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भारत-घाना की दोस्ती में नया दम: व्यापार, रक्षा और तकनीक पर बड़ा फोकस, अफ्रीका में बढ़ेगा भारत का प्रभाव

Wed, 07 Oct 2026 07:26 AM IST
प्रशांत तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत तिवारी Updated Wed, 07 Oct 2026 07:26 AM IST
सार

भारत और घाना ने व्यापार, निवेश, रक्षा, दवा, तकनीक, कृषि अनुसंधान और शिक्षा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और घाना के विदेश मंत्री सैम ओकुजेटो अबलाक्वा ने अफ्रीकी संघ तथा ECOWAS के साथ भारत के जुड़ाव को मजबूत करने पर भी जोर दिया। इस दौरान वैज्ञानिक अनुसंधान और कृषि शिक्षा से जुड़े दो समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया। 

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India-Ghana Major focus on trade defense and technology India's influence in Africa set to grow
विदेश मंत्री एस. जयशंकर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत और घाना ने आपसी रिश्तों को और मजबूत बनाने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिलकर काम करने, व्यापार बढ़ाने और विकास से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग का दायरा बढ़ाने पर चर्चा की है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने घाना के विदेश मंत्री सैम ओकुजेटो अबलाक्वा से मुलाकात कर दोनों देशों के बीच व्यापक साझेदारी को आगे बढ़ाने के विभिन्न पहलुओं पर बातचीत की। इस दौरान अफ्रीकी संघ और पश्चिम अफ्रीकी देशों के आर्थिक संगठन के साथ भारत के बढ़ते जुड़ाव पर भी जोर दिया गया।

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तीन अफ्रीकी देशों के दौरे पर जयशंकर, घाना से हुई शुरुआत
विदेश मंत्री एस. जयशंकर मंगलवार को घाना पहुंचे। यह तीन अफ्रीकी देशों की उनकी यात्रा का पहला पड़ाव है। इस दौरे का मकसद भारत और अफ्रीकी देशों के बीच पुराने और मजबूत रिश्तों को नई दिशा देना तथा आपसी सहयोग के नए रास्ते तलाशना है। घाना पहुंचने के बाद जयशंकर ने वहां के विदेश मंत्री सैम ओकुजेटो अबलाक्वा के साथ कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि भारत और घाना ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों के साझेदार हैं। दोनों देशों की विकास संबंधी प्राथमिकताएं काफी हद तक एक जैसी हैं और उनके बीच ऐतिहासिक एकजुटता का रिश्ता रहा है।
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व्यापार, निवेश और रक्षा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर
दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की बातचीत में व्यापार, निवेश, विकास, दवाइयों, कौशल विकास, रक्षा, तकनीक और लोगों के बीच आपसी संपर्क बढ़ाने जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। दोनों पक्षों ने इन क्षेत्रों में व्यापक साझेदारी को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। भारत और घाना का मानना है कि आपसी सहयोग को नए क्षेत्रों तक पहुंचाकर दोनों देशों के विकास को गति दी जा सकती है। खास तौर पर तकनीक, दवा उद्योग, कृषि अनुसंधान और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग से दोनों देशों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
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अफ्रीकी संघ और ECOWAS के साथ भारत का जुड़ाव होगा और मजबूत
बैठक में द्विपक्षीय रिश्तों के अलावा बहुपक्षीय सहयोग पर भी चर्चा हुई। जयशंकर ने कहा कि भारत और घाना ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिलकर काम करने तथा अफ्रीकी संघ और ECOWAS के साथ भारत की भागीदारी को और गहरा करने पर विचार किया। ECOWAS पश्चिम अफ्रीका के देशों का क्षेत्रीय संगठन है, जो आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए काम करता है। घाना इस संगठन के संस्थापक सदस्यों में शामिल है। वहीं, घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा वर्ष 2027 में अफ्रीकी संघ की अध्यक्षता संभालेंगे। ऐसे में भारत और घाना के बीच बढ़ता सहयोग अफ्रीका के साथ भारत के व्यापक संबंधों के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।

पिछले साल व्यापक साझेदारी तक पहुंचे थे दोनों देशों के रिश्ते
घाना के विदेश मंत्री सैम ओकुजेटो अबलाक्वा ने कहा कि भारत और घाना के रिश्ते अब उच्च स्तर की रणनीतिक साझेदारी में बदल चुके हैं। उन्होंने बताया कि पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घाना यात्रा के दौरान दोनों देशों के संबंधों को व्यापक साझेदारी का दर्जा दिया गया था। इससे दोनों देशों के बीच सहयोग को और विस्तार देने का रास्ता खुला है। अब कोशिश है कि पहले से मजबूत संबंधों को व्यापार, शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान, कृषि, रक्षा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में ठोस नतीजों तक पहुंचाया जाए।

वैज्ञानिक शोध और कृषि शिक्षा के लिए दो अहम समझौते
जयशंकर और अबलाक्वा की मौजूदगी में भारत और घाना के बीच दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान भी हुआ। पहला समझौता भारतीय प्राणी सर्वेक्षण और घाना विश्वविद्यालय के बीच हुआ। इसके तहत शैक्षणिक गतिविधियों, वैज्ञानिक अनुसंधान और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाया जाएगा। दूसरा समझौता नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और घाना के CSIR-क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट के बीच हुआ। इसका उद्देश्य कृषि अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाना है। इन समझौतों से शोधकर्ताओं और शिक्षण संस्थानों के बीच संपर्क बढ़ाने तथा कृषि और विज्ञान से जुड़े अनुभव साझा करने के अवसर मिल सकते हैं।

राष्ट्रपति महामा से भी मिले जयशंकर, मोदी की यात्रा का किया जिक्र
घाना के विदेश मंत्री से मुलाकात से पहले जयशंकर ने राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा से भी मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से उन्हें शुभकामनाएं दीं। जयशंकर ने एक्स पर लिखा कि राष्ट्रपति महामा से मिलना उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि पिछले साल प्रधानमंत्री मोदी की ऐतिहासिक यात्रा के बाद भारत और घाना की साझेदारी को नई गति मिली है। विदेश मंत्री ने घाना के विकास को लेकर राष्ट्रपति महामा की सोच की सराहना की और अलग-अलग क्षेत्रों में व्यापक साझेदारी को और मजबूत करने की उनकी सकारात्मक पहल का स्वागत किया।

तीन दशक बाद घाना पहुंचे थे भारत के प्रधानमंत्री मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जुलाई 2025 में घाना की यात्रा की थी। यह उनकी घाना की पहली द्विपक्षीय यात्रा थी। साथ ही, करीब तीन दशक बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने घाना का दौरा किया था। इस यात्रा को दोनों देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना गया। इसके बाद भारत और घाना ने अपनी साझेदारी को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं। जयशंकर की मौजूदा यात्रा को भी इसी सिलसिले में अहम माना जा रहा है।

पर्यावरण संरक्षण का संदेश, लगाया प्लूमेरिया का पौधा
जयशंकर ने घाना के विदेश मंत्री और शिक्षा मंत्री हारुना इद्रिसु के साथ मिलकर प्लूमेरिया का पौधा भी लगाया। यह पहल भारत के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान और घाना के ‘ट्री फॉर लाइफ’ कार्यक्रम से जुड़ी थी। जयशंकर ने इसे सतत विकास के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया। इस पहल के जरिए पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य के निर्माण का संदेश भी दिया गया।


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घाना के बाद आइवरी कोस्ट और इथियोपिया जाएंगे जयशंकर
घाना की यात्रा पूरी करने के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर कोट डी आइवर (आइवरी कोस्ट) और इथियोपिया जाएंगे। तीनों देशों के दौरे के दौरान वह अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और वहां के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में भारत के साथ मित्रता और सहयोग से जुड़े संबंधों की समीक्षा की जाएगी। साथ ही, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान भी होगा। भारत की इस पहल का व्यापक उद्देश्य अफ्रीकी देशों के साथ साझेदारी को मजबूत करना और साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर मिलकर आगे बढ़ना है।

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