Pakistan: ऐसे हालात में आईएमएफ तो नहीं देगा कर्ज, अब पाकिस्तान क्या करेगा?
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बिना नया कर्ज मिले मौजूदा प्रोग्राम के एक्सपायर होने का मतलब पाकिस्तान के व्यापार घाटे में और बढ़ोतरी होना होगा। इससे बाकी वित्तीय संस्थानों से भी सहायता मिलने की संभावना घट जाएगी...
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पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के खिलाफ चल रहे दमन चक्र में सेना और शहबाज शरीफ सरकार को लगातार कामयाबी मिल रही है, लेकिन इससे देश में बढ़ रही अस्थिरता की भारी मार आर्थिक संभावनाओं पर पड़ रही है। अब यह लगभग साफ हो गया कि मौजूदा हालात में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) पाकिस्तान के लिए मंजूर हुए कर्ज की किस्तें जारी नहीं करेगा। इस बात का संकेत खुद वित्त मंत्री इशहाक डार ने दिया है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक इन हालात में पाकिस्तान के सामने चीन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे देशों के सामने हाथ फैलाने के अलावा अब और कोई रास्ता नहीं बचा है।
रावलपिंडी के व्यापारियों के एक दल से बातचीत में इशहाक डार ने संकेत दिया कि कर्ज की नई किस्तें जारी किए बिना आईएमएफ का सहायता प्रोग्राम अगले 30 जून को एक्सपायर कर जाएगा। उन्होंने कहा कि इस प्रोग्राम को ‘पुनर्जीवित’ करने के लिए अब बहुत कम समय बचा है। डार ने व्यापारियों को हो रही दिक्कतों के लिए उनसे माफी मांगी। डार ने कहा- ‘हम आईएमएफ के प्रोग्राम को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब इसकी 30 जून को तय समयसीमा पार करने में बहुत कम समय बचा है।’
अर्थशास्त्रियों के मुताबिक पाकिस्तान में मौजूद राजनीतिक अस्थिरता के साथ-साथ अतीत में ऋण प्रोग्रामों पर अमल करने का खराब रिकॉर्ड पाकिस्तान को महंगा पड़ रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 1958 के बाद से पाकिस्तान ने आईएमएफ के साथ 22 प्रोग्रामों पर दस्तखत किए। उनमें से 2013-14 में तय हुए प्रोग्राम के अलावा बाकी सभी समझौतों की शर्तों पर पूरा अमल करने में वह नाकाम रहा।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बिना नया कर्ज मिले मौजूदा प्रोग्राम के एक्सपायर होने का मतलब पाकिस्तान के व्यापार घाटे में और बढ़ोतरी होना होगा। इससे बाकी वित्तीय संस्थानों से भी सहायता मिलने की संभावना घट जाएगी। मौजूदा पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) सरकार ने अभी तक यह नहीं बताया है कि आईएमएफ का कर्ज ना मिलने की सूरत में वह अर्थव्यवस्था को कैसे संभालेगी। जबकि कोई वैकल्पिक योजना सामने ना होने के कारण वित्तीय बाजार का भरोसा टूट रहा है। अब पाकिस्तान में एक अमेरिकी डॉलर 308 से 303 पाकिस्तानी रुपये में मिल रहा है।
इसके बावजूद डार ने दावा किया कि पाकिस्तान सरकार कर्ज चुकाने सभी अपनी सभी वचनबद्धताएं पूरी करेगी। लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक डिफॉल्ट ना करने के उनके बयान से बाजार में भरोसा बंधने की संभावना कम है। देश में महंगाई, जरूरी चीजों की कमी और मंडरा रहे डिफॉल्ट के खतरे के कारण लोग वित्त मंत्री के इस बयान को ज्यादा तव्वजो नहीं दे रहे हैं।
डार ने बताया कि पाकिस्तान ने 5.5 बिलियन डॉलर के कॉमर्शियल कर्जों को चुका दिया है। इसके लिए दो बिलियन डॉलर चीन ने दिया। लेकिन अभी भी 3.5 बिलियन गैर-कॉमर्शियल कर्जों को तुरंत चुकाने की चुनौती पाकिस्तान सरकार के सामने है। वैसे कुल 25 बिलियन डॉलर का ऋण पाकिस्तान को चुकाना है। ऐसे में शरीफ सरकार की सारी उम्मीदें चीन के साथ-साथ यूएई और सऊदी अरब से मिलने वाली सहायता पर टिक गई हैं।