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UNSC सीट के लिए भारत का मिशन शुरू: जयशंकर बोले- काटेंगे आतंक की जड़; AI को लेकर दुनिया के सामने रखा ब्लूप्रिंट

Tue, 14 Jul 2026 07:59 AM IST
प्रशांत तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत तिवारी Updated Tue, 14 Jul 2026 07:59 AM IST
सार

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में 2028-29 के अस्थायी सदस्य पद के लिए भारत ने अपना एजेंडा पेश किया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत आतंकवाद की फंडिंग पर रोक, समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने और AI के जिम्मेदार व मानव-केंद्रित उपयोग को प्राथमिकता देगा। उन्होंने AI के लिए MANAV फ्रेमवर्क और 'AI for All' की सोच को भी दुनिया के सामने रखा।

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India mission for UNSC seat begins Jaishankar vows to root out terror presents blueprint on AI to world
विदेश मंत्री एस. जयशंकर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में 2028-29 कार्यकाल के लिए अस्थायी सदस्य बनने की दावेदारी के तहत भारत ने अपना स्पष्ट एजेंडा दुनिया के सामने रखा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भारत के अभियान की शुरुआत करते हुए कहा कि यदि भारत को सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्य चुना जाता है, तो वह आतंकवाद की फंडिंग पर रोक लगाने, समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी उभरती तकनीकों के जिम्मेदार एवं मानव-केंद्रित उपयोग को अपनी प्राथमिकता बनाएगा।

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आतंकवाद की जड़ पर वार क्यों जरूरी है?
जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद आज भी दुनिया के सामने सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब तक दुनिया आतंकवाद के केवल लक्षणों से लड़ती रही है, जबकि स्थायी समाधान तभी संभव है जब आतंकियों की आर्थिक और वित्तीय ताकत को खत्म किया जाए। उन्होंने आगे कहा कि हमारी प्रतिबद्धता आतंकवाद के वित्तपोषण पर प्रभावी रोक लगाने की है। साथ ही हम आतंकवादी संगठनों को सूचीबद्ध करने के लिए वस्तुनिष्ठ और ठोस साक्ष्यों पर आधारित प्रस्तावों को बढ़ावा देंगे। 
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समुद्री सुरक्षा भारत की प्राथमिकता क्यों बनी?
विदेश मंत्री ने कहा कि आज वैश्विक अर्थव्यवस्था आपूर्ति श्रृंखलाओं (सप्लाई चेन) के जरिए एक-दूसरे से जुड़ी हुई है। ऐसे में समुद्री व्यापार का सुरक्षित और निर्बाध संचालन पूरी दुनिया के हित में है। हाल की घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
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अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन सुनिश्चित करना इस दिशा में पहली आवश्यकता है। साथ ही समुद्री डकैती (पाइरेसी) जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए सक्षम देशों को मिलकर काम करना होगा, ताकि वैश्विक समुद्री व्यापार बिना किसी बाधा के चलता रहे।

भारत समुद्री सुरक्षा में क्या योगदान दे रहा है?
जयशंकर ने कहा कि भारत लंबे समय से समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाता रहा है। खोज एवं बचाव अभियान, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत, क्षमता निर्माण और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा करना भारत की प्रमुख पहलों का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारत का इंटरनेशनल फ्यूजन सेंटर पूरे हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोगी नेटवर्क का संचालन कर रहा है। भारत यह सुनिश्चित करेगा कि समुद्री सुरक्षा से जुड़े इन मुद्दों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी उचित महत्व मिले।

AI को लेकर भारत का दृष्टिकोण क्या है?
उभरती तकनीकों का उल्लेख करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) अवसरों के साथ-साथ नई चुनौतियां भी लेकर आई है। इसलिए इसके उपयोग के लिए मानव-केंद्रित और जिम्मेदार शासन व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने बताया कि भारत ने AI के लिए MANAV फ्रेमवर्क प्रस्तावित किया है। इसका अर्थ है Moral and Ethical Systems (नैतिक एवं आचार आधारित व्यवस्था), Accountable Governance (जवाबदेह शासन), National Sovereignty (राष्ट्रीय संप्रभुता), Accessible and Inclusive (सभी के लिए सुलभ एवं समावेशी व्यवस्था) तथा Valid and Legitimate Systems (वैध और विश्वसनीय प्रणाली)।


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डिजिटल डिवाइड और AI के दुरुपयोग पर भारत की क्या सोच है?
जयशंकर ने कहा कि भारत ने दुनिया में डिजिटल डिवाइड को कम करने की दिशा में लगातार योगदान दिया है और AI के क्षेत्र में भी उसकी सोच समान रूप से समावेशी है। इसी उद्देश्य से हाल ही में भारत में आयोजित AI Impact Summit की थीम 'AI for All' रखी गई थी। उन्होंने कहा कि भारत यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि AI का लाभ सभी देशों और समाजों तक पहुंचे। साथ ही भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दुरुपयोग और उससे अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा को पैदा होने वाले खतरों का भी प्रभावी ढंग से मुकाबला करेगा।

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