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Social Media Ban: ऑस्ट्रेलिया के बाद अंडर-16 सोशल मीडिया बैन पर यूके सबसे आगे, यूरोप व अमेरिका में भी मंथन तेज
अमर उजाला नेटवर्क
Published by: लव गौर
Updated Mon, 19 Jan 2026 04:57 AM IST
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सार
Social Media Ban: ऑस्ट्रेलिया के बाद अंडर-16 सोशल मीडिया प्रतिबंध पर यूके सबसे आगे माना जा रहा है। इसी के साथ यूरोप और अमेरिका में भी इस मुद्दे पर मंथन तेज हो गया है। शोध के मुताबिक सोशल मीडिया के उपयोग से बच्चों की मानसिक सेहत पर व्यापक प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाने वाला ऑस्ट्रेलिया का कदम अब वैश्विक बहस का केंद्र बन गया है। इसी कड़ी में यूनाइटेड किंगडम (यूके) अगला देश माना जा रहा है, जहां इस सप्ताह संसद के हाउस ऑफ लॉर्ड्स में अंडर-16 सोशल मीडिया बैन पर अहम वोट हो सकता है।
ऑस्ट्रेलिया सरकार का ऑनलाइन सेफ्टी अमेंडमेंट एक्ट 10 दिसंबर से लागू हो चुका है। इस कानून के तहत रेडिट, एक्स, मेटा के इंस्टाग्राम, यूट्यूब और टिकटॉक जैसे बड़े प्लेटफॉर्म शामिल हैं। नियमों के अनुसार कंपनियों को एज वेरिफिकेशन लागू करना होगा ताकि 16 साल से कम उम्र के बच्चे अकाउंट न बना सकें।
दुनिया के देशों ने प्रतिबंध को जरूरी माना
यूके स्थित ग्रासरूट संगठन स्मार्टफोन फ्री चाइल्डहुड की सह-संस्थापक डेजी ग्रीनवेल ने कहा कि यह किसी एक देश की समस्या नहीं है। दुनिया भर की सरकारें बच्चों, अभिभावकों और समाज के लिए मौजूदा हालात को असफल मान रही हैं और सोशल मीडिया बैन को जरूरी माना है। ग्रीनवेल का कहना है कि जैसे-जैसे सबूत बढ़ेंगे और सरकारों का भरोसा मजबूत होगा, वैसे-वैसे और देश इस दिशा में आगे बढ़ेंगे।
यूरोप में भी हलचल: फ्रांस सबसे आगे
यूके के अलावा फ्रांस भी इस दौड़ में मजबूत दावेदार माना जा रहा है। वहां दो विधेयकों पर बहस चल रही है, जिनमें से एक को राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का समर्थन प्राप्त है। इन प्रस्तावों का उद्देश्य 15 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखना है। संयुक्त राज्य अमेरिका में राष्ट्रीय स्तर पर इस तरह का बैन फिलहाल मुश्किल माना जा रहा है, लेकिन राज्य और स्थानीय स्तर पर रुचि बढ़ रही है। कैलिफोर्निया और टेक्सस में 2026 तक राज्य-स्तरीय प्रतिबंधों पर चर्चा चल रही है।
ये भी पढ़ें: ऑस्ट्रेलिया: 47 लाख सोशल मीडिया अकाउंट तक बच्चों की पहुंच रद्द, मेटा ने 5.44 लाख खाते हटाए
मानसिक स्वास्थ्य और स्क्रीन टाइम की चिंता
ग्रीनवेल के अनुसार शोध लगातार दिखाता है कि जैसे-जैसे बच्चों का स्मार्टफ़ोन और सोशल मीडिया पर समय बढ़ता है, व्यापक तौर पर उनकी मानसिक सेहत प्रभावित होती है। उनका तर्क है कि अगर ये प्लेटफॉर्म उपलब्ध नहीं होंगे तो नेटवर्क इफेक्ट टूटेगा और बच्चे वास्तविक दुनिया से दोबारा जुड़ सकेंगे। यूके के प्रधानमंत्री कीअर स्टारमर भी इस विचार के समर्थन में सामने आए हैं।
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ऑस्ट्रेलिया सरकार का ऑनलाइन सेफ्टी अमेंडमेंट एक्ट 10 दिसंबर से लागू हो चुका है। इस कानून के तहत रेडिट, एक्स, मेटा के इंस्टाग्राम, यूट्यूब और टिकटॉक जैसे बड़े प्लेटफॉर्म शामिल हैं। नियमों के अनुसार कंपनियों को एज वेरिफिकेशन लागू करना होगा ताकि 16 साल से कम उम्र के बच्चे अकाउंट न बना सकें।
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दुनिया के देशों ने प्रतिबंध को जरूरी माना
यूके स्थित ग्रासरूट संगठन स्मार्टफोन फ्री चाइल्डहुड की सह-संस्थापक डेजी ग्रीनवेल ने कहा कि यह किसी एक देश की समस्या नहीं है। दुनिया भर की सरकारें बच्चों, अभिभावकों और समाज के लिए मौजूदा हालात को असफल मान रही हैं और सोशल मीडिया बैन को जरूरी माना है। ग्रीनवेल का कहना है कि जैसे-जैसे सबूत बढ़ेंगे और सरकारों का भरोसा मजबूत होगा, वैसे-वैसे और देश इस दिशा में आगे बढ़ेंगे।
यूरोप में भी हलचल: फ्रांस सबसे आगे
यूके के अलावा फ्रांस भी इस दौड़ में मजबूत दावेदार माना जा रहा है। वहां दो विधेयकों पर बहस चल रही है, जिनमें से एक को राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का समर्थन प्राप्त है। इन प्रस्तावों का उद्देश्य 15 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखना है। संयुक्त राज्य अमेरिका में राष्ट्रीय स्तर पर इस तरह का बैन फिलहाल मुश्किल माना जा रहा है, लेकिन राज्य और स्थानीय स्तर पर रुचि बढ़ रही है। कैलिफोर्निया और टेक्सस में 2026 तक राज्य-स्तरीय प्रतिबंधों पर चर्चा चल रही है।
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मानसिक स्वास्थ्य और स्क्रीन टाइम की चिंता
ग्रीनवेल के अनुसार शोध लगातार दिखाता है कि जैसे-जैसे बच्चों का स्मार्टफ़ोन और सोशल मीडिया पर समय बढ़ता है, व्यापक तौर पर उनकी मानसिक सेहत प्रभावित होती है। उनका तर्क है कि अगर ये प्लेटफॉर्म उपलब्ध नहीं होंगे तो नेटवर्क इफेक्ट टूटेगा और बच्चे वास्तविक दुनिया से दोबारा जुड़ सकेंगे। यूके के प्रधानमंत्री कीअर स्टारमर भी इस विचार के समर्थन में सामने आए हैं।
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