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ईरान युद्ध को लेकर अमेरिका में सियासी घमासान: ट्रंप को रोकने वाला प्रस्ताव टला, अमेरिकी संसद में बढ़ा विरोध
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: Pavan
Updated Fri, 22 May 2026 06:52 AM IST
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सार
War Powers Resolution: अमेरिकी संसद में डोनाल्ड ट्रंप के ईरान युद्ध अभियान को रोकने वाले प्रस्ताव पर वोटिंग टाल दी गई। रिपब्लिकन नेताओं को डर था कि प्रस्ताव पास हो सकता है। युद्ध लंबा खिंचने, तेल कीमतें बढ़ने और कानूनी सवालों के कारण ट्रंप को अपनी ही पार्टी के नेताओं के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। अब यह मामला केवल ईरान युद्ध तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अमेरिका में राष्ट्रपति और कांग्रेस के बीच युद्ध संबंधी अधिकारों की बड़ी संवैधानिक लड़ाई बनता जा रहा है।
ट्रंप के ईरान युद्ध को लेकर बढ़ रहा विवाद
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के ईरान युद्ध को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी संसद में रिपब्लिकन नेताओं को उस प्रस्ताव पर वोटिंग टालनी पड़ी, जिसमें ट्रंप को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने और अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने के लिए मजबूर किया जा सकता था। यह प्रस्ताव इतना मजबूत होता दिख रहा था कि उसके पास होने की संभावना बढ़ गई थी।
यह भी पढ़ें- Trump On Poland: ट्रंप का यू-टर्न, कहा- पोलैंड में भेजेंगे 5000 और अमेरिकी सैनिक, NATO देशों में बढ़ी हलचल
ट्रंप पर रोक लगाने वाला प्रस्ताव टला
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में डेमोक्रेट सांसदों ने ‘वॉर पावर्स रेजोल्यूशन’ पेश किया था। इस प्रस्ताव का मकसद ट्रंप की सैन्य कार्रवाई पर नियंत्रण लगाना था। लेकिन जब रिपब्लिकन नेताओं को लगा कि उनके पास इसे रोकने के लिए पर्याप्त वोट नहीं हैं, तो उन्होंने मतदान ही टाल दिया। अब इस मुद्दे पर जून में वोटिंग होने की संभावना है। उधर सीनेट में भी इसी तरह का प्रस्ताव आगे बढ़ चुका है। वहां चार रिपब्लिकन सीनेटर पहले ही डेमोक्रेट्स के साथ खड़े नजर आए थे। इससे ट्रंप प्रशासन की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि उनकी अपनी पार्टी के नेता भी अब खुलकर सवाल उठा रहे हैं।
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होर्मुज में तनाव के कारण वैश्विक शिपिंग प्रभावित
अमेरिका में ईरान युद्ध को लेकर नाराजगी लगातार बढ़ रही है। फारस की खाड़ी के होर्मुज जलडमरुमध्य में तनाव के कारण वैश्विक शिपिंग प्रभावित हुई है और अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें बढ़ गई हैं। विपक्षी सांसदों का कहना है कि यह युद्ध अमेरिका को आर्थिक और रणनीतिक नुकसान पहुंचा रहा है। डेमोक्रेट सांसद ग्रेगरी मीक्स ने कहा कि कांग्रेस की संवैधानिक जिम्मेदारी है कि वह युद्ध जैसे बड़े फैसलों पर नियंत्रण रखे। उनका कहना था कि संसद का काम बिना सोचे-समझे सरकार का समर्थन करना नहीं है। वहीं मेन राज्य के सांसद जारेड गोल्डन, जिन्होंने पहले इस प्रस्ताव का विरोध किया था, अब इसके समर्थन में आ गए हैं।
ईरान नीति पर ट्रंप की अपनी ही पार्टी में दरार
कुछ रिपब्लिकन सांसद भी अब ट्रंप के फैसलों से असहज दिखाई दे रहे हैं। पेनसिल्वेनिया के रिपब्लिकन सांसद ब्रायन फिट्जपैट्रिक ने कहा कि कानून का पालन जरूरी है। 1973 के वॉर पावर्स एक्ट के अनुसार, कोई भी अमेरिकी राष्ट्रपति कांग्रेस की मंजूरी के बिना केवल 60 दिन तक सैन्य संघर्ष चला सकता है। उसके बाद संसद की अनुमति जरूरी होती है। हालांकि व्हाइट हाउस का कहना है कि ईरान के साथ युद्धविराम होने के कारण यह नियम अब लागू नहीं होता। दूसरी ओर ट्रंप लगातार यह भी कह रहे हैं कि जरूरत पड़ी तो ईरान पर फिर बड़े हमले किए जा सकते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर सैन्य अधिकारियों को 'किसी भी समय बड़े हमले के लिए तैयार रहने' को कहा है।
यह भी पढ़ें- क्यूबा पर ट्रंप के तेवर सख्त: बोले- देश बदहाल है, अब अमेरिका करेगा मदद; बॉलरूम प्रोजेक्ट पर किया बड़ा दावा
अमेरिकी रक्षा मंत्री की जमकर की गई आलोचना
रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस ने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की आलोचना करते हुए कहा कि मौजूदा स्थिति प्रशासन की कमजोरी दिखाती है। वहीं डेमोक्रेट नेता और पूर्व सैनिक टैमी डकवर्थ ने कहा कि ट्रंप ने यह युद्ध शुरू करके हालात और खराब कर दिए हैं। इसके बावजूद कई रिपब्लिकन नेता ट्रंप का बचाव कर रहे हैं। हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के चेयरमैन ब्रायन मास्ट ने कहा कि अमेरिका हमला झेलकर चुप नहीं बैठ सकता।
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ट्रंप पर रोक लगाने वाला प्रस्ताव टला
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में डेमोक्रेट सांसदों ने ‘वॉर पावर्स रेजोल्यूशन’ पेश किया था। इस प्रस्ताव का मकसद ट्रंप की सैन्य कार्रवाई पर नियंत्रण लगाना था। लेकिन जब रिपब्लिकन नेताओं को लगा कि उनके पास इसे रोकने के लिए पर्याप्त वोट नहीं हैं, तो उन्होंने मतदान ही टाल दिया। अब इस मुद्दे पर जून में वोटिंग होने की संभावना है। उधर सीनेट में भी इसी तरह का प्रस्ताव आगे बढ़ चुका है। वहां चार रिपब्लिकन सीनेटर पहले ही डेमोक्रेट्स के साथ खड़े नजर आए थे। इससे ट्रंप प्रशासन की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि उनकी अपनी पार्टी के नेता भी अब खुलकर सवाल उठा रहे हैं।
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ईरान नीति पर ट्रंप की अपनी ही पार्टी में दरार
कुछ रिपब्लिकन सांसद भी अब ट्रंप के फैसलों से असहज दिखाई दे रहे हैं। पेनसिल्वेनिया के रिपब्लिकन सांसद ब्रायन फिट्जपैट्रिक ने कहा कि कानून का पालन जरूरी है। 1973 के वॉर पावर्स एक्ट के अनुसार, कोई भी अमेरिकी राष्ट्रपति कांग्रेस की मंजूरी के बिना केवल 60 दिन तक सैन्य संघर्ष चला सकता है। उसके बाद संसद की अनुमति जरूरी होती है। हालांकि व्हाइट हाउस का कहना है कि ईरान के साथ युद्धविराम होने के कारण यह नियम अब लागू नहीं होता। दूसरी ओर ट्रंप लगातार यह भी कह रहे हैं कि जरूरत पड़ी तो ईरान पर फिर बड़े हमले किए जा सकते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर सैन्य अधिकारियों को 'किसी भी समय बड़े हमले के लिए तैयार रहने' को कहा है।
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अमेरिकी रक्षा मंत्री की जमकर की गई आलोचना
रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस ने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की आलोचना करते हुए कहा कि मौजूदा स्थिति प्रशासन की कमजोरी दिखाती है। वहीं डेमोक्रेट नेता और पूर्व सैनिक टैमी डकवर्थ ने कहा कि ट्रंप ने यह युद्ध शुरू करके हालात और खराब कर दिए हैं। इसके बावजूद कई रिपब्लिकन नेता ट्रंप का बचाव कर रहे हैं। हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के चेयरमैन ब्रायन मास्ट ने कहा कि अमेरिका हमला झेलकर चुप नहीं बैठ सकता।