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World: अमेरिका में भीषण जंगल की आग, तीन दमकलकर्मियों की मौत; महरंग बलोच शांति के नोबेल के लिए दूसरी बार नामित
Mon, 29 Jun 2026 08:26 AM IST
Pavan
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Published by: Pavan
Updated Mon, 29 Jun 2026 08:26 AM IST
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अमेरिका के कोलोराडो-यूटा सीमा क्षेत्र में तेजी से फैल रही जंगल की आग में तीन दमकलकर्मियों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से झुलस गए। अमेरिकी आंतरिक विभाग के अनुसार, तेज हवा और भीषण गर्मी के बीच आग ने अचानक विकराल रूप ले लिया, जिससे दमकलकर्मी उसकी चपेट में आ गए। बचने के लिए उन्होंने आपातकालीन सुरक्षा शेल्टर का इस्तेमाल किया, लेकिन तीन की जान नहीं बच सकी। आग ने अब तक करीब 114 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया है। प्रशासन ने आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए हैं। यूटा, कोलोराडो, एरिजोना और नेवादा समेत कई पश्चिमी राज्यों में भी जंगल की आग तेजी से फैल रही है। रिकॉर्ड कम बर्फबारी, भीषण गर्मी, सूखे और तेज हवाओं के कारण हालात और गंभीर हो गए हैं। यूटा और कोलोराडो में आपातकाल घोषित कर दिया गया है।
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युद्धविराम उल्लंघन पर ईयू की चिंता, पाकिस्तान से कहा- बातचीत के रास्ते खुले रखें
यूरोपीय संघ (ईयू) की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलास ने रविवार को पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार से फोन पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच हाल में हुए युद्धविराम उल्लंघन पर गंभीर चिंता जताई। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की तेजी से बदलती स्थिति पर चर्चा की। कैलास ने इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (एमओयू) तक पहुंचाने में पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका की सराहना की, लेकिन कहा कि सभी पक्षों को युद्धविराम का पालन करना चाहिए और संवाद के रास्ते खुले रखने जरूरी हैं। इशाक डार ने कहा कि पाकिस्तान पश्चिम एशिया में स्थायी शांति और स्थिरता के लिए लगातार कूटनीतिक प्रयास कर रहा है। उन्होंने भी सभी पक्षों से युद्धविराम समझौते का सम्मान करने की अपील की। दोनों नेताओं ने भविष्य में भी संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई। अमेरिका और ईरान ने 18 जून को शांति बहाली के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
यूरोपीय संघ (ईयू) की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलास ने रविवार को पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार से फोन पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच हाल में हुए युद्धविराम उल्लंघन पर गंभीर चिंता जताई। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की तेजी से बदलती स्थिति पर चर्चा की। कैलास ने इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (एमओयू) तक पहुंचाने में पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका की सराहना की, लेकिन कहा कि सभी पक्षों को युद्धविराम का पालन करना चाहिए और संवाद के रास्ते खुले रखने जरूरी हैं। इशाक डार ने कहा कि पाकिस्तान पश्चिम एशिया में स्थायी शांति और स्थिरता के लिए लगातार कूटनीतिक प्रयास कर रहा है। उन्होंने भी सभी पक्षों से युद्धविराम समझौते का सम्मान करने की अपील की। दोनों नेताओं ने भविष्य में भी संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई। अमेरिका और ईरान ने 18 जून को शांति बहाली के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
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हैती और सीरिया के नागरिकों का टीपीएस खत्म करने के ट्रंप के फैसले से रिपब्लिकन पार्टी में मतभेद
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हैती और सीरिया के हजारों प्रवासियों का टेम्परेरी प्रोटेक्टेड स्टेटस (टीपीएस) समाप्त करने के फैसले को लेकर रिपब्लिकन पार्टी में मतभेद उभरकर सामने आए हैं। जहां होमलैंड सिक्योरिटी सचिव मार्कवेन मुलिन ने इस फैसले का समर्थन किया, वहीं ओहायो के गवर्नर माइक डिवाइन ने इसे "गलत फैसला" करार दिया। रविवार को अलग-अलग टीवी कार्यक्रमों में बातचीत के दौरान मार्कवेन मुलिन ने कहा कि टीपीएस कभी भी स्थायी व्यवस्था नहीं थी और इसका उद्देश्य केवल सीमित समय के लिए सुरक्षा प्रदान करना था।
उन्होंने कहा, "टेम्परेरी प्रोटेक्टेड स्टेटस का मकसद कभी स्थायी नहीं था। लाभार्थियों के पास कई विकल्प हैं। वे स्थायी निवास या अस्थायी वीजा के लिए आवेदन कर सकते हैं या फिर अपने देश लौट सकते हैं। यदि वे वापस जाना चाहते हैं तो सरकार उनकी मदद करेगी।" मुलिन ने कहा कि स्वदेश लौटने वाले प्रवासियों को सरकार हवाई टिकट के साथ लगभग 2,100 डॉलर की आर्थिक सहायता भी देगी, ताकि वे अपने देश में दोबारा जीवन शुरू कर सकें।
यह बयान अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद आया है, जिसमें कानूनी चुनौतियां जारी रहने के बावजूद ट्रंप प्रशासन को हैती और सीरिया के 3.5 लाख से अधिक प्रवासियों का टीपीएस समाप्त करने की अनुमति दी गई। हैती की सुरक्षा स्थिति पर पूछे गए सवाल के जवाब में मुलिन ने कहा कि सरकार निर्वासन से जुड़े फैसले कई पहलुओं को ध्यान में रखकर लेती है। उन्होंने कहा, 'दुनिया में अमेरिका से अधिक उदार देश कोई नहीं है, लेकिन हम नहीं चाहते कि लोग इस व्यवस्था का गलत फायदा उठाएं'।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हैती और सीरिया के हजारों प्रवासियों का टेम्परेरी प्रोटेक्टेड स्टेटस (टीपीएस) समाप्त करने के फैसले को लेकर रिपब्लिकन पार्टी में मतभेद उभरकर सामने आए हैं। जहां होमलैंड सिक्योरिटी सचिव मार्कवेन मुलिन ने इस फैसले का समर्थन किया, वहीं ओहायो के गवर्नर माइक डिवाइन ने इसे "गलत फैसला" करार दिया। रविवार को अलग-अलग टीवी कार्यक्रमों में बातचीत के दौरान मार्कवेन मुलिन ने कहा कि टीपीएस कभी भी स्थायी व्यवस्था नहीं थी और इसका उद्देश्य केवल सीमित समय के लिए सुरक्षा प्रदान करना था।
उन्होंने कहा, "टेम्परेरी प्रोटेक्टेड स्टेटस का मकसद कभी स्थायी नहीं था। लाभार्थियों के पास कई विकल्प हैं। वे स्थायी निवास या अस्थायी वीजा के लिए आवेदन कर सकते हैं या फिर अपने देश लौट सकते हैं। यदि वे वापस जाना चाहते हैं तो सरकार उनकी मदद करेगी।" मुलिन ने कहा कि स्वदेश लौटने वाले प्रवासियों को सरकार हवाई टिकट के साथ लगभग 2,100 डॉलर की आर्थिक सहायता भी देगी, ताकि वे अपने देश में दोबारा जीवन शुरू कर सकें।
यह बयान अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद आया है, जिसमें कानूनी चुनौतियां जारी रहने के बावजूद ट्रंप प्रशासन को हैती और सीरिया के 3.5 लाख से अधिक प्रवासियों का टीपीएस समाप्त करने की अनुमति दी गई। हैती की सुरक्षा स्थिति पर पूछे गए सवाल के जवाब में मुलिन ने कहा कि सरकार निर्वासन से जुड़े फैसले कई पहलुओं को ध्यान में रखकर लेती है। उन्होंने कहा, 'दुनिया में अमेरिका से अधिक उदार देश कोई नहीं है, लेकिन हम नहीं चाहते कि लोग इस व्यवस्था का गलत फायदा उठाएं'।
इराक में भ्रष्टाचार के आरोप में 5 सांसदों समेत सात गिरफ्तार
इराक में पांच सांसदों समेत सात लोगों को भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ्तार किया गया है। ये गिरफ्तारियां तेल मंत्रालय के पूर्व उप मंत्री अदनान अल जुमैली के बयान के आधार पर की गईं, जिन्हें पिछले महीने गिरफ्तार किया गया था। ग इराकी न्यूज के मुताबिक, सुरक्षा बलों ने रविवार तड़के राजधानी के कड़ी सुरक्षा वाले ग्रीन जोन के सभी प्रवेश द्वारों को सील किया और उस परिसर के भीतर छापे मारे, जहां प्रमुख सरकारी संस्थान और विदेशी दूतावास स्थित हैं।
इराक में पांच सांसदों समेत सात लोगों को भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ्तार किया गया है। ये गिरफ्तारियां तेल मंत्रालय के पूर्व उप मंत्री अदनान अल जुमैली के बयान के आधार पर की गईं, जिन्हें पिछले महीने गिरफ्तार किया गया था। ग इराकी न्यूज के मुताबिक, सुरक्षा बलों ने रविवार तड़के राजधानी के कड़ी सुरक्षा वाले ग्रीन जोन के सभी प्रवेश द्वारों को सील किया और उस परिसर के भीतर छापे मारे, जहां प्रमुख सरकारी संस्थान और विदेशी दूतावास स्थित हैं।
सोशल मीडिया पर अंकुश के लिए अमेरिका में उठी आवाज
सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों से बच्चों को बचाने के लिए अमेरिका में इससे जुड़े कानूनों में सुधार की मांग की जा रही है। यहां कई पीड़ितों के परिजनों ने एकजुट होकर बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए मुहिम शुरू की है। उनके प्रयासों से देश के कई हिस्सों में ऐसे बच्चों की याद में स्मृति दिवस भी मनाया गया, जो सोशल मीडिया के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं। यह आंदोलन धीरे-धीरे टेक कंपनियों की जवाबदेही तय करने की बड़ी ताकत बनता जा रहा है।
सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों से बच्चों को बचाने के लिए अमेरिका में इससे जुड़े कानूनों में सुधार की मांग की जा रही है। यहां कई पीड़ितों के परिजनों ने एकजुट होकर बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए मुहिम शुरू की है। उनके प्रयासों से देश के कई हिस्सों में ऐसे बच्चों की याद में स्मृति दिवस भी मनाया गया, जो सोशल मीडिया के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं। यह आंदोलन धीरे-धीरे टेक कंपनियों की जवाबदेही तय करने की बड़ी ताकत बनता जा रहा है।
भारतीय श्रमिकों को वेतन न देने वाले कारोबारी का पासपोर्ट जब्त
भारत और बांग्लादेश के 400 से अधिक प्रवासी श्रमिकों को वेतन दिए बिना कई महीनों से फरार कारोबारी रामू पलानी वेलु सिंगापुर लौट आया है। यहां पहुंचे ही अधिकारियों ने उसका पासपोर्ट जब्त कर लिया। भारतीय मूल का वेलु एसके इंडस्ट्रीज समेत तीन कंपनियों का निदेशक है। श्रम राज्य मंत्री दिनेश वासु दास ने प्रवासी श्रमिकों से मुलाकात कर उन्हें वेतन दिलाने का आश्वासन दिया। साथ ही, कानून का उल्लंघन करने वालों को सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी। इससे पहले प्रवासी श्रमिकों ने 22 जून को दास से मुलाकात कर अपनी व्यथा सुनाई थी।
भारत और बांग्लादेश के 400 से अधिक प्रवासी श्रमिकों को वेतन दिए बिना कई महीनों से फरार कारोबारी रामू पलानी वेलु सिंगापुर लौट आया है। यहां पहुंचे ही अधिकारियों ने उसका पासपोर्ट जब्त कर लिया। भारतीय मूल का वेलु एसके इंडस्ट्रीज समेत तीन कंपनियों का निदेशक है। श्रम राज्य मंत्री दिनेश वासु दास ने प्रवासी श्रमिकों से मुलाकात कर उन्हें वेतन दिलाने का आश्वासन दिया। साथ ही, कानून का उल्लंघन करने वालों को सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी। इससे पहले प्रवासी श्रमिकों ने 22 जून को दास से मुलाकात कर अपनी व्यथा सुनाई थी।
सिंगापुर: श्रमिकों को एआई तकनीक सिखाएंगे आईआईटी के पूर्व छात्र
सिंगापुर में रहने वाले प्रवासी श्रमिकों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक नई पहल शुरू हुई है। इसके तहत आईआईटी के पूर्व छात्र सिंगापुर में प्रवासी श्रमिकों को एआई तकनीक सिखाएंगे। आईआईटी एल्युमनी एसोसिएशन ने अगले दो वर्षों में लगभग 1,000 प्रवासी श्रमिकों को एआई और डिजिटल साक्षरता का प्रशिक्षण देने का कार्यक्रम शुरू किया है। इस उद्देश्य के लिए रविवार को आईआईटी एल्युमनी एसोसिएशन ने माइग्रेंट वर्कर्स सेंटर के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। भारतीय उच्चायोग की सक्रिय मदद से यह साझेदारी की गई है। प्रशिक्षण सत्र महीने में दो बार जुरोंग औद्योगिक क्षेत्र के एमडब्ल्यूसी रिक्रिएशन क्लब में आयोजित किए जाएंगे। इसकी शुरुआत अगस्त 2026 से होगी। इस पाठ्यक्रम में डिजिटल साक्षरता और एआई जैसी उभरती तकनीकों को शामिल किया गया है।
सिंगापुर में रहने वाले प्रवासी श्रमिकों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक नई पहल शुरू हुई है। इसके तहत आईआईटी के पूर्व छात्र सिंगापुर में प्रवासी श्रमिकों को एआई तकनीक सिखाएंगे। आईआईटी एल्युमनी एसोसिएशन ने अगले दो वर्षों में लगभग 1,000 प्रवासी श्रमिकों को एआई और डिजिटल साक्षरता का प्रशिक्षण देने का कार्यक्रम शुरू किया है। इस उद्देश्य के लिए रविवार को आईआईटी एल्युमनी एसोसिएशन ने माइग्रेंट वर्कर्स सेंटर के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। भारतीय उच्चायोग की सक्रिय मदद से यह साझेदारी की गई है। प्रशिक्षण सत्र महीने में दो बार जुरोंग औद्योगिक क्षेत्र के एमडब्ल्यूसी रिक्रिएशन क्लब में आयोजित किए जाएंगे। इसकी शुरुआत अगस्त 2026 से होगी। इस पाठ्यक्रम में डिजिटल साक्षरता और एआई जैसी उभरती तकनीकों को शामिल किया गया है।
क्वेटा: महरंग बलोच शांति के नोबेल के लिए दूसरी बार नामित
बलोच यकजेहती कमेटी की प्रमुख नेता डॉ. महरंग बलोच को दूसरी बार नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया गया है। कमेटी ने बताया कि यह अंतरराष्ट्रीय मंच पर बलोच अधिकारों के आंदोलन को मान्यता है। बीवाईसी ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि नामांकन जनवरी 2026 में हुआ था, लेकिन संगठन की नीति के कारण उस समय इसे सार्वजनिक नहीं किया गया। अब नामांकन के बारे में बताने का फैसला इसलिए किया क्योंकि डॉ. बलोच की पहचान बढ़ रही है।
बलोच यकजेहती कमेटी की प्रमुख नेता डॉ. महरंग बलोच को दूसरी बार नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया गया है। कमेटी ने बताया कि यह अंतरराष्ट्रीय मंच पर बलोच अधिकारों के आंदोलन को मान्यता है। बीवाईसी ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि नामांकन जनवरी 2026 में हुआ था, लेकिन संगठन की नीति के कारण उस समय इसे सार्वजनिक नहीं किया गया। अब नामांकन के बारे में बताने का फैसला इसलिए किया क्योंकि डॉ. बलोच की पहचान बढ़ रही है।