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US: 'हिंदू कोई धर्म नहीं, बल्कि एक सभ्यतागत पहचान', वॉशिंगटन में होसबाले बोले- RSS हमेशा परंपरा की बात करता है

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: Shubham Kumar Updated Fri, 24 Apr 2026 08:55 AM IST
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सार

आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि हिंदू एक सभ्यतागत पहचान है, धर्म नहीं। उन्होंने माना कि पड़ोसी देशों से तनाव राजनीति, इतिहास की गलत समझ और भरोसे की कमी से पैदा होता है, जिसे संवाद और सहयोग से दूर किया जा सकता है।

Dattatreya Hosabale in Washington says Hinduism is not a religion but a civilizational identity News In Hindi
दत्तात्रेय होसबाले, महासचिव, आरएसएस - फोटो : ANI
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विस्तार

अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने भारत, उसकी संस्कृति, पड़ोसी देशों और वैश्विक संबंधों को लेकर कई अहम बातें कही हैं। उन्होंने साफ शब्दों में आरएसएस की सोच और भारत की भूमिका को समझाने की कोशिश की। होसबाले ने कहा कि आरएसएस के अनुसार हिंदू कोई धर्म नहीं, बल्कि एक सभ्यतागत पहचान है। उन्होंने बताया कि संगठन हमेशा संस्कृति, परंपरा और मूल्यों की बात करता है, न कि किसी एक धर्म की।

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उनके मुताबिक, भारत और उसके पड़ोसी देशों के बीच समय-समय पर तनाव रहा है, जिसकी वजह राजनीति, इतिहास की गलत समझ और आपसी भरोसे की कमी है। उन्होंने कहा कि लगातार बातचीत और संवाद से इन समस्याओं को दूर किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के एक पड़ोसी देश के साथ ज्यादा समस्याएं हैं, और इसके पीछे बाहरी ताकतों की भूमिका भी रही है, जिससे आपसी विश्वास कमजोर हुआ है।
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भारत-अमेरिका संबंधों पर भी बोले होसबाले
भारत और अमेरिका के संबंधों पर बोलते हुए होसबाले ने कहा कि अगर दोनों देश मजबूत साझेदारी चाहते हैं, तो उन्हें भरोसे और समान अवसर के आधार पर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने लोगों के बीच सीधे संबंध बढ़ाने पर भी जोर दिया। आधुनिकता और संस्कृति के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि दोनों एक साथ चल सकते हैं और इनमें कोई टकराव नहीं है। उन्होंने बताया कि एशियाई समाजों में लंबे समय से यह संतुलन देखने को मिलता है। सनातन को उन्होंने ऐसा बताया जो हमेशा से है और समय के साथ आगे बढ़ता रहता है।

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आरएसएस पर लगे आरोपों को किया खारिज
 
इसके साथ ही आरएसएस पर हिंदू श्रेष्ठतावाद के आरोपों को खारिज करते हुए होसबाले ने कहा कि हिंदू विचारधारा सभी में एकता देखने की बात करती है। उन्होंने कहा कि इतिहास में हिंदुओं ने न तो किसी देश पर हमला किया और न ही किसी को गुलाम बनाया, इसलिए उन्हें किसी बात के लिए माफी मांगने की जरूरत नहीं है। कुल मिलाकर उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आरएसएस अपनी विचारधारा को सांस्कृतिक और समावेशी रूप में प्रस्तुत कर रहा है और भारत की वैश्विक भूमिका को मजबूत करने पर जोर दे रहा है।

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