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Pakistan: ढह सकते हैं दिलीप कुमार और राज कपूर के पैतृक घर, धरोहर को बचाने के लिए भी पाकिस्तान के पास पैसे नहीं
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Mon, 18 May 2026 04:50 AM IST
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सार
पाकिस्तान के पेशावर स्थित महान बॉलीवुड अभिनेता दिलीप कुमार और राज कपूर के पैतृक घरों पर ढहने का खतरा है। हालिया भूकंप और लगातार बारिश ने इन इमारतों को खस्ताहाल कर दिया है। साल 2016 में राष्ट्रीय धरोहर घोषित होने और करोड़ों रुपये का बजट पास होने के बावजूद मरम्मत का काम शुरू नहीं हुआ है। आइए, विस्तार से जानते हैं कि आखिर पाकिस्तान इन कामों से जुड़ा पैसा कहां जा रहा है...
ढह सकते हैं दिलीप कुमार और राज कपूर के पैतृक घर
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
बॉलीवुड के दो सबसे महान और दिग्गज अभिनेताओं, दिलीप कुमार और राज कपूर के पैतृक घर, जो कि पाकिस्तान के पेशावर शहर में स्थित हैं, अब बहुत ही बुरी हालत में हैं। ये ऐतिहासिक इमारतें इतनी खस्ताहाल हो चुकी हैं कि ये किसी भी वक्त ढह सकती हैं। इन इमारतों से सिनेमा प्रेमियों की बहुत सी पुरानी यादें जुड़ी हुई हैं। पाकिस्तान सरकार ने इन दोनों घरों के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए इन्हें राष्ट्रीय धरोहर भी घोषित किया था। लेकिन, केवल घोषणा करने से काम नहीं चलता है। आज स्थिति यह है कि पैसे की भारी कमी और प्रशासन की पूरी लापरवाही के कारण इन धरोहरों का कोई रखरखाव नहीं हो पा रहा है। अगर जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो इतिहास से जुड़ी ये दोनों इमारतें हमेशा के लिए मलबे में मिल जाएंगी।
हाल ही में आए एक जोरदार भूकंप ने इन दोनों ऐतिहासिक इमारतों को बहुत गहरी चोट पहुंचाई है। भूकंप के झटकों के कारण इन भवनों की दीवारें क्षतिग्रस्त हो गई हैं और ये पहले से कहीं ज्यादा असुरक्षित हो गए हैं। ये इमारतें उत्तर-पश्चिमी खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की राजधानी पेशावर के बहुत ही पुराने इलाकों में बनी हुई हैं। आपको बता दें कि साल 2016 में ही पाकिस्तान सरकार ने आधिकारिक रूप से इन दोनों दिवंगत अभिनेताओं के पैतृक घरों को राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा दे दिया था। इसका सीधा मतलब था कि सरकार इनकी पूरी देखभाल करेगी। लेकिन असलियत में, कंगाली और आर्थिक तंगी से जूझ रहा खस्ताहाल पाकिस्तान इन महत्वपूर्ण भवनों का जीर्णोद्धार तक नहीं करवा पा रहा है।
ये भी पढ़ें- Kerala CM VD Satheesan Oath: आज केरल के मुख्यमंत्री का पद संभालेंगे वीडी सतीशन, 20 मंत्रियों का भी शपथ ग्रहण
क्या है सौ साल पुरानी कपूर हवेली और दिलीप कुमार के घर की वर्तमान स्थिति?
पेशावर के मशहूर किस्सा ख्वानी बाजार के ढाकी नलबंदी इलाके में स्थित 'कपूर हवेली' कभी बहुत ही भव्य हुआ करती थी। यह हवेली लगभग 100 साल पुरानी है। लेकिन समय के साथ और लगातार होने वाली तेज बारिश के कारण यह हवेली अब बहुत कमजोर हो चुकी है। बीते 3 अप्रैल को आए भूकंप के कारण इस हवेली की जर्जर संरचना और भी अधिक खस्ताहाल हो गई। दूसरी तरफ, मोहल्ला खुदादाद क्षेत्र में स्थित दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार का पैतृक घर भी अब सिर्फ एक वीरान और डरावना खंडहर जैसा दिखाई देता है। यह घर अपने समय की एक बहुत ही विशिष्ट और सुंदर पेशावरी इमारत है, जिसकी मौजूदा हालत बेहद खराब है। घर के कई कमरों की छतें पहले ही गिर चुकी हैं। हालात इतने बुरे हैं कि जब भी बारिश होती है, तो इसकी दीवारें ढहकर धीरे-धीरे मलबे में तब्दील होती जा रही हैं।
सरकार द्वारा मंजूर किए गए करोड़ों रुपये के बजट का आखिर क्या हुआ?
ऐसा नहीं है कि सरकार ने कागजों पर कोई काम नहीं किया है। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की सरकार ने वर्ष 2021-22 में इन दोनों ऐतिहासिक भवनों की खरीद के लिए 2.35 करोड़ पाकिस्तानी रुपये की भारी भरकम राशि को मंजूरी दी थी। इसके बाद, इमारत को फिर से ठीक करने के लिए जुलाई 2025 में प्रांतीय सरकार ने दोनों भवनों के जीर्णोद्धार के लिए 3.38 करोड़ पाकिस्तानी रुपये के बजट को भी हरी झंडी दे दी थी। लेकिन इतनी बड़ी रकम मंजूर होने के बावजूद, जमीन पर हकीकत बिल्कुल अलग है। लंबा समय बीत जाने के बाद भी मरम्मत का काम अब तक शुरू नहीं हो पाया है। फाइलों में पैसा जरूर पास हो गया है, लेकिन हकीकत में इमारतों को बचाने के लिए कोई काम नहीं किया गया है।
ऐतिहासिक इमारतों को लेकर विशेषज्ञों और सांस्कृतिक परिषद ने क्या चेतावनी दी है?
सरकार की इस घोर अनदेखी पर कई लोगों ने कड़ी नाराजगी जताई है। खैबर पख्तूनख्वा स्थित एक गैर-लाभकारी सांस्कृतिक विरासत परिषद के सचिव शकील वहीदुल्लाह ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि सरकार इन जीर्ण-शीर्ण हो रहे ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण स्थलों के संरक्षण पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रही है। इसके साथ ही, कई विशेषज्ञों ने भी सरकार का ध्यान इन इमारतों की दिन-ब-दिन होती खस्ता हालत की ओर आकर्षित किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि बरसात का मौसम शुरू होने में अब कुछ ही सप्ताह का समय शेष रह गया है। ऐसे में उन्होंने इन ऐतिहासिक इमारतों के तत्काल संरक्षण और जीर्णोद्धार की सख्त मांग की है, क्योंकि बारिश शुरू होने पर ये पूरी तरह ढह सकती हैं।
हाल ही में आए एक जोरदार भूकंप ने इन दोनों ऐतिहासिक इमारतों को बहुत गहरी चोट पहुंचाई है। भूकंप के झटकों के कारण इन भवनों की दीवारें क्षतिग्रस्त हो गई हैं और ये पहले से कहीं ज्यादा असुरक्षित हो गए हैं। ये इमारतें उत्तर-पश्चिमी खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की राजधानी पेशावर के बहुत ही पुराने इलाकों में बनी हुई हैं। आपको बता दें कि साल 2016 में ही पाकिस्तान सरकार ने आधिकारिक रूप से इन दोनों दिवंगत अभिनेताओं के पैतृक घरों को राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा दे दिया था। इसका सीधा मतलब था कि सरकार इनकी पूरी देखभाल करेगी। लेकिन असलियत में, कंगाली और आर्थिक तंगी से जूझ रहा खस्ताहाल पाकिस्तान इन महत्वपूर्ण भवनों का जीर्णोद्धार तक नहीं करवा पा रहा है।
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क्या है सौ साल पुरानी कपूर हवेली और दिलीप कुमार के घर की वर्तमान स्थिति?
पेशावर के मशहूर किस्सा ख्वानी बाजार के ढाकी नलबंदी इलाके में स्थित 'कपूर हवेली' कभी बहुत ही भव्य हुआ करती थी। यह हवेली लगभग 100 साल पुरानी है। लेकिन समय के साथ और लगातार होने वाली तेज बारिश के कारण यह हवेली अब बहुत कमजोर हो चुकी है। बीते 3 अप्रैल को आए भूकंप के कारण इस हवेली की जर्जर संरचना और भी अधिक खस्ताहाल हो गई। दूसरी तरफ, मोहल्ला खुदादाद क्षेत्र में स्थित दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार का पैतृक घर भी अब सिर्फ एक वीरान और डरावना खंडहर जैसा दिखाई देता है। यह घर अपने समय की एक बहुत ही विशिष्ट और सुंदर पेशावरी इमारत है, जिसकी मौजूदा हालत बेहद खराब है। घर के कई कमरों की छतें पहले ही गिर चुकी हैं। हालात इतने बुरे हैं कि जब भी बारिश होती है, तो इसकी दीवारें ढहकर धीरे-धीरे मलबे में तब्दील होती जा रही हैं।
सरकार द्वारा मंजूर किए गए करोड़ों रुपये के बजट का आखिर क्या हुआ?
ऐसा नहीं है कि सरकार ने कागजों पर कोई काम नहीं किया है। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की सरकार ने वर्ष 2021-22 में इन दोनों ऐतिहासिक भवनों की खरीद के लिए 2.35 करोड़ पाकिस्तानी रुपये की भारी भरकम राशि को मंजूरी दी थी। इसके बाद, इमारत को फिर से ठीक करने के लिए जुलाई 2025 में प्रांतीय सरकार ने दोनों भवनों के जीर्णोद्धार के लिए 3.38 करोड़ पाकिस्तानी रुपये के बजट को भी हरी झंडी दे दी थी। लेकिन इतनी बड़ी रकम मंजूर होने के बावजूद, जमीन पर हकीकत बिल्कुल अलग है। लंबा समय बीत जाने के बाद भी मरम्मत का काम अब तक शुरू नहीं हो पाया है। फाइलों में पैसा जरूर पास हो गया है, लेकिन हकीकत में इमारतों को बचाने के लिए कोई काम नहीं किया गया है।
ऐतिहासिक इमारतों को लेकर विशेषज्ञों और सांस्कृतिक परिषद ने क्या चेतावनी दी है?
सरकार की इस घोर अनदेखी पर कई लोगों ने कड़ी नाराजगी जताई है। खैबर पख्तूनख्वा स्थित एक गैर-लाभकारी सांस्कृतिक विरासत परिषद के सचिव शकील वहीदुल्लाह ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि सरकार इन जीर्ण-शीर्ण हो रहे ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण स्थलों के संरक्षण पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रही है। इसके साथ ही, कई विशेषज्ञों ने भी सरकार का ध्यान इन इमारतों की दिन-ब-दिन होती खस्ता हालत की ओर आकर्षित किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि बरसात का मौसम शुरू होने में अब कुछ ही सप्ताह का समय शेष रह गया है। ऐसे में उन्होंने इन ऐतिहासिक इमारतों के तत्काल संरक्षण और जीर्णोद्धार की सख्त मांग की है, क्योंकि बारिश शुरू होने पर ये पूरी तरह ढह सकती हैं।