ईरान हिंसा में अब तक क्या हुआ?: 5000 मौतों के बाद भी नहीं थम रहा बवाल, जानें हिंसक प्रदर्शनों की 10 बड़ी बातें
ईरान में विरोध-प्रदर्शन और हिंसा का दौर लगातार जारी है। अब तक 5,000 से अधिक लोग मारे गए हैं और हजारों गिरफ्तारियां शामिल है। आइए जानें इस संकट की 10 बड़ी बातें...
विस्तार
ईरान में पिछले कुछ हफ्तों से जारी हिंसक प्रदर्शन और विरोध-प्रदर्शन अब भी थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। सरकारी दमन और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बीच अब तक कम से कम 5,000 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग गिरफ्तार हैं। देश में इंटरनेट और मीडिया पर सख्त पाबंदियों के बावजूद विरोध प्रदर्शन लगातार बढ़ रहे हैं। इस बीच, सुप्रीम लीडर आयातुल्लाह अली खमनेई और सरकार ने विदेशी ताकतों को इस हिंसा का जिम्मेदार ठहराया है, वहीं अमेरिका और अन्य देशों ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई है।
आइए जानते है ईरान में जारी अशांति और हिंसा की अब तक की 10 सबसे अहम बातें...
1. ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की अमेरिकी को चेतावनी
ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि यदि देश के सुप्रीम लीडर आयातुल्लाह अली खमनेई पर हमला किया गया, तो इसे पूरे ईरान के खिलाफ संपूर्ण युद्ध के बराबर माना जाएगा। यह बयान ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर साझा किया। राष्ट्रपति पेजेशकियन ने कहा किसी भी अन्यायपूर्ण आक्रमण का हमारा जवाब कठोर और गंभीर होगा। सुप्रीम लीडर पर हमला ईरानी जनता के खिलाफ पूर्ण युद्ध के समान होगा।
2. अमेरिका और इस्राइल पर ईरान ने लगाया आरोप
हालांकि ट्रंप ने हाल ही में सोशल मीडिया पोस्ट में ईरानी नेताओं का धन्यवाद भी किया, क्योंकि उन्होंने 800 बंदियों की फांसी रोक दी। दूसरी तरफ, ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई ने कहा कि इन दंगों और तबाही के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को वह मुख्य जिम्मेदार मानते हैं। उन्होंने कहा कि अशांति फैलाने वाले कुछ लोग ऐसे थे, जिन्हें अमेरिकी और इजरायली एजेंसियों ने पहचाना, प्रशिक्षित किया और भर्ती किया था। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी बाहरी दबाव या धमकी से नहीं डरेगा और अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा।
3. स्टेट टीवी हैक और विरोधी संदेश
ईरान के सरकारी टेलीविजन चैनलों को एक विरोधी समूह द्वारा कुछ समय के लिए हैक कर लिया गया और इस दौरान प्रदर्शन के फुटेज और संदेश दिखाए गए, जिसमें मूसलाधार विरोध की बात कही गई। इन चैनलों पर निर्वासित राजकुमार रेजा पहलवी का भी संदेश प्रसारित हुआ, जिसमें उन्होंने लोगों से विरोध जारी रखने और सुरक्षा बलों से प्रदर्शनों के पक्ष में होने का आह्वान किया।
4. निवासित राजकुमार ने किया प्रदर्शनकारियों का समर्थन
निवासित राजकुमार रेजा पहलवी ने कहा है कि यह संघर्ष अधिकार और मुक्ति के बीच है और उन्हें नेतृत्व करने के लिए बुलाया जा रहा है। उन्होंने घोषणा की है कि मैं जल्द ही ईरान लौटूंगा।
5. इंटरनेट सेवाओं में थोड़ी रियायत
8 जनवरी के बाद ईरान में लगभग पूरे देश में इंटरनेट बंद कर दिया गया, जिससे लोगों और दुनिया के बीच संवाद लगभग बाधित हो गया। यह ब्लैकआउट अब तक कई दिनों से जारी है। हालांकि कुछ स्थानों पर सीमित इंटरनेट और मोबाइल सेवा को बहाल कर दी गई है, लेकिन यह बहुत ही प्रतिबंधित और हेवली फिल्टर है।
6. ईरान पर कार्रवाई पर ट्रंप ने कहा- सभी विकल्प खुले
हालांकि अमेरिका ने यह भी कहा है कि सभी विकल्प खुले हैं। साथ ही सैन्य कार्रवाई से पूरी तरह इनकार नहीं किया गया है। अमेरिकी सैन्य गतिविधियों से संकेत मिल रहे हैं कि हालात अब भी अनिश्चित हैं। ईरान के भीतर प्रदर्शनकारी फिलहाल असमंजस में हैं। दुनिया से कटे हुए और सख्त कार्रवाई के बीच वे इंतजार कर रहे हैं कि आगे क्या होगा। तेहरान के एक निवासी ने संदेश में कहा प्रदर्शन फिलहाल रुके हुए हैं। लोग देख रहे हैं कि ट्रंप अगला कदम क्या उठाते हैं।
7. शांति की अस्थिर स्थिति
ईरान की राजधानी तेहरान और अन्य शहरों में सड़कें कभी‑कभी शांत दिखती हैं, लेकिन अस्थिरता बनी हुई है और सुरक्षा बल व्यापक रूप से तैनात हैं।
8. ट्रंप ने की थी प्रदर्शन जारी रखने की अपील
इसके बाद ट्रंप ने एक बार फिर ईरानियों से प्रदर्शन जारी रखने और संस्थानों पर कब्जा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मदद रास्ते में है। लेकिन सिर्फ एक दिन बाद ही उन्होंने अपना रुख बदल लिया और कहा कि ईरानी अधिकारियों ने भरोसा दिया है कि किसी को फांसी नहीं दी जाएगी। इस बयान के बाद ईरान में प्रदर्शनकारियों के बीच मायूसी और डर और गहरा गया।
9. भारतीय छात्रों ने बताया कि ईरान के हालात बेहद तनावपूर्ण
ईरान से लौटे भारत के कई छात्रों ने वहां के हालात को बेहद तनावपूर्ण बताया। एक छात्रा ने कहा कि सड़कों पर माहौल असहज था और इंटरनेट बंद होने से वे पूरी तरह अलग-थलग महसूस कर रहे थे। भारत पहुंचकर परिवार को सामने देखना उनके लिए सुरक्षा और राहत का अहसास लेकर आया। परिजनों ने बताया कि इंटरनेट ब्लैकआउट के दौरान उनकी चिंता चरम पर पहुंच गई थी। बाद में भारतीय दूतावास द्वारा संपर्क बहाल किए जाने और मदद शुरू होने से राहत मिली। विदेश मंत्रालय के अनुसार, ईरान में करीब 9,000 भारतीय नागरिक रह रहे हैं, जिनमें अधिकांश छात्र हैं।
10. विरोध में शुरू हुआ आंदोलन, अब हिंसक
ईरानी अधिकारी के अनुसार, ये प्रदर्शन 28 दिसंबर को आर्थिक बदहाली, महंगाई और बेरोजगारी के विरोध में शुरू हुए थे। शुरुआत में लोग रोजमर्रा की परेशानियों को लेकर सड़कों पर उतरे थे। लेकिन दो हफ्तों के भीतर हालात तेजी से बिगड़ गए और आंदोलन ने राजनीतिक रूप ले लिया।
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