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India-US Ties: 'दोनों देशों के रिश्तों में विश्वास की कमी', विशेषज्ञ बोले- भरोसा फिर से बहाल करने की जरूरत

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: Shubham Kumar Updated Fri, 24 Apr 2026 03:19 PM IST
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सार

वॉशिंगटन के हडसन इंस्टीट्यूट में आयोजित न्यू इंडिया कॉन्फ्रेंस में भारत और अमेरिका के संबंधों पर गहन चर्चा हुई। जहां विशेषज्ञों ने माना कि भारत और अमेरिका के बीच रिश्तों में विश्वास की कमी एक बड़ी चुनौती बन गई है। इसके साथ ही दोनों देश एक दूसरे की मजबूरियां नहीं समझ पा रहें।

India-US Ties Lack of Trust in Relations Between the Countries Experts Say Trust Needs to Be reset
भारत अमेरिका संबंध - फोटो : FreePik
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विस्तार

अमेरिका के हडसन इंस्टीट्यूट में आयोजित न्यू इंडिया कॉन्फ्रेंस में भारत और अमेरिका के संबंधों पर बड़ी चर्चा हुई। इसमें विशेषज्ञों ने कहा कि दोनों देशों के बीच आपसी भरोसे की कमी अब सबसे बड़ी समस्या बनकर सामने आई है, हालांकि सहयोग अभी भी जारी है। इसी क्रम में पैनल चर्चा में मौजूद वक्ता राम माधव ने कहा कि पहले भारत और अमेरिका के रिश्ते ज्यादा मजबूत और तालमेल वाले थे, लेकिन अब दोनों देशों के बीच भरोसा कम हुआ है। उन्होंने कहा कि इस भरोसे को फिर से बनाने की जरूरत है। पैनल ने कहा कि यह रिश्ता भले ही मजबूत है, लेकिन एक मुश्किल दौर से गुजर रहा है, जिसमें उम्मीदों का मेल न खाना, नीतियों में अनिश्चितता और काम की धीमी गति जैसी दिक्कतें हैं।

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'दोनों देश एक दूसरे की मजबूरियों को नहीं समझते'
दूसरी ओर स्टिमसन सेंटर की एलिजाबेथ थ्रेलकेल्ड ने बताया कि दोनों देश एक-दूसरे की मजबूरियों को सही तरीके से नहीं समझते। उन्होंने कहा कि हर देश दूसरे की सीमाओं को उसकी पसंद मानता है, जबकि अपनी सीमाओं को मजबूरी बताता है। उन्होंने सलाह दी कि दोनों देशों को अपने साझा हितों पर ईमानदारी से फिर से काम करना चाहिए।
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यह तनाव भावनात्मक स्तर पर भी असर डाल रहा- कैंपबेल
इसके साथ ही अमेरिका के पूर्व उप विदेश मंत्री कर्ट कैंपबेल ने कहा कि यह तनाव सिर्फ नीतियों का नहीं, बल्कि भावनात्मक स्तर पर भी असर डाल रहा है। उन्होंने कहा कि इससे भारतीय पक्ष में गहरी नाराजगी और निराशा देखने को मिल रही है। चर्चा में यह भी सामने आया कि व्यापार, रक्षा सहयोग और नीतिगत तालमेल जैसे मुद्दों पर अभी भी कई रुकावटें हैं। अलग-अलग राजनीतिक सिस्टम और सरकारी प्रक्रियाओं की वजह से फैसले लेने में देरी होती है।

भारत-मध्य पूर्व-यूरोप गलियारा के फिर से सक्रिय होने की जरूरत
हालांकि, दूसरी ओर विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और खासकर आर्थिक क्षेत्र में सहयोग के कई मौके अभी भी मौजूद हैं। ऐसे में राम माधव ने बताया कि भारत टैरिफ और ऊर्जा आयात जैसे मुद्दों पर लचीलापन दिखा रहा है और एक संभावित व्यापार समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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उन्होंने यह भी कहा कि भारत-मध्य पूर्व-यूरोप गलियारा और I2U2 जैसी पहलों को फिर से सक्रिय करने की जरूरत है। विशेषज्ञों ने माना कि इस रिश्ते को मजबूत बनाए रखने के लिए लगातार राजनीतिक ध्यान और नई प्राथमिकताओं के साथ तालमेल जरूरी है, खासकर ऐसे समय में जब दुनिया में कई बड़े संकट चल रहे हैं।

पिछले 20 साल में भारत-अमेरिका रिश्ता
गौरतलब है कि पिछले 20 वर्षों में भारत-अमेरिका साझेदारी रक्षा, व्यापार और तकनीक जैसे क्षेत्रों में काफी आगे बढ़ी है, लेकिन हाल के वैश्विक बदलावों और नीतिगत मतभेदों ने कुछ कमजोरियों को उजागर किया है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत-अमेरिका संबंध अभी मजबूत हैं, लेकिन भविष्य में इन्हें और बेहतर बनाने के लिए आपसी भरोसा फिर से कायम करना सबसे जरूरी होगा।

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