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युद्ध और मौसम की दोहरी मार: अगले 6 से 12 महीने में दुनिया झेलेगी भयंकर महंगाई और कृषि संकट, AFO ने दी चेतावनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Fri, 22 May 2026 07:11 AM IST
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सार
संयुक्त राष्ट्र के संगठन एफएओ ने चेतावनी दी है कि होर्मुज में चल रहे तनाव और युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा और खाद्य आपूर्ति पर भारी दबाव है। इसके साथ ही अल नीनो के कारण दुनिया भर में सूखा और अनियमित बारिश का खतरा 82% तक बढ़ गया है। इन दोनों की दोहरी मार से अगले 6 से 12 महीनों में पूरी दुनिया में भयंकर महंगाई, कृषि संकट और भुखमरी जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। आइए, विस्तार से मामले को जानते हैं...
क्या हैं एफएओ के नए आंकड़े?
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
दुनिया भर में आम लोगों पर महंगाई और भुखमरी का एक बहुत बड़ा खतरा मंडराने लगा है। युद्ध और मौसम की दोहरी मार से पूरी दुनिया में हाहाकार मचने की आशंका है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने एक बहुत ही डराने वाली चेतावनी दी है। एफएओ का कहना है कि आने वाले 6 से 12 महीने पूरी दुनिया के लिए बहुत ही नाजुक और निर्णायक होने वाले हैं। ऐसे में लोगों की रसोई तक महंगाई की आग पहुंचना लगभग तय माना जा रहा है।
इसका सीधा मतलब यह है कि पश्चिम एशिया में जो तनाव और युद्ध के हालात बने हुए हैं, उसका असर सिर्फ तेल पर नहीं पड़ेगा। होर्मुज में हो रही दिक्कतों और बाधाओं की वजह से पूरी दुनिया में खाने-पीने की चीजों के दाम तेजी से बढ़ेंगे। एफएओ के मुताबिक, युद्ध से पैदा हुआ ऊर्जा संकट और खराब मौसम मिलकर खेती-किसानी पर बहुत बुरा असर डाल रहे हैं। अगर यह संकट ऐसे ही बढ़ता रहा, तो दुनिया के कई कमजोर देशों में लोगों को भूखे पेट सोने पर मजबूर होना पड़ सकता है और महंगाई पूरी तरह से बेकाबू हो जाएगी।
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अल नीनो के कारण दुनिया में सूखा और अनियमित बारिश का खतरा क्यों बढ़ गया है?
इस भयंकर खाद्य संकट का एक बड़ा कारण 'अल नीनो' नाम की जलवायु घटना है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार, अल नीनो प्रशांत महासागर से जुड़ी एक ऐसी स्थिति है, जो पूरी दुनिया के मौसम को बदल कर रख देती है। इसके कारण दुनिया के कई हिस्सों में भयंकर सूखा पड़ता है, तो कहीं बहुत ज्यादा बारिश होती है। अमेरिका के मौसम विज्ञान केंद्र ने बताया है कि मई से जुलाई 2026 के बीच अल नीनो के शुरू होने की संभावना 82 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जिससे खेती चौपट हो सकती है। ट्रंप मौजूदा अमेरिका के राष्ट्रपति हैं। उनका प्रशासन भी दुनिया भर में मौसम और युद्ध से पैदा होने वाले इन खतरों पर बारीकी से नजर रख रहा है।
लगातार तीसरे महीने खाद्य पदार्थों की कीमतें क्यों आसमान छू रही हैं?
एफएओ की नई रिपोर्ट बताती है कि अप्रैल 2026 में दुनिया भर में खाने-पीने की चीजों के दाम (वैश्विक खाद्य मूल्य सूचकांक) लगातार तीसरे महीने बढ़े हैं। इसमें सबसे ज्यादा तेजी खाने वाले तेल (खाद्य तेल) की कीमतों में आई है। खाद्य तेल का सूचकांक 5.9 प्रतिशत बढ़कर जुलाई 2022 के बाद अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। इस भारी महंगाई के पीछे सबसे बड़ा कारण ऊर्जा (पेट्रोल-डीजल) की बढ़ती कीमतें और मध्य पूर्व (होर्मुज आदि) में चल रहा भारी तनाव है।
इसका सीधा मतलब यह है कि पश्चिम एशिया में जो तनाव और युद्ध के हालात बने हुए हैं, उसका असर सिर्फ तेल पर नहीं पड़ेगा। होर्मुज में हो रही दिक्कतों और बाधाओं की वजह से पूरी दुनिया में खाने-पीने की चीजों के दाम तेजी से बढ़ेंगे। एफएओ के मुताबिक, युद्ध से पैदा हुआ ऊर्जा संकट और खराब मौसम मिलकर खेती-किसानी पर बहुत बुरा असर डाल रहे हैं। अगर यह संकट ऐसे ही बढ़ता रहा, तो दुनिया के कई कमजोर देशों में लोगों को भूखे पेट सोने पर मजबूर होना पड़ सकता है और महंगाई पूरी तरह से बेकाबू हो जाएगी।
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अल नीनो के कारण दुनिया में सूखा और अनियमित बारिश का खतरा क्यों बढ़ गया है?
इस भयंकर खाद्य संकट का एक बड़ा कारण 'अल नीनो' नाम की जलवायु घटना है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार, अल नीनो प्रशांत महासागर से जुड़ी एक ऐसी स्थिति है, जो पूरी दुनिया के मौसम को बदल कर रख देती है। इसके कारण दुनिया के कई हिस्सों में भयंकर सूखा पड़ता है, तो कहीं बहुत ज्यादा बारिश होती है। अमेरिका के मौसम विज्ञान केंद्र ने बताया है कि मई से जुलाई 2026 के बीच अल नीनो के शुरू होने की संभावना 82 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जिससे खेती चौपट हो सकती है। ट्रंप मौजूदा अमेरिका के राष्ट्रपति हैं। उनका प्रशासन भी दुनिया भर में मौसम और युद्ध से पैदा होने वाले इन खतरों पर बारीकी से नजर रख रहा है।
लगातार तीसरे महीने खाद्य पदार्थों की कीमतें क्यों आसमान छू रही हैं?
एफएओ की नई रिपोर्ट बताती है कि अप्रैल 2026 में दुनिया भर में खाने-पीने की चीजों के दाम (वैश्विक खाद्य मूल्य सूचकांक) लगातार तीसरे महीने बढ़े हैं। इसमें सबसे ज्यादा तेजी खाने वाले तेल (खाद्य तेल) की कीमतों में आई है। खाद्य तेल का सूचकांक 5.9 प्रतिशत बढ़कर जुलाई 2022 के बाद अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। इस भारी महंगाई के पीछे सबसे बड़ा कारण ऊर्जा (पेट्रोल-डीजल) की बढ़ती कीमतें और मध्य पूर्व (होर्मुज आदि) में चल रहा भारी तनाव है।
| कारण | वैश्विक प्रभाव |
| होर्मुज में तनाव और युद्ध | कच्चे तेल के साथ-साथ ऊर्जा की कीमतों में भारी उछाल। |
| अल नीनो की दस्तक | भयंकर सूखा और अनियमित बारिश से खेती और फसलों को नुकसान। |
| खाद्य तेल की कीमतें | 5.9% की वृद्धि के साथ जुलाई 2022 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर। |
| एफएओ की चेतावनी | अगले 6-12 महीनों में गरीब देशों में गंभीर खाद्य संकट और भुखमरी। |