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India Nordic Summit: भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत, नॉर्डिक देशों ने की पहलगाम और लाल किला आतंकी हमलों की निंदा

एएनआई, ओस्लो Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Wed, 20 May 2026 05:03 AM IST
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सार

ओस्लो में आयोजित तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में नॉर्डिक देशों ने 2025 में हुए पहलगाम और लाल किला आतंकी हमलों की कड़ी निंदा की है। भारत और नॉर्डिक देशों ने साझा बयान में सीमा पार आतंकवाद और आतंकी फंडिंग रोकने पर जोर दिया है।

Diplomatic Victory for India Nordic Nations Summit Condemn Terror Attacks in Pahalgam Red Fort
पीएम मोदी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

दुनिया भर में आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई को एक बहुत बड़ा और मजबूत समर्थन मिला है। नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में आयोजित तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भारत और नॉर्डिक देशों ने एक सुर में आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश दिया। इस सम्मेलन में नॉर्डिक देशों ने भारत में हुए दो बड़े आतंकी हमलों की कड़ी निंदा की है और भारत के साथ मिलकर आतंकवाद से लड़ने का पक्का संकल्प लिया है। 
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विदेश मंत्रालय की तरफ से मंगलवार को एक साझा बयान जारी किया गया। इस साझा बयान के अनुसार, नॉर्डिक देशों ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले और 10 नवंबर 2025 को नई दिल्ली में लाल किले के पास हुए भयानक ब्लास्ट की कड़े शब्दों में निंदा की है। इन सभी देशों ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी रूप में पनपने वाले आतंकवाद और सीमा पार से होने वाले हिंसक उग्रवाद को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही, अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत इस गंभीर खतरे से निपटने के लिए सभी देशों से एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया गया है।
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आतंकवाद और उसकी फंडिंग को जड़ से खत्म करने के लिए क्या बड़ा फैसला लिया गया है?
शिखर सम्मेलन में सभी देशों के नेताओं ने हिंसक कट्टरपंथ और आतंकवाद को जड़ से खत्म करने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने पर पूरी सहमति जताई है। इसके तहत आतंकी फंडिंग (पैसे की सप्लाई) को रोकना, मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय नियमों को सख्ती से लागू करना और आतंकवादियों द्वारा नई तकनीक के गलत इस्तेमाल को रोकना शामिल है। नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र (UN) और फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) जैसे वैश्विक मंचों के जरिए आतंकी फंडिंग के रास्तों को पूरी तरह से बंद करने की अपनी पुरानी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया है।

समुद्री अर्थव्यवस्था (ब्लू इकोनॉमी) को मजबूत करने के लिए क्या अहम योजना बनाई गई है?
इस खास बैठक में केवल आतंकवाद ही नहीं, बल्कि रोजगार और अर्थव्यवस्था को लेकर भी अहम चर्चा हुई। नेताओं ने 'टिकाऊ समुद्री अर्थव्यवस्था' (सस्टेनेबल ब्लू इकोनॉमी) के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने पर बहुत जोर दिया है। उनका साफ मानना है कि इससे देशों का आर्थिक विकास तेज होगा, युवाओं के लिए नई नौकरियां पैदा होंगी, लोगों को अच्छा पोषण मिलेगा और दुनिया में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी। भारत और नॉर्डिक देशों ने तकनीक के आदान-प्रदान से शिपिंग उद्योग (जहाजरानी) को कम कार्बन उत्सर्जन वाले साफ-सुथरे उद्योग में बदलने का अहम फैसला किया है।

जहाजों की सुरक्षित रीसाइक्लिंग और पर्यावरण को लेकर क्या बड़ा समझौता हुआ है?
भारत और नॉर्डिक देशों के बीच समुद्री और जहाज निर्माण क्षेत्रों में काम करने वाले प्रमुख हितधारकों (जैसे जहाज मालिकों और शिपयार्ड) के बीच साझेदारी बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। दोनों पक्षों ने पुराने जहाजों की सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल रीसाइक्लिंग के लिए 'हांगकांग अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन' को लागू करने पर अपनी सहमति जताई है। इसके अलावा, नेताओं ने जलवायु परिवर्तन, बायोडायवर्सिटी (जैव विविधता) के नुकसान और प्रदूषण जैसी गंभीर वैश्विक समस्याओं से निपटने के लिए एक साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई है।

भारत और नॉर्डिक देशों के बीच रक्षा सहयोग कैसे और अधिक मजबूत होगा?
ओस्लो में हुए इस बड़े शिखर सम्मेलन में भारत और नॉर्डिक देशों के बीच रक्षा संबंधों को लेकर भी बहुत ही सकारात्मक और अहम चर्चा हुई है। नेताओं ने इस बात पर खुशी जाहिर की है कि दोनों पक्षों के बीच रक्षा संबंधों में लगातार तेजी आ रही है। उन्होंने रक्षा क्षेत्र के उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने और सेना के लिए रक्षा से जुड़े जरूरी उपकरणों की सप्लाई को लेकर जोर दिया है। यह मजबूत कदम भारत की सेनाओं को और अधिक ताकतवर बनाने में बहुत मददगार साबित होगा।

भारत के रक्षा क्षेत्र में विदेशी कंपनियों को निवेश का क्या बड़ा मौका मिलने वाला है?
शिखर सम्मेलन के दौरान भारत ने नॉर्डिक देशों की रक्षा कंपनियों को भारत में निवेश करने के लिए खुला आमंत्रण दिया है। नेताओं ने इस बात को माना कि भारत के 'डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर' (रक्षा औद्योगिक गलियारों) में नॉर्डिक रक्षा कंपनियों के लिए निवेश के बहुत बड़े और सुनहरे अवसर मौजूद हैं। सबसे खास बात यह है कि भारत सरकार ने रक्षा क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) की अनुमति दे दी है, जिसका फायदा उठाकर विदेशी कंपनियां अब भारत में ही आधुनिक रक्षा उपकरण और हथियार बना सकेंगी।
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