पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रैली में फायरिंग की घटना हुई है। इस फायरिंग में खान भी घायल हुए। उनके अलावा चार और लोगों के घायल होने की भी खबर है। खान को पास के ही अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं, एक हमलावर को गिरफ्तार भी किया गया है।
हालांकि यह पहला मामला नहीं जब देश के किसी बड़े नेता पर इस तरह का कातिलाना हमला किया गया है। देश की आजादी के बाद से पाकिस्तान में कई राजनेताओं की हत्या भी हो चुकी हैं। इनमें पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान से लेकर बेनजीर भुट्टों जैसे शीर्ष नेता शामिल रहे। आइए उनके बारे में जानते हैं।
लियाकत अली खान
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लियाकत अली खान
- फोटो : सेल्फ
पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान को रावलपिंडी के कंपनी बाग मंच पर ही मार डाला गया। इस कंपनी बाग को बाद में लियाकत बाग नाम दिया गया था।
जुल्फिकार अली भुट्टो
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जुल्फीकार अली भुट्टो
- फोटो : सोशल मीडिया
देश के एक और दिग्गज नेता जुल्फिकार अली भुट्टो को जनरल जिया-उल-हक के सैन्य शासन द्वारा फांसी दी गई थी। लियाकत बाग से कुछ ही दूसरी उन्हें फांसी पर लटका दिया गया था। फांसी के नौ साल बाद जिया-उल-हक की एक विमान दुर्घटना में मौत हो गई थी। हालांकि, कुछ हलकों में यह संदेह है कि यह एक हत्या थी।
बेनजीर भुट्टो
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बेनजरी भुट्टो
- फोटो : सोशल मीडिया
पाकिस्तान के सिंध प्रांत की रहने वाली दो बार की प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की 27 दिसंबर 2007 को रावलपिंडी में गोली मारकर नृशंस हत्या कर दी गई थी। मौत की धमकियां मिलने के बाद बेनजीर को उच्च सुरक्षा में रखा गया था। लेकिन फायरिंग में उनकी मौत हो गई। बेनजीर भुट्टो, पाकिस्तान के मौजूदा विदेश मंत्री बिलावल जरदारी भुट्टो की मां थीं।
मीडिया रिपोर्ट में कहा गया कि उनके पति ने उनके शव का पोस्टमॉर्टम नहीं करने दिया। जबकि सभी जानते थे कि मौत के कारण का पता लगाने के लिए पोस्टमॉर्टम कितना जरूरी है। बेनजीर भुट्टो के मामले में ऐसा नहीं हुआ और हत्यारे कभी पकड़े नहीं गए।
इमरान खान
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इमरान खान लॉन्ग मार्च
- फोटो : एजेंसी
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के प्रमुख व पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने 'गंभीर खतरे की चेतावनी के मद्देनजर' रावलपिंडी की एक सार्वजनिक बैठक में जुल्फिकार अली भुट्टो की तरह धमकी भरा पत्र दिखाया था। इस साल सत्ता खोने के बाद इमरान खान ने देशव्यापी विरोध अभियान शुरू किया। अप्रैल में पेशावर और कराची में लगातार दो रैलियों में खान के समर्थन में बड़ी संख्या में लोग सामने आए।
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