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UK: एपस्टीन के खुलासों के बाद स्टार्मर की कुर्सी पर संकट; सासंदों से बोले- थोड़ा कार्यकाल बचा, पद से न हटाएं

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: हिमांशु चंदेल Updated Tue, 10 Feb 2026 01:58 AM IST
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सार

एपस्टीन फाइल्स से जुड़े खुलासों ने ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। प्रधानमंत्री कीएर स्टारमर पर इस्तीफे का दबाव बढ़ रहा है। उनकी टीम के दो बड़े सहयोगी इस्तीफा दे चुके हैं। पार्टी के अंदर से भी नेतृत्व बदलने की मांग उठी है। विपक्ष हमलावर है। आइए जानते हैं, अब वो इस स्थिति को कैसे संभालते हैं।

Epstein files rock Downing Street as Keir Starmer fights to hold on amid calls to quit UK leadership Change
कीएर स्टार्मर, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री - फोटो : X @10DowningStreet
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विस्तार

यौन अपराधी रहे जेफ्री एपस्टीन का भूत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सरकारों को प्रभावित कर रहा है। इस मामले में नाम आने के बाद ब्रिटेन के चीफ ऑफ स्टाफ को खोने के बाद प्रधानमंत्री कीएर स्टार्मर की कुर्सी भी खतरे में पड़ गई है। सोमवार को स्टार्मर ने अपने लेबर पार्टी के सांसदों को यह समझाने की कोशिश की कि उनका कार्यकाल सिर्फ डेढ़ वर्ष का ही रहा है इसलिए वे उन्हें पद से न हटाएं। ब्रिटेन में स्टार्मर को लेकर उनकी लेबर पार्टी में ही सांसदों का समर्थन कम हो रहा है।
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वाशिंगटन में पूर्व ब्रिटिश राजदूत पीटर मैंडेलसन और दिवंगत यौन अपराधी एपस्टीन के बीच संबंधों के खुलासे के बाद से ही ब्रिटिश पीएम की साख पर संकट आ गया था लेकिन रविवार को चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी के इस्तीफे के बाद सोमवार सुबह से ही स्टार्मर के विरोध में उनकी ही पार्टी का दबाव बढ़ गया है।
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वरिष्ठ सांसद एमिली थॉर्नबेरी ने कहा, मैकस्वीनी एक विवादित व्यक्ति बन गए थे। अब नए सिरे से शुरुआत हो। जनमत सर्वेक्षणों में भी लेबर पार्टी धुर दक्षिणपंथी रिफॉर्म यूके पार्टी से पिछड़ रही है। इसमें सुधार न होने से मेंडेलसन के खुलासों ने नेतृत्व परिवर्तन का दबाव बढ़ा दिया। उधर, विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी नेता केमी बैडेनोच ने भी सरकार पर गलत फैसलों का आरोप लगाकर दबाव बनाया है।

2024 के फैसले से उपजा कुर्सी पर संकट
ब्रिटिश पीएम कीएर स्टार्मर की कुर्सी पर खतरा 2024 के उनके फैसले से उपजा है, जिसमें उन्होंने एपस्टीन से संबंधों की जानकारी होने के बावजूद मैंडेलसन को ब्रिटेन के सबसे महत्वपूर्ण राजनयिक पद पर नियुक्ति दी। 2008 में एक नाबालिग से जुड़े यौन अपराधों के लिए दोषी ठहराए जाने के बाद भी मैंडेलसन ने एपस्टीन के साथ दोस्ती बनाए रखी। पार्टी सांसदों का कहना है कि स्टार्मर को मैंडेलसन की नियुक्ति से पहले सोचना चाहिए था। मैंडेलसन पर अभी और खुलासे होना है।

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मैकस्वीनी के हटने के बाद बढ़ा दबाव
मैंडेलसन को हटाने के बाद स्टार्मर के चीफ ऑफ स्टाफ, मॉर्गन मैकस्वीनी ने भी रविवार को इस्तीफा देते हुए कहा कि मैंने ही प्रधानमंत्री को वह नियुक्ति करने की सलाह दी थी और मैं उस सलाह की पूरी जिम्मेदारी लेता हूं। 2020 में लेबर पार्टी के नेता बनने के बाद से मैकस्वीनी स्टार्मर के सबसे अहम सहयोगी रहे हैं। वह जुलाई 2024 के चुनावों में लेबर पार्टी की शानदार जीत के प्रमुख सूत्रधार माने जाते हैं। उनके हटने के बाद स्टार्मर पर सांसदों ने दबाव बढ़ा दिया है।

लेबर पार्टी के सांसदों को बंद कमरे में किया संबोधित
स्टार्मर ने सोमवार को लेबर पार्टी के सांसदों को बंद कमरे में संबोधित भी किया। अभी उनके संबोधन के विवरण सामने नहीं आए हैं लेकिन वे अपनी खोई हुई साख को कुछ हद तक फिर से हासिल करने के पूरे प्रयास में हैं। खुद पर बढ़ते दबाव के बाद पिछले हफ्ते ही मैंडेलसन के झूठ पर विश्वास करने के लिए माफी मांगी। उन्होंने मैंडेलसन की नियुक्ति से संबंधित दस्तावेज जारी करने का वादा भी किया।

सरकार का कहना है कि इस दस्तावेज से पता चलेगा कि मैंडेलसन ने एपस्टीन से अपने संबंधों के बारे में अधिकारियों को गुमराह किया था या नहीं। अमेरिका में सामने आए दस्तावेजों से पता चलता है कि मैंडेलसन ने डेढ़ दशक पहले एपस्टीन को संवेदनशील सरकारी जानकारी दी थी। इस अपराध उम्रकैद भी संभव है। मैंडेलसन को अभी तक गिरफ्तार या आरोपित नहीं किया गया है और उन पर यौन कदाचार का कोई आरोप नहीं है।

बिना आम चुनाव बदल सकते हैं पीएम
ब्रिटेन की संसदीय प्रणाली के तहत, राष्ट्रीय चुनाव की आवश्यकता के बिना प्रधानमंत्री को बदला जा सकता है। यदि स्टार्मर को चुनौती दी जाती है या वे इस्तीफा देते हैं, तो लेबर पार्टी के नेतृत्व के लिए चुनाव होंगे। चुनाव में जीतने वाला पीएम बनेगा। कंजर्वेटिव पार्टी ने 2019 व 2024 के राष्ट्रीय चुनावों के बीच 3 पीएम बदले। उनमें से एक, लिज ट्रस, केवल 49 दिनों तक पद पर रहीं। स्टार्मर कंजर्वेटिव पार्टी के सत्ता में अंतिम वर्षों में व्याप्त अराजकता खत्म करने के वादे पर चुने गए थे।

नॉर्वे की राजदूत का इस्तीफा
यौन तस्कर जेफ्री एपस्टीन के साथ संबंधों को लेकर जांच का सामना कर रही नॉर्वे की राजदूत मोना जूल ने भी इस्तीफा दे दिया है। वह 1990 के दशक में इस्राइल-फलस्तीन शांति प्रयासों में शामिल थीं और हाल ही में जॉर्डन में कार्यरत थीं। नॉर्वे के विदेश मंत्रालय ने मोना जूल के इस्तीफे की घोषणा उन्हें जॉर्डन में देश की राजदूत पद से निलंबित किए जाने के कुछ दिनों बाद की है।

मोना का यह निलंबन उन रिपोर्टों के बाद हुआ जिनमें कहा गया था कि एपस्टीन ने 2019 में न्यूयॉर्क की एक जेल में आत्महत्या करने से कुछ समय पहले तैयार की गई वसीयत में जूल और उनके पति टेर्जे रोड-लार्सन के बच्चों के लिए एक करोड़ डॉलर छोड़े थे। विदेश मंत्री एस्पेन बार्थ ईडे ने कहा, जूल का निर्णय सही और आवश्यक था। उन्होंने कहा, दोषी यौन अपराधी के साथ उनका संपर्क निर्णय लेने में गंभीर चूक दर्शाता है, यह मामला उस भरोसे को बहाल करना मुश्किल बनाता है जो इस पद के लिए आवश्यक है। ईडे ने कहा, एपस्टीन के बारे में जूल की जानकारी और उनसे संपर्क की मंत्रालय की जांच जारी रहेगी और जूल मंत्रालय के साथ बातचीत जारी रखेंगी, ताकि मामले को स्पष्ट किया जा सके।
 
संपर्क छिटपुट और निजी
इस्तीफा दे चुकी मोना जूल ने कहा, एपस्टीन के साथ उनका संपर्क छिटपुट और निजी था। उधर, नॉर्वे के विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसने न्यूयॉर्क स्थित थिंक टैंक इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट को दी जाने वाली धनराशि और उससे संपर्क की समीक्षा भी शुरू की है। यह समीक्षा उस अवधि की है जब रोड-लार्सन इसके प्रमुख थे। ईडे ने कहा, रोड-लार्सन ने एपस्टीन के संबंध में भी गलत निर्णय लिए थे। रोड-लार्सन और जूल उन लोगों में शामिल थे जिन्होंने 1990 के दशक में इस्राइल-फलस्तीनी संघर्ष को सुलझाने के उद्देश्य से ऐतिहासिक ओस्लो समझौते को सुविधाजनक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

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