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West Asia: 'सऊदी में गैस संयंत्र पर हमले के पीछे हूती विद्रोहियों का हाथ', इस्राइली मीडिया ने क्या दावे किए?

Sun, 09 Aug 2026 11:33 AM IST
निर्मल कांत एएनआई, रियाद।
एएनआई, रियाद। Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 09 Aug 2026 11:33 AM IST
सार

सऊदी अरब के जुबैल में गैस संयंत्र पर धमाका और आग लगने के बाद हूती विद्रोहियों पर हमले का आरोप लगा है। यह हमला ऐसे समय क्यों हुआ, जब सऊदी अरब ने हाल ही में पाकिस्तान और तुर्किये के साथ रक्षा समझौता किया है। पढ़िए रिपोर्ट-

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Houthis behind attack on gas facility in Saudi's Jubail region, reports Israeli media
सऊदी के गैस संयंत्र हूती विद्रोहियों के निशाने पर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई

विस्तार

सऊदी अरब के जुबैल इलाके में एक गैस संयंत्र पर हुए हमले के पीछे कथित तौर पर यमन के हूती विद्रोहियों का हाथ है। इस्राइली मीडिया ने यह दावा किया है। इससे पहले जानकारी सामने आई थी कि सऊदी अरब के पूर्वी इलाके में एक औद्योगिक संयंत्र में विस्फोट हुआ और आग लग गई। 
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इस्राइली मीडिया ने क्या बताया?
इस्राइल के चैनल 14 के मुताबिक, हूती विद्रोहियों ने जुबैल में सऊदी अरामको के एक गैस संयंत्र को निशाना बनाया था। यह दावा जुबैल इलाके में तेज धमाका सुनाई देने की खबरों के बाद सामने आया। 
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न्यूज एजेंसी अनादोलु ने बताया कि इलाके में तेज धमाके की आवाज सुनी गई। वहीं, ईरान के सरकारी प्रसारक आईआरआईबी ने अरब सूत्रों के हवाले से बताया कि जुबैल औद्योगिक शहर में गैस से जुड़ी सुविधाओं को निशाना बनाया गया और वहां आग लग गई।
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सऊदी अरब के पूर्वी तट पर स्थित जुबैल औद्योगिक शहर देश के बड़े औद्योगिक और ऊर्जा केंद्रों में से एक है। यहां पेट्रोकेमिकल, तेल शोधन और गैस से जुड़ी बड़ी सुविधाएं मौजूद हैं।

यह घटना ऐसे समय में सामने आई, जब क्षेत्र में तनाव बढ़ा हुआ है। इससे पहले भी सऊदी अरब के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाकर कई हमले किए गए हैं और धमकियां दी जा चुकी हैं। ताजा खबरें लाल सागर क्षेत्र में हूती विद्रोहियों की फिर बढ़ती गतिविधियों और सऊदी अरब के ऊर्जा और परिवहन ढांचे पर हमलों की बढ़ती चिंता के बीच आई हैं।

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सऊदी अरब की नाकाबंदी का किया था एलान
हूती विद्रोहियों का यमन के उत्तरी हिस्से के बड़े इलाके पर नियंत्रण है और उन्हें ईरान का समर्थन हासिल है। उन्होंने पिछले महीने लाल सागर में रियाद के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी का एलान किया था। खास तौर पर बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में नाकाबंदी की बात कही गई थी। हूती विद्रोहियों ने इसके पीछे यमन पर सऊदी नाकाबंदी का हवाला दिया था। हालांकि, रियाद ने इस दावे को खारिज कर दिया था।

हूती विद्रोही पहले भी मिसाइल और ड्रोन के जरिये सऊदी अरब को निशाना बना चुके हैं। सऊदी अरब अतीत में इस समूह पर अपने ऊर्जा ढांचे और दूसरी रणनीतिक सुविधाओं को खतरे में डालने का आरोप लगाता रहा है। सऊदी अरब की ऊर्जा सुविधाओं पर हूती विद्रोहियों का यह पहला बड़ा हमला बताया जा रहा है।


'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' के बाद हुआ हमला
यह हमला शुक्रवार को पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' पर हस्ताक्षर होने के कुछ दिनों बाद हुआ है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और संघर्ष के बीच हुए इस समझौते का मकसद तीनों देशों के बीच रक्षा और सैन्य सहयोग को मजबूत करना और उनकी सामूहिक सुरक्षा क्षमता बढ़ाना है।

शिखर सम्मेलन के बयान में कहा गया, इस समझौते का मकसद किसी भी हमले के खिलाफ सामूहिक सुरक्षा को मजबूत करना है। इसमें कहा गया है कि तीनों देशों में से किसी एक पर होने वाला कोई भी सशस्त्र हमला सभी पर हमला माना जाएगा। बयान में आगे कहा गया कि यह समझौता तीनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के सभी क्षेत्रों को बढ़ाने का भी प्रावधान करता है।
 
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