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Greenland-US Tension: ‘पहले गोली चलाएंगे, बाद में सवाल’; हमले की आशंका के बीच ट्रंप को डेनमार्क ने दी चेतावनी

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोपेनहेगन Published by: शिवम गर्ग Updated Fri, 09 Jan 2026 09:31 AM IST
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सार

डेनमार्क ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ग्रीनलैंड पर हमला करता है तो उसके सैनिक पहले गोली चलाएंगे और बाद में सवाल करेंगे। ट्रंप के ग्रीनलैंड रणनीति पर यूरोप में तनाव बढ़ा है।

Denmark Warns Donald Trump: Shoot First, Ask Questions Later if US Attacked Greenland
डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन और अमेरिकी राष्ट्रपित ट्रंप (फाइल फोटो) - फोटो : ANI Photos
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विस्तार
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डेनमार्क ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ग्रीनलैंड को लेकर एक कड़ी चेतावनी दी है। डेनमार्क के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि अगर किसी भी शक्ति द्वारा ग्रीनलैंड पर हमला किया जाता है तो उसके सैनिक पहले गोली चलाएंगे और बाद में सवाल पूछेंगे यानी बिना किसी अनुमति या आदेश का इंतजार किए तुरंत जवाबी कार्रवाई करेंगे। यह आदेश 1952 के ठंडे युद्ध के नियमों के तहत है, जो किसी भी विदेशी आक्रमण के जवाब में तुरंत प्रतिरोध की आवश्यकता को कहता है।

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डेनिश रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह 1952 का आदेश अब भी लागू है और इसका उद्देश्य किसी भी संभावित आक्रमण के मामले में तुरंत जवाब देना है। मंत्रालय ने कहा कि नियम के तहत सैनिकों को ऊपर के आदेश का इंतजार नहीं करना होगा, बल्कि हमले की स्थिति में तुरंत युद्ध में उतरना होगा।
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अमेरिका ग्रीनलैंड पर करना चाहता है नियंत्रण
ग्रीनलैंड आर्कटिक क्षेत्र में स्थित एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्वायत्त क्षेत्र है, जो डेनमार्क के शासन में आता है। ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है और यह बात सामने आई है कि अमेरिका ग्रीनलैंड पर नियंत्रण हासिल करने के विकल्पों पर विचार कर रहा है, जिसमें सैन्य शक्ति का उपयोग भी शामिल हो सकता है।



नाटो सदस्य का  ग्रीनलैंड को समर्थन
इस चेतावनी के बीच यूरोपीय देशों में चिंता बढ़ी है। फ्रांस, जर्मनी और अन्य नाटो सदस्य ग्रीनलैंड की संप्रभुता का समर्थन कर रहे हैं और अमेरिका को सामूहिक रूप से स्थिति को शांत करने की अपील कर रहे हैं। फ्रांस के विदेश मंत्री ने कहा है कि यूरोपीय साझेदारों के साथ मिलकर प्रतिक्रिया देने की आवश्यकता है। हालांकि अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि वह बातचीत और कूटनीतिक उपायों के लिए तैयार है, पर ट्रंप के आक्रामक रुख ने यूरोपीय नेताओं में बेचैनी पैदा कर दी है। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने भी स्पष्ट किया है कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है और किसी भी प्रकार के आजमाए गए कब्जे को खंडित कर दिया जाएगा।

ये भी पढ़ें:- Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति पीएम मोदी से संबंध पर ये क्या बोल गए? रूस-भारत व्यापार और टैरिफ पर कही ये बात

ट्रंप को डेनमार्क ने दी चेतावनी
डेनमार्क की पीएम ने साफ शब्दों में ट्रंप से कहा, 'डेनमार्क साम्राज्य और ग्रीनलैंड नाटो का हिस्सा हैं। इसकी वजह से यह गठबंधन की सुरक्षा गारंटी के तहत आता है। डेनमार्क और अमेरिका के बीच पहले से ही एक रक्षा समझौता है, जो अमेरिका को ग्रीनलैंड तक व्यापक पहुंच प्रदान करता है।' उन्होंने कहा, 'इसी आधार पर मैं अमेरिका से आग्रह करती हूं कि वह ऐतिहासिक रूप से घनिष्ठ सहयोगी और एक ऐसे देश और लोगों के खिलाफ धमकियां देना बंद करे, जिन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि वे बिकने वाले नहीं हैं।'
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