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Trump: हिजबुल्ला पर कार्रवाई के लिए दबाव बना रहे ट्रंप, इस्राइल चिंतित; हस्तक्षेप पर सीरिया का रुख क्या?
Mon, 29 Jun 2026 07:58 AM IST
अमन तिवारी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बेरूत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बेरूत
Published by: अमन तिवारी
Updated Mon, 29 Jun 2026 07:58 AM IST
सार
लेबनान में जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुझाव दिया कि हिजबुल्ला के खिलाफ कार्रवाई इस्राइल के बजाय सीरिया करे। हालांकि सीरिया ने सैन्य हस्तक्षेप से इनकार किया है।
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डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
लेबनान में इस्राइल और हिजबुल्ला के बीच जारी युद्ध से अमेरिका के हाथ खींचने के बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा विकल्प पेश किया है जिसने पूरे क्षेत्र को हैरत में डाल दिया है। ट्रंप का सुझाव है कि इस्राइली सेना के बजाय सीरिया को लेबनान में घुसकर ईरान समर्थित हिजबुुल्ला का खात्मा करना चाहिए। हालांकि, सीरिया के नए राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने इस प्रस्ताव में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है और कहा है कि ट्रंप के बयान का गलत मतलब निकाला गया।
ट्रंप का मानना है कि डेढ़ साल पहले सीरिया के तानाशाह बशर अल-असद का तख्तापलट करने वाले और अब वहां नई सरकार चला रहे अनुभवी इस्लामी लड़ाके, इस्राइली सेना की तुलना में हिजबुल्ला को जड़ से उखाड़ने में अधिक सटीक और बेहतर काम कर सकते हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप के इस प्रस्ताव को लेकर व्हाइट हाउस कितना गंभीर है, लेकिन सीरियाई आक्रमण की संभावना ने लेबनान और इस्राइल दोनों की धड़कने बढ़ा दी है। इस्राइल अल-शरा की इस्लामी नेतृत्व वाली सरकार को संदेह की नजर से देखता है और उसके सत्ता में आने के बाद से दक्षिणी सीरिया के एक हिस्से पर कब्जा कर चुका है। सीरिया इस्राइल और तुर्किये के बीच बढ़ते तनाव का केंद्र भी बन गया है, जहां दोनों देश पड़ोसी देश में एक-दूसरे के प्रभाव को सीमित करने की कोशिश कर रहे हैं। तुर्किये अल-शरा की सरकार का प्रमुख समर्थक है। एक अधिकारी ने बताया कि इस्राइल के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों ने बुधवार को इस पर एक बैठक बुलाई है। लेबनान के नागरिकों को सीरिया के उस दशकों पुराने सैन्य कब्जे की कड़वी यादें हैं जो 2005 में खत्म हुआ था। लेबनान को सांप्रदायिक हिंसा भड़कने का भी डर है।
ट्रंप की दलील, हर बार इमारत गिराने की जरूरत नहीं
इस महीने की शुरुआत में जी7 शिखर सम्मेलन के इतर ट्रंप ने शिकायत की थी कि इस्राइल का युद्ध बहुत लंबा खिंच रहा है और इसमें बहुत सारे बेकसूर लोग मारे जा रहे हैं। मार्च से अब तक लेबनान में इस्राइली हमलों में 4,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। ट्रंप ने कहा, जब आप किसी हिजबुल्ला लड़ाके को ढूंढ रहे हों, तो आपको हर बार पूरी अपार्टमेंट बिल्डिंग को जमींदोज करने की जरूरत नहीं है।
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पुराने हिसाब चुकता नहीं करना चाहते सीरियाई नेता
सीरिया के 14 साल लंबे गृहयुद्ध के दौरान हिजबुल्ला और ईरान ने बशर अल-असद का खुलकर साथ दिया था, जबकि अल-शरा उस समय असद को हटाने वाले विद्रोही गुट के नेता थे। इसके बावजूद, दिसंबर 2024 में सत्ता संभालने के बाद से दमिश्क के नए नेताओं का कहना है कि वे देश के पुनर्निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, किसी से पुराना हिसाब चुकता नहीं करना चाहते और किसी भी क्षेत्रीय संघर्ष से दूर रहना चाहते हैं।
ये भी पढ़ें: Extreme Heat: भीषण गर्मी से यूरोप में 1300 से अधिक मौतें, फ्रांस पर सबसे अधिक मार; अन्य देशों का हाल क्या?
नेतन्याहू ने क्या कहा?
इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने लेबनान के साथ हुए समझौते को ईरान और हिजबुल्ला के मुंह पर करारा तमाचा करार दिया है। अमेरिका की मध्यस्थता से हुए इस समझौते से ईरान और हिजबुल्ला को बाहर रखा गया है। नेतन्याहू ने शनिवार को एक प्रेस वार्ता में कहा कि लेबनान से हम तब तक नहीं हटेंगे, जब तक हिजबुल्ला का वजूद खत्म न हो जाए। उन्होंने साफ कर दिया कि इस समझौते के तहत इस्राइल सुरक्षा के मोर्चे पर कोई ढिलाई नहीं बरतेगा और लेबनान के भीतर इस्राइली सेना का दबदबा कायम रहेगा। त्रिपक्षीय समझौते में अमेरिका और लेबनान ने यह स्वीकार किया है कि इस्राइल अपनी सुरक्षा के लिए लेबनान के भीतर सुरक्षा क्षेत्र बनाए रख सकता है।
सीरिया का हस्तक्षेप से इन्कार
ट्रंप के बयानों के बाद सीरियाई अधिकारियों ने स्थिति को संभालने की कोशिशें तेज कर दी हैं। 13 जून को दमिश्क में एक भाषण के दौरान राष्ट्रपति अल-शरा ने कहा, कुछ लोग अफवाहें फैला रहे हैं कि सीरिया लेबनान में सैन्य हस्तक्षेप करेगा। यह सच नहीं है। 21 जून को यूएई के एक नेटवर्क अल मशहद को दिए इंटरव्यू में अल-शरा ने स्पष्ट किया, राष्ट्रपति ट्रंप ने एक सुरक्षित और शांतिपूर्ण समाधान खोजने में सीरिया की भूमिका के बारे में बात की थी, लेकिन उनके बयान की गलत व्याख्या इस तरह की गई जैसे सीरिया कल सुबह ही लेबनान पर हमला करने जा रहा हो।
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ट्रंप का मानना है कि डेढ़ साल पहले सीरिया के तानाशाह बशर अल-असद का तख्तापलट करने वाले और अब वहां नई सरकार चला रहे अनुभवी इस्लामी लड़ाके, इस्राइली सेना की तुलना में हिजबुल्ला को जड़ से उखाड़ने में अधिक सटीक और बेहतर काम कर सकते हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप के इस प्रस्ताव को लेकर व्हाइट हाउस कितना गंभीर है, लेकिन सीरियाई आक्रमण की संभावना ने लेबनान और इस्राइल दोनों की धड़कने बढ़ा दी है। इस्राइल अल-शरा की इस्लामी नेतृत्व वाली सरकार को संदेह की नजर से देखता है और उसके सत्ता में आने के बाद से दक्षिणी सीरिया के एक हिस्से पर कब्जा कर चुका है। सीरिया इस्राइल और तुर्किये के बीच बढ़ते तनाव का केंद्र भी बन गया है, जहां दोनों देश पड़ोसी देश में एक-दूसरे के प्रभाव को सीमित करने की कोशिश कर रहे हैं। तुर्किये अल-शरा की सरकार का प्रमुख समर्थक है। एक अधिकारी ने बताया कि इस्राइल के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों ने बुधवार को इस पर एक बैठक बुलाई है। लेबनान के नागरिकों को सीरिया के उस दशकों पुराने सैन्य कब्जे की कड़वी यादें हैं जो 2005 में खत्म हुआ था। लेबनान को सांप्रदायिक हिंसा भड़कने का भी डर है।
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ट्रंप की दलील, हर बार इमारत गिराने की जरूरत नहीं
इस महीने की शुरुआत में जी7 शिखर सम्मेलन के इतर ट्रंप ने शिकायत की थी कि इस्राइल का युद्ध बहुत लंबा खिंच रहा है और इसमें बहुत सारे बेकसूर लोग मारे जा रहे हैं। मार्च से अब तक लेबनान में इस्राइली हमलों में 4,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। ट्रंप ने कहा, जब आप किसी हिजबुल्ला लड़ाके को ढूंढ रहे हों, तो आपको हर बार पूरी अपार्टमेंट बिल्डिंग को जमींदोज करने की जरूरत नहीं है।
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पुराने हिसाब चुकता नहीं करना चाहते सीरियाई नेता
सीरिया के 14 साल लंबे गृहयुद्ध के दौरान हिजबुल्ला और ईरान ने बशर अल-असद का खुलकर साथ दिया था, जबकि अल-शरा उस समय असद को हटाने वाले विद्रोही गुट के नेता थे। इसके बावजूद, दिसंबर 2024 में सत्ता संभालने के बाद से दमिश्क के नए नेताओं का कहना है कि वे देश के पुनर्निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, किसी से पुराना हिसाब चुकता नहीं करना चाहते और किसी भी क्षेत्रीय संघर्ष से दूर रहना चाहते हैं।
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नेतन्याहू ने क्या कहा?
इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने लेबनान के साथ हुए समझौते को ईरान और हिजबुल्ला के मुंह पर करारा तमाचा करार दिया है। अमेरिका की मध्यस्थता से हुए इस समझौते से ईरान और हिजबुल्ला को बाहर रखा गया है। नेतन्याहू ने शनिवार को एक प्रेस वार्ता में कहा कि लेबनान से हम तब तक नहीं हटेंगे, जब तक हिजबुल्ला का वजूद खत्म न हो जाए। उन्होंने साफ कर दिया कि इस समझौते के तहत इस्राइल सुरक्षा के मोर्चे पर कोई ढिलाई नहीं बरतेगा और लेबनान के भीतर इस्राइली सेना का दबदबा कायम रहेगा। त्रिपक्षीय समझौते में अमेरिका और लेबनान ने यह स्वीकार किया है कि इस्राइल अपनी सुरक्षा के लिए लेबनान के भीतर सुरक्षा क्षेत्र बनाए रख सकता है।
सीरिया का हस्तक्षेप से इन्कार
ट्रंप के बयानों के बाद सीरियाई अधिकारियों ने स्थिति को संभालने की कोशिशें तेज कर दी हैं। 13 जून को दमिश्क में एक भाषण के दौरान राष्ट्रपति अल-शरा ने कहा, कुछ लोग अफवाहें फैला रहे हैं कि सीरिया लेबनान में सैन्य हस्तक्षेप करेगा। यह सच नहीं है। 21 जून को यूएई के एक नेटवर्क अल मशहद को दिए इंटरव्यू में अल-शरा ने स्पष्ट किया, राष्ट्रपति ट्रंप ने एक सुरक्षित और शांतिपूर्ण समाधान खोजने में सीरिया की भूमिका के बारे में बात की थी, लेकिन उनके बयान की गलत व्याख्या इस तरह की गई जैसे सीरिया कल सुबह ही लेबनान पर हमला करने जा रहा हो।