्षा के एजेंडे के लिए प्रतिबद्ध'; संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में सफलता पर बोले राजदूत हरीश
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में कहा कि शांति स्थापना का काम देशों की अपनी जरूरतों और स्वामित्व पर आधारित होना चाहिए।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
#IndiaAtUN
PR @AmbHarishP spoke today at the #UNGA Debate on Peacebuilding & Sustaining Peace and attended the PBC Annual Session marking 20 years of the @UN Peacebuilding Architecture during the inaugural Peacebuilding Week.विज्ञापन
He highlighted:
➡️ Peacebuilding must be… pic.twitter.com/0EkaEZvE12 — India at UN, NY (@IndiaUNNewYork) June 26, 2026
राजदूत ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारी हमेशा भरोसे, सम्मान और समानता पर टिकी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि दुनिया दाता और प्राप्तकर्ता (देने वाले और लेने वाले) वाले पुराने नजरिए से आगे बढ़े। शांति स्थापना का असली पैमाना यही है कि कोई देश अपनी राष्ट्रीय क्षमता और संस्थाओं को कितना मजबूत बना पाता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को केवल वित्तीय और तकनीकी सहायता देकर एक सहयोगी की भूमिका निभानी चाहिए, जबकि मुख्य फैसले लेने का अधिकार उस देश की सरकार के पास ही होना चाहिए।
भारत ने शांति स्थापना के लिए मिलने वाले फंड की खराब स्थिति पर गहरी चिंता जताई। महासचिव की रिपोर्ट का हवाला देते हुए राजदूत ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में स्वैच्छिक योगदान में लगातार गिरावट आई है। इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र के पास चल रही नकदी की कमी (लिक्विडिटी क्राइसिस) ने भी फंड की उपलब्धता को कम कर दिया है। उन्होंने सुझाव दिया कि कम संसाधनों के बीच असर दिखाने के लिए पैसा उन जगहों पर प्राथमिकता से खर्च करना चाहिए जहां युद्ध अभी खत्म हुआ है। हालांकि, उन्होंने शांति स्थापना कोष में 5 करोड़ डॉलर के योगदान की मंजूरी का स्वागत भी किया।
भारत ने 'महिला, शांति और सुरक्षा' एजेंडे के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता दोहराई। राजदूत ने जानकारी दी कि भारत की मेजर अभिलाषा बराक को '2025 मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर' चुना गया है। यह सम्मान शांति स्थापना के कार्यों में भारत की महिलाओं के योगदान और समर्पण को दर्शाता है।
ये भी पढ़ें: UNSC: 'स्कूलों और बच्चों को निशाना बनाने वालों की तय हो जवाबदेही', सुरक्षा परिषद में भारत ने दी सलाह
यह चर्चा संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना ढांचे के 20 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित शांति स्थापना सप्ताह का हिस्सा थी। भारत ने स्पष्ट किया कि वह राष्ट्र निर्माण के अपने अनूठे और सफल अनुभवों को दुनिया के साथ साझा करने के लिए हमेशा तैयार है। भारत का मानना है कि जब तक स्थानीय स्तर पर जिम्मेदारी और स्वामित्व नहीं लिया जाएगा, तब तक दुनिया में स्थायी शांति का सपना पूरा नहीं हो सकता।