{"_id":"6a851460e5d3c771e001b6a4","slug":"france-to-expel-two-iranian-diplomats-after-alleged-assault-on-french-diplomats-fm-barrot-2026-08-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"'दो ईरानी राजनयिकों को निकालेगा फ्रांस': फ्रांसीसी विदेश मंत्री ने क्या कहा, क्यों बढ़ा दोनों देशों में तनाव?","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
'दो ईरानी राजनयिकों को निकालेगा फ्रांस': फ्रांसीसी विदेश मंत्री ने क्या कहा, क्यों बढ़ा दोनों देशों में तनाव?
Wed, 19 Aug 2026 07:56 AM IST
निर्मल कांत
एएनआई, पेरिस।
एएनआई, पेरिस।
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 19 Aug 2026 07:56 AM IST
सार
फ्रांसीसी राजनयिकों पर कथित हमले के बाद फ्रांस अब दो ईरानी राजनयिकों को देश से निकालेगा। यह घोषणा फ्रांस के विदेश मंत्री ने की है। ईरान ने फ्रांसीसी राजनयिकों पर विदेशी दखल के आरोप लगाए थे, तो क्या इस राजनयिक विवाद से दोनों देशों के संबंध और बिगड़ेंगे? पढ़िए रिपोर्ट
विज्ञापन
जीन-नोएल बैरट, फ्रांस के विदेश मंत्री
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
फ्रांसीसी विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरट ने मंगलवार को कहा कि फ्रांस आने वाले दिनों में दो ईरानी राजनयिकों को देश से निष्कासित करेगा। उन्होंने कहा कि जुलाई में दो फ्रांसीसी राजनयिकों पर कथित हमले के बाद ईरान ने एक 'असहनीय' काम किया।
फ्रांस के विदेश मंत्री ने क्या कहा?
बैरट ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव का सबसे ज्यादा नुकसान ईरानी लोगों को हो रहा है। उन्होंने कहा कि ईरानी लोग अपने देश में हो रहे दमन और सैन्य हमलों, दोनों के बीच फंसे हुए हैं। बैरट ने कहा, ईरानी लोग पश्चिम एशिया में इस बेहद तनावपूर्ण दौर के सबसे बड़े पीड़ित हैं। वे जनवरी 2026 के प्रदर्शनों के खूनी दमन और बमबारी के बीच फंसे हुए हैं।
उन्होंने आगे कहा कि फ्रांस ईरान के कलाकारों, वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं का समर्थन करता है। उनके मुताबिक, इसी वजह से फ्रांसीसी राजनयिकों पर जानबूझकर हमला किया गया।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: जमात फैक्टर में उलझी बांग्लादेशी प्रधानमंत्री की भारत यात्रा; तीस्ता कितना बड़ा मसला?
फ्रांस के विदेश मंत्री ने कहा, फ्रांस ईरानी लोगों के साथ खड़ा है और उनके कलाकारों, वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं का समर्थन करता है। इसी वजह से 19 जुलाई को दो फ्रांसीसी राजनयिकों पर बेहद शर्मनाक और जानबूझकर हमला किया गया।
उन्होंने आगे कहा, मैंने घोषणा की थी कि इस असहनीय काम के बाद कार्रवाई की जाएगी। ऐसा कर दिया गया है। फ्रांस में मौजूद दो ईरानी राजनयिकों को आने वाले दिनों में देश से बाहर निकाल दिया जाएगा।
ईरान ने फ्रांसीसी राजनयिकों को क्यों हिरासत में लिया?
यह मामला ईरान के खुफिया मंत्रालय के उस बयान के बाद सामने आया, जिसमें कहा गया था कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जांच के दौरान विदेशी दखल के आरोप में दो फ्रांसीसी राजनयिकों को हिरासत में लिया गया था। बाद में दोनों राजनयिकों को तेहरान में फ्रांस के राजदूत को सौंप दिया गया।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, ईरानी खुफिया अधिकारियों का इन दोनों राजनयिकों से उस समय सामना हुआ, जब वे 'विदेशी घुसपैठ और हस्तक्षेप' के आरोपों की जांच से जुड़े अदालत के आदेश पर कार्रवाई कर रहे थे।
मंत्रालय ने कहा कि राजनयिकों की पहचान की पुष्टि की गई। इसके बाद ईरानी अधिकारियों ने विदेश मंत्रालय को इसकी जानकारी दी और राजनयिक पुलिस की सुरक्षा में उन्हें फ्रांस के राजदूत को सौंप दिया गया।
ईरान ने फ्रांस पर क्या आरोप लगाया?
ईरान ने फ्रांस पर इस मामले से लोगों का ध्यान हटाने की कोशिश करने का आरोप लगाया था। तेहरान ने इसे नियमों का उल्लंघन बताया था। ईरान ने यह भी कहा था कि जांच के दौरान मिले दस्तावेजों से विदेशी दखल के एक बड़े अभियान के संकेत मिलते हैं।
पश्चिमी देशों पर क्यों भड़के थे अराघची?
इससे पहले ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने फ्रांस और दूसरे पश्चिमी देशों की आलोचना की थी। इन देशों ने ईरान में प्रदर्शनकारियों को कथित तौर पर फांसी दिए जाने की निंदा की थी। अराघची ने इन देशों पर दोहरे रवैये का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि गाजा और क्षेत्रीय संघर्षों को लेकर इन देशों की स्थिति उनके कथित मानवाधिकार संबंधी रुख से अलग है।
विज्ञापन
फ्रांस के विदेश मंत्री ने क्या कहा?
बैरट ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव का सबसे ज्यादा नुकसान ईरानी लोगों को हो रहा है। उन्होंने कहा कि ईरानी लोग अपने देश में हो रहे दमन और सैन्य हमलों, दोनों के बीच फंसे हुए हैं। बैरट ने कहा, ईरानी लोग पश्चिम एशिया में इस बेहद तनावपूर्ण दौर के सबसे बड़े पीड़ित हैं। वे जनवरी 2026 के प्रदर्शनों के खूनी दमन और बमबारी के बीच फंसे हुए हैं।
विज्ञापन
उन्होंने आगे कहा कि फ्रांस ईरान के कलाकारों, वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं का समर्थन करता है। उनके मुताबिक, इसी वजह से फ्रांसीसी राजनयिकों पर जानबूझकर हमला किया गया।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: जमात फैक्टर में उलझी बांग्लादेशी प्रधानमंत्री की भारत यात्रा; तीस्ता कितना बड़ा मसला?
फ्रांस के विदेश मंत्री ने कहा, फ्रांस ईरानी लोगों के साथ खड़ा है और उनके कलाकारों, वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं का समर्थन करता है। इसी वजह से 19 जुलाई को दो फ्रांसीसी राजनयिकों पर बेहद शर्मनाक और जानबूझकर हमला किया गया।
उन्होंने आगे कहा, मैंने घोषणा की थी कि इस असहनीय काम के बाद कार्रवाई की जाएगी। ऐसा कर दिया गया है। फ्रांस में मौजूद दो ईरानी राजनयिकों को आने वाले दिनों में देश से बाहर निकाल दिया जाएगा।
ईरान ने फ्रांसीसी राजनयिकों को क्यों हिरासत में लिया?
यह मामला ईरान के खुफिया मंत्रालय के उस बयान के बाद सामने आया, जिसमें कहा गया था कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जांच के दौरान विदेशी दखल के आरोप में दो फ्रांसीसी राजनयिकों को हिरासत में लिया गया था। बाद में दोनों राजनयिकों को तेहरान में फ्रांस के राजदूत को सौंप दिया गया।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, ईरानी खुफिया अधिकारियों का इन दोनों राजनयिकों से उस समय सामना हुआ, जब वे 'विदेशी घुसपैठ और हस्तक्षेप' के आरोपों की जांच से जुड़े अदालत के आदेश पर कार्रवाई कर रहे थे।
मंत्रालय ने कहा कि राजनयिकों की पहचान की पुष्टि की गई। इसके बाद ईरानी अधिकारियों ने विदेश मंत्रालय को इसकी जानकारी दी और राजनयिक पुलिस की सुरक्षा में उन्हें फ्रांस के राजदूत को सौंप दिया गया।
ईरान ने फ्रांस पर क्या आरोप लगाया?
ईरान ने फ्रांस पर इस मामले से लोगों का ध्यान हटाने की कोशिश करने का आरोप लगाया था। तेहरान ने इसे नियमों का उल्लंघन बताया था। ईरान ने यह भी कहा था कि जांच के दौरान मिले दस्तावेजों से विदेशी दखल के एक बड़े अभियान के संकेत मिलते हैं।
पश्चिमी देशों पर क्यों भड़के थे अराघची?
इससे पहले ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने फ्रांस और दूसरे पश्चिमी देशों की आलोचना की थी। इन देशों ने ईरान में प्रदर्शनकारियों को कथित तौर पर फांसी दिए जाने की निंदा की थी। अराघची ने इन देशों पर दोहरे रवैये का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि गाजा और क्षेत्रीय संघर्षों को लेकर इन देशों की स्थिति उनके कथित मानवाधिकार संबंधी रुख से अलग है।