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क्या इस्राइल के संपर्क में थे ईरान के पूर्व राष्ट्रपति?: रिपोर्ट में दावा- सत्ता में वापसी के लिए रची थी साजिश

Tue, 14 Jul 2026 09:38 AM IST
प्रशांत तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत तिवारी Updated Tue, 14 Jul 2026 09:38 AM IST
सार

न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद को कथित तौर पर आईआरजीसी ने नजरबंद कर दिया है। दावा है कि वह मोसाद के संपर्क में थे और अमेरिका-इस्राइल उन्हें दोबारा सत्ता में लाना चाहते थे। हालांकि, इन दावों की ईरान की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

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Was ex Iranian President Mahmoud Ahmadinejad in contact with Israel Report claims he hatched plot return power
ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद को कथित तौर पर नजरबंद कर दिया गया है। अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में चार ईरानी अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की खुफिया शाखा ने उन्हें हिरासत में लेकर नजरबंद किया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस्राइल की खुफिया एजेंसी मोसाद द्वारा संचालित एक सुरक्षित ठिकाने से बाहर आने के बाद यह कार्रवाई की गई। दावा किया गया है कि  इस्राइल की ओर से मौजूदा इस्लामी शासन की जगह अहमदीनेजाद को सत्ता में लाने की कथित योजना विफल होने के बाद उन्हें नजरबंद किया गया।

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सार्वजनिक जीवन से अचानक क्यों गायब हो गए थे अहमदीनेजाद?
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सप्ताह से पहले अहमदीनेजाद 28 फरवरी को शुरू हुए 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के दौरान उनके आवास पर हुए इस्राइली हवाई हमले के बाद सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए थे। द न्यूयॉर्क टाइम्स ने अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के हवाले से दावा किया कि हमले के बाद उन्हें एक सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया था। हालांकि, पिछले सप्ताह वह ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में सुरक्षा घेरे के बीच दिखाई दिए।
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अमेरिका और इस्राइल उन्हें सत्ता में क्यों लाना चाहते थे?
रिपोर्ट के अनुसार, द न्यूयॉर्क टाइम्स ने मई में भी दावा किया था कि अमेरिका और इस्राइल अहमदीनेजाद को दोबारा सत्ता में लाने की संभावनाओं पर विचार कर रहे थे। अहमदीनेजाद 2005 से 2013 तक ईरान के राष्ट्रपति रहे। अपने कार्यकाल में उन्होंने खुले तौर पर होलोकॉस्ट से इनकार किया, इस्राइल के अस्तित्व को समाप्त करने की बात कही और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को फिर से गति दी। बाद के वर्षों में उनका टकराव ईरान के मौजूदा धार्मिक नेतृत्व से बढ़ता गया और उन्हें 2017, 2021 तथा 2024 के राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की अनुमति भी नहीं मिली।
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क्या सत्ता छोड़ने के बाद उनकी विचारधारा बदल गई थी?
रिपोर्ट में फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के वरिष्ठ विश्लेषक बेहनाम बेन तालेब्लू के हवाले से कहा गया है कि सत्ता छोड़ने के बाद अहमदीनेजाद ने राष्ट्रवाद, जनवाद और इस्लामवाद का ऐसा मिश्रण तैयार किया, जिसने ईरान की मौजूदा व्यवस्था के लिए वैचारिक और सामाजिक चुनौती पैदा की। वहीं, रिपोर्ट के मुताबिक अहमदीनेजाद ने अपने करीबी लोगों से कहा था कि वह रूस के पूर्व राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन की तरह खुद को एक सुधारवादी नेता के रूप में देखते हैं और यदि दोबारा सत्ता में आए तो इस्राइल के साथ संबंध सामान्य करने पर भी विचार कर सकते हैं।

क्या मोसाद से गुप्त संपर्क बनाए गए थे?
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अहमदीनेजाद ने वर्ष 2023 में ग्वाटेमाला में आयोजित एक पर्यावरण सम्मेलन के दौरान पहली बार इस्राइली खुफिया एजेंसी मोसाद से संपर्क किया। बताया गया कि यात्रा से पहले उन्हें तेहरान एयरपोर्ट पर रोक दिया गया था, जिसके विरोध में उन्होंने कई घंटे धरना भी दिया। इसके बाद वर्ष 2024 में उन्हें हंगरी की लुडोविका यूनिवर्सिटी ऑफ पब्लिक सर्विस में आयोजित जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में आमंत्रित किया गया। विश्वविद्यालय के रेक्टर गेर्गेली डेली ने दावा किया कि यह निमंत्रण हंगरी सरकार के एक अधिकारी के अनुरोध पर दिया गया था ताकि अहमदीनेजाद और इस्राइली अधिकारियों की मुलाकात हो सके।


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बुडापेस्ट की बैठक में क्या हुआ था?
रिपोर्ट के अनुसार, बुडापेस्ट में हुई इस कथित बैठक में उस समय के मोसाद प्रमुख डेविड बार्निया भी मौजूद थे। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया कि इस्राइल ने अहमदीनेजाद के यात्रा और ठहरने के कुछ खर्च भी उठाए। हालांकि, उनके पूर्व सलाहकार अब्दोलरेज़ा दावरी ने इस आरोप को अलग नजरिए से देखा। उन्होंने कहा कि अहमदीनेजाद ऐसा किसी आर्थिक लाभ के लिए नहीं कर सकते थे। उनके पास पर्याप्त संसाधन और मजबूत आर्थिक नेटवर्क पहले से मौजूद है। दावरी के मुताबिक, उनका उद्देश्य केवल सत्ता में वापसी करना था और वह फिर से ईरान की सत्ता के शीर्ष पर पहुंचना चाहते थे।

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