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Extreme Heat: भीषण गर्मी से यूरोप में 1300 से अधिक मौतें, फ्रांस पर सबसे अधिक मार; अन्य देशों का हाल क्या?

Mon, 29 Jun 2026 07:40 AM IST
अमन तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेरिस Published by: अमन तिवारी Updated Mon, 29 Jun 2026 07:40 AM IST
सार

यूरोप में भीषण गर्मी ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। गर्मी के चलते अकेले फ्रांस में 1,000 से ज्यादा लोगों की जान चली गई है। जर्मनी और चेक गणराज्य में तापमान के रिकॉर्ड टूट गए हैं। 

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यूरोप में भीषण गर्मी का कहर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फ्रांस में पिछले हफ्ते भीषण गर्मी के कारण करीब 1,000 लोगों की मौतें हुई हैं। देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी ने रविवार को यह जानकारी दी। पेरिस क्षेत्र में घरों के अंदर होने वाली मौतों में भारी उछाल आया है। बुधवार को जब तापमान सबसे ज्यादा था, तब 1,200 से अधिक मौतें हुईं। अगले दो दिनों में यह संख्या बढ़कर हर दिन 1,400 से ऊपर पहुंच गई। गर्मी से पहले यहां हर दिन औसतन 900 से 1,000 मौतें होती थीं। मृतकों में 85 प्रतिशत लोग 65 साल या उससे अधिक उम्र के थे।
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डब्ल्यूएचओ की चेतावनी
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख टेड्रोस अदनोम घेब्रेयसस ने चेतावनी दी है कि यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप है। यह वैश्विक औसत से दोगुनी रफ्तार से गर्म हो रहा है। उन्होंने बताया कि फिलहाल 15 करोड़ लोग भीषण गर्मी में रह रहे हैं। स्कूलों को बंद करना पड़ा है और बिजली ग्रिड फेल हो रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के बिना इतनी भीषण गर्मी और उमस मुमकिन नहीं थी।
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तापमान के टूटे रिकॉर्ड
जर्मनी, पोलैंड और चेक गणराज्य में गर्मी के पुराने रिकॉर्ड टूट गए हैं। जर्मनी के नीसेमुंडे में तापमान 41.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। चेक गणराज्य में अब तक का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया, जहां पारा 41.9 डिग्री तक चला गया। पोलैंड में भी तापमान 40.5 डिग्री के रिकॉर्ड स्तर पर रहा।
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जंगलों में आग और धमाके
जर्मनी के जंगलों में भीषण आग भी लगी है। मुश्किल यह है कि इन जंगलों में दूसरे विश्व युद्ध के समय के जिंदा बम और गोला-बारूद दबे हुए हैं। आग की वजह से वहां धमाके हो रहे हैं, जिससे दमकल कर्मियों को काम रोकने पर मजबूर होना पड़ा। इस बीच, दक्षिण-पश्चिम जर्मनी के ट्रेसेन गांव से करीब 650 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है।

बुनियादी ढांचे को हो रहा नुकसान
गर्मी का असर सड़कों और ट्रेनों पर भी पड़ा है। सड़कों की कंक्रीट की सतह टूट रही है। लीपजिग शहर में पटरियों के पिघलने के कारण ट्राम सेवा बंद करनी पड़ी। बर्लिन में पुलिस ने लोगों को ठंडक देने के लिए पानी की बौछारों (वॉटर कैनन) का इस्तेमाल किया। वहीं हैम्बर्ग से प्राग जा रही एक ट्रेन से 600 यात्रियों को बाहर निकालना पड़ा क्योंकि एसी बंद होने से लोग बीमार पड़ रहे थे।
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