धरती जब कांपती है तो कुछ ही सेकंड में पूरी दुनिया बदल जाती है। ऊंची इमारतें मलबे में बदल जाती हैं। हजारों परिवार बिछड़ जाते हैं। इतना ही नहीं कई बार तो पूरी की पूरी बस्तियां उजड़ जाती हैं। हाल ही में वेनेजुएला में आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो शक्तिशाली भूकंपों ने एक बार फिर दुनिया को यह याद दिलाया है कि प्रकृति के सामने आधुनिक विज्ञान अब भी पूरी तरह सक्षम नहीं है।
इंसान चांद और मंगल तक पहुंच चुका है, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) विकसित कर चुका है और मौसम का कई दिन पहले अनुमान लगा लेता है, लेकिन आज भी यह नहीं बता सकता कि अगला बड़ा भूकंप कब, कहां और कितनी तीव्रता का आएगा। यही वजह है कि हर साल दुनिया भर में भूकंप हजारों लोगों की जान ले लेते हैं। वेनेजुएला में कुछ ही सेकंड के अंतराल पर आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो भूकंपों को वैज्ञानिक डबल भूकंप बता रहे हैं। इस आपदा में भारी तबाही हुई। दूसरी ओर, जापान में शक्तिशाली झटके महसूस होने के बावजूद नुकसान अपेक्षाकृत कम रहा।
ऐसे में आइए जानते हैं कि भूकंप आखिर आता क्यों है... इसकी सटीक भविष्यवाणी क्यों नहीं हो पाती? भूकंप आने से पहले कोई चेतावनी संकेत मिलते हैं या नहीं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भूकंप की सटीक भविष्यवाणी क्यों नहीं कर पा रहा है? वैज्ञानिक भूकंप संभावित क्षेत्रों की पहचान कैसे करते हैं? साथ ही ये भी जानेंगे कि जापान में बड़े भूकंप के बावजूद कम नुकसान क्यों होता है।
भूकंप आखिर आता क्यों है?
भूकंप को समझने के लिए सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि धरती की सतह एक ठोस चट्टान नहीं है। पृथ्वी कई विशाल टेक्टोनिक प्लेटों में बंटी हुई है। ये प्लेटें लगातार बहुत धीमी गति से खिसकती रहती हैं। जब दो प्लेटें आपस में टकराती हैं, एक-दूसरे के नीचे खिसकती हैं या अलग होती हैं, तो उनके बीच दबाव बढ़ने लगता है। वर्षों तक जमा यह दबाव अचानक निकलता है और धरती कांप उठती है। इसी घटना को भूकंप कहा जाता है।
धरती पर सात प्रमुख और कई छोटी टेक्टोनिक प्लेटें मौजूद हैं। इनके बीच होने वाली हलचल से उत्पन्न ऊर्जा भूकंपीय तरंगों के रूप में बाहर निकलती है। यही तरंगें धरती को हिलाती हैं। कभी यह झटके हल्के होते हैं तो कभी विनाशकारी साबित होते हैं।
भूकंप की भविष्यवाणी के लिए किन तीन सवालों का जवाब जरूरी है?
किसी भी भूकंप की सटीक भविष्यवाणी के लिए वैज्ञानिकों को तीन महत्वपूर्ण सवालों के जवाब देने होते हैं।
पहला-भूकंप कब आएगा?
दूसरा-कहां आएगा?
तीसरा-उसकी तीव्रता कितनी होगी?
हालांकि समस्या यह है कि अब तक दुनिया का कोई भी वैज्ञानिक संस्थान इन तीनों सवालों का एक साथ सटीक जवाब नहीं दे पाया है। यही बड़ा कारण है कि अब तक भूकंप की भविष्यवाणी करना कठिन है।
वैज्ञानिक भूकंप संभावित क्षेत्रों की पहचान तो कर लेते हैं, लेकिन यह नहीं बता सकते कि अगले दिन, अगले महीने या अगले साल वहां भूकंप आएगा या नहीं। यही कारण है कि आज भी भूकंप की सटीक भविष्यवाणी विज्ञान के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनी हुई है।