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सुलह की कोशिश: जिनेवा के बाद अब दोहा में US-ईरान बैठक, रिपोर्ट्स में दावा- होर्मुज का गतिरोध दूर करने पर सहमति

Mon, 29 Jun 2026 05:34 AM IST
अमन तिवारी एएनआई, वॉशिंगटन डीसी
एएनआई, वॉशिंगटन डीसी Published by: अमन तिवारी Updated Mon, 29 Jun 2026 05:34 AM IST
सार

अमेरिका और ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य विवाद सुलझाने के लिए मंगलवार को दोहा में मिलेंगे। दोनों पक्ष सैन्य हमले रोकने और जहाजों को रास्ता देने पर सहमत हुए हैं। हालांकि, ट्रंप की चेतावनी और जलमार्ग पर नियंत्रण के दावों के कारण यह समझौता अभी नाजुक बना हुआ है।

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होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका-ईरान में होगी बातचीत - फोटो : ANI

विस्तार

अमेरिका और ईरान अपने पुराने विवादों को खत्म करने पर सहमत हुए हैं। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, दोनों देश मंगलवार को कतर की राजधानी दोहा में बैठक करेंगे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर चल रहे विवाद को सुलझाना है। अधिकारियों ने बताया कि दोनों पक्षों ने सभी तरह की सैन्य गतिविधियों और हमलों को रोकने का फैसला किया है। फिलहाल दोनों पक्ष पीछे हटने को तैयार हैं ताकि अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में जहाजों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के हो सके।
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यह समझौता काफी नाजुक स्थिति में है क्योंकि युद्धविराम को अभी केवल 11 दिन ही हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने शर्तों का पालन नहीं किया, तो वह दोबारा युद्ध शुरू कर सकते हैं और काम तमाम (finish the job) कर देंगे। इस तनावपूर्ण माहौल के बीच तकनीकी बातचीत जारी रखने पर सहमति बनी है।
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इस बीच, वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को दावा किया कि प्रारंभिक शांति समझौते के तहत ईरान के पास होर्मुज जलडमरूमध्य में यातायात प्रबंधन का विशेष अधिकार है। हालांकि, अमेरिका इस तर्क का विरोध कर रहा है। अमेरिका का कहना है कि समझौते के तहत ईरान को नियंत्रण नहीं दिया गया है और अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में जहाजों की आवाजाही पूरी तरह स्वतंत्र होनी चाहिए।
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यह विवाद तब बढ़ा था जब ईरान ने ओमान के तट के पास से गुजरने वाले एक जहाज पर हमला किया था। ईरान चाहता है कि जहाज उसके अपने तट के पास वाले रास्ते से गुजरें। जून में राष्ट्रपति ट्रंप ने जिस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, उसके अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की जिम्मेदारी ईरान को दी गई है। समझौते में कहा गया है कि ईरान व्यापारिक जहाजों के सुरक्षित मार्ग के लिए अपनी ओर से सर्वश्रेष्ठ प्रयास करेगा। साथ ही ईरान क्षेत्र के अन्य देशों के साथ मिलकर भविष्य के समुद्री प्रबंधन और सेवाओं की शर्तें तय करेगा।
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