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क्या पाकिस्तान में शासन व्यवस्था हुई फेल?: गृह मंत्री ने मान ली सिस्टम की हार, जवाबदेही से बच पाएगी शरीफ सरकार
Tue, 04 Aug 2026 09:54 PM IST
प्रशांत तिवारी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Tue, 04 Aug 2026 09:54 PM IST
सार
पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि देश की मौजूदा शासन व्यवस्था पूरी तरह विफल हो चुकी है। उनके इस बयान के बाद सवाल उठ रहे हैं कि जब वे स्वयं सत्ता और व्यवस्था का हिस्सा हैं, तो केवल समस्या बताने के बजाय उसकी जिम्मेदारी क्यों नहीं लेते। इस मुद्दे पर पाकिस्तान में राजनीतिक जवाबदेही, प्रशासनिक सुधार और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है।
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मोहसिन नकवी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी का हालिया बयान, जिसमें उन्होंने कहा कि देश की शासन व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है, महज एक आकलन नहीं बल्कि मौजूदा हालात की स्वीकारोक्ति माना जा रहा है। हालांकि यदि सरकार खुद यह मान रही है कि व्यवस्था विफल हो चुकी है, तो केवल उसकी पहचान करना पर्याप्त नहीं है। एक विस्तृत रिपोर्ट में कहा गया है कि नकवी को इस स्थिति पर जवाब भी देना चाहिए, क्योंकि वे स्वयं उसी व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं।
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क्या बोले मोहसिन नकवी?
30 जुलाई को पाकिस्तान इकोनॉमिक समिट को संबोधित करते हुए मोहसिन नकवी ने कहा कि पाकिस्तान की मौजूदा शासन व्यवस्था पूरी तरह विफल हो चुकी है और यह देश की समस्याओं का समाधान करने में सक्षम नहीं है। पाकिस्तान के प्रमुख अखबार डॉन के अनुसार नकवी ने कहा, 'जिस व्यवस्था के तहत हम रह रहे हैं, वह ढह चुकी है। इसके जरिए समस्याओं का समाधान संभव नहीं है।' यदि यही व्यवस्था जारी रही तो अगले दस वर्षों बाद भी पाकिस्तान उन्हीं समस्याओं पर चर्चा करता रहेगा। नकवी ने राजनीतिक दलों के बीच संवाद शुरू करने, शासन व्यवस्था में व्यापक सुधार लाने, नए प्रांत बनाने और प्रशासनिक सुधार लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
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जब व्यवस्था का हिस्सा हैं, तो जिम्मेदारी से कैसे बच सकते हैं?
द फ्राइडे टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया कि असली सवाल यह नहीं है कि नकवी ने क्या कहा, बल्कि यह है कि यह बात किसने कही। रिपोर्ट के अनुसार मोहसिन नकवी कोई बाहरी आलोचक नहीं हैं, बल्कि वे पाकिस्तान के गृह मंत्री हैं और अप्रैल 2022 से चल रही हाइब्रिड सत्ता व्यवस्था के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। वरिष्ठ पत्रकार नजम सेठी का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया कि अब तो डीजी आईएसपीआर भी शासन व्यवस्था की विफलता स्वीकार कर चुके हैं। यानी यह स्वीकारोक्ति अब केवल लेखों तक सीमित नहीं रही, बल्कि सत्ता के केंद्र तक पहुंच चुकी है।
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सुरक्षा और प्रशासन पर क्यों उठ रहे हैं गंभीर सवाल?
रिपोर्ट में कहा गया कि यह एक बड़ा विरोधाभास है। नकवी राज्य व्यवस्था की विफलता को दूर से नहीं देख रहे, बल्कि उनका मंत्रालय उसी व्यवस्था के केंद्र में मौजूद है। बलूचिस्तान अब भी हिंसा और संघर्ष का केंद्र बना हुआ है। खैबर पख्तूनख्वा लगातार आतंकी हमलों और सीमा पार से पैदा हो रही अस्थिरता का सामना कर रहा है। पूर्व संघीय कबायली क्षेत्रों (पूर्व एफएटीए) का अब तक प्रभावी ढंग से मुख्यधारा में एकीकरण नहीं हो पाया है। रिपोर्ट के मुताबिक दशकों तक सैन्य अभियान चलाने और अरबों रुपये खर्च करने के बावजूद पाकिस्तान का राज्य इन इलाकों में सुरक्षा और प्रभावी प्रशासन स्थापित करने में सफल नहीं हो पाया। ऐसे में यदि मौजूदा मॉडल विफल हो चुका है तो नकवी केवल उसका विश्लेषण करके अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते।
क्या सरकार खुद को सुधारक बता सकती है?
रिपोर्ट में कहा गया कि मोहसिन नकवी व्यवस्था की विफलता पर भाषण तो दे रहे हैं, लेकिन उसी व्यवस्था का हिस्सा बने हुए हैं। ऐसे में वे खुद को केवल मूकदर्शक नहीं बता सकते। रिपोर्ट के अनुसार जो सरकार उसी व्यवस्था से सत्ता और लाभ प्राप्त कर रही है, वह खुद को सुधारों की अगुआ भी नहीं बता सकती।
क्या मंत्रिमंडल को इस्तीफा दे देना चाहिए?
द फ्राइडे टाइम्स ने सवाल उठाया कि यदि सरकार वास्तव में मानती है कि शासन व्यवस्था पूरी तरह विफल हो चुकी है, तो फिर मंत्रिमंडल ने अब तक इस्तीफा क्यों नहीं दिया? और स्वयं मोहसिन नकवी ने अपने पद से इस्तीफा क्यों नहीं दिया? रिपोर्ट में कहा गया कि यदि पाकिस्तान का सत्ता प्रतिष्ठान वास्तव में यह मान चुका है कि मौजूदा व्यवस्था ढह चुकी है, तो उसके सामने केवल दो विकल्प बचते हैं या तो मार्शल लॉ लागू कर पूरी जिम्मेदारी अपने हाथ में ले या फिर निष्पक्ष और वास्तविक चुनाव कराकर सत्ता जनता को सौंप दे। हालांकि रिपोर्ट यह भी कहती है कि केवल कठोर राज्य व्यवस्था, जिसमें विकास की स्पष्ट योजना और संस्थागत सुधार न हों, वह एक कमजोर लेकिन निर्वाचित सरकार से भी अधिक नुकसानदायक साबित हो सकती है।
क्या महंगाई ने सरकार के खिलाफ नाराजगी बढ़ा दी है?
मोहसिन नकवी का यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान में लगातार बढ़ती महंगाई, ईंधन की कीमतों में वृद्धि और जीवन-यापन की बढ़ती लागत को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। जुलाई में कराची में ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों ने महंगाई और पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ी हुई कीमतों के खिलाफ प्रदर्शन किया। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने विस्तार से बताया कि ईंधन और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण उनका जीवन बेहद कठिन हो गया है।
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प्रदर्शनकारियों ने सरकार से क्या मांग की?
कराची प्रेस क्लब के बाहर प्रदर्शन कर रहे लोगों ने तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारे लगाए और शहबाज शरीफ सरकार से आवश्यक वस्तुओं तथा ईंधन की कीमतें कम करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए, तो समाज के कमजोर और वंचित वर्गों की परेशानियां और अधिक बढ़ जाएंगी।