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Pakistan: दुनिया का चौधरी बनने के चक्कर में अपने लोगों पर जुल्म कर रहा PAK, लोग घरों में कैद रहने को मजबूर
पीटीआई, इस्लामाबाद
Published by: Nitin Gautam
Updated Fri, 24 Apr 2026 12:29 PM IST
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सार
पाकिस्तान का नेतृत्व अपने नागरिकों के प्रति किस कदर संवेदनहीन है, उसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिका और ईरान की बातचीत की मेजबानी करने के लिए पाकिस्तान अपने ही नागरिकों को परेशान कर रहा है। आइए जानते हैं कैसे..
पाकिस्तानी नेतृत्व ने अपनी ही जनता को किया परेशान
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पाकिस्तान, ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम की बातचीत की मेजबानी कर रहा है। पाकिस्तान की मेजबानी में पहले दौर की बातचीत बेनतीजा रही थी और दूसरे दौर की बातचीत पर संशय के बादल हैं। हालांकि इस पूरे चक्कर में सबसे ज्यादा परेशानी पाकिस्तान के लोगों को उठानी पड़ रही है। दरअसल पाकिस्तान चौधरी बनने के चक्कर में अपने ही नागरिकों को परेशान कर रहा है। अमेरिका और ईरान की दूसरे दौर की बातचीत कब होगी, ये फिलहाल तय नहीं है, लेकिन पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अभी भी भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक जारी रही है।
अमेरिका ईरान की बातचीत के लिए शहर बंद किए
इस्लामाबाद और रावलपिंडी में रविवार को ही वीवीआईपी मूवमेंट की आशंका के मद्देनजर सभी प्रमुख सड़कों और बाजारों को बंद कर दिया था। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 10,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। हालांकि, करीब एक सप्ताह होने के बावजूद नेताओं के आगमन का कोई आधिकारिक कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया है। बातचीत पर अनिश्चितता बरकरार रहने के कारण नूर खान एयरबेस के आसपास के इलाकों को खोलने, मेट्रो बस, इलेक्ट्रिक बस सेवाओं और माल परिवहन बहाल करने पर अभी फैसला नहीं लिया गया है।
हवाई अड्डे के आसपास की सड़कें, लिंक रोड, बाजार और बैंक पिछले पांच दिनों से बंद हैं, जिससे शाह फैसल कॉलोनी, खालिद कॉलोनी, गुलजार-ए-कायद, फजल टाउन समेत कई इलाकों के लोग घरों में कैद रहने को मजबूर हैं। रावलपिंडी और इस्लामाबाद के बीच मेट्रो बस सेवा और सात रूटों पर चलने वाली इलेक्ट्रिक बसें निलंबित हैं, जबकि 19 अप्रैल से माल परिवहन भी ठप है, जिससे आम जनता को भारी परेशानी हो रही है।
कर्मचारी घरों से काम कर रहे, कॉलेज बंद
रेड जोन इलाके अब भी बंद है और वहां स्थित दफ्तरों के कर्मचारी घर से काम करने पर मजबूर हैं। रावलपिंडी के कुछ हिस्सों में भारी वाहनों को आंशिक अनुमति दी गई है, लेकिन इस्लामाबाद में ट्रक और बसों का प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित है। इससे दोनों शहरों के व्यापारिक प्रतिष्ठान बुरी तरह से प्रभावित हैं। स्कूल और कॉलेज खुले हैं, लेकिन विश्वविद्यालयों ने ऑनलाइन कक्षाएं शुरू कर दी हैं। वार्ता की शुरुआत को लेकर अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। 11 और 12 अप्रैल को इस्लामाबाद में हुई अमेरिका-ईरान वार्ता का पहला दौर बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई थी।
दूसरे दौर की बातचीत पर अनिश्चितता के बादल
बुधवार को न्यूयॉर्क पोस्ट ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हवाले से कहा कि वार्ता का दूसरा दौर शुक्रवार तक हो सकता है। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा है कि तेहरान ने अभी नई वार्ता में शामिल होने पर कोई फैसला नहीं लिया है। इससे पहले मंगलवार को ट्रंप ने ईरान के साथ दो सप्ताह के संघर्षविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया, ताकि तेहरान को युद्ध समाप्त करने के लिए एक संयुक्त प्रस्ताव तैयार करने का समय मिल सके।
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अमेरिका ईरान की बातचीत के लिए शहर बंद किए
इस्लामाबाद और रावलपिंडी में रविवार को ही वीवीआईपी मूवमेंट की आशंका के मद्देनजर सभी प्रमुख सड़कों और बाजारों को बंद कर दिया था। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 10,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। हालांकि, करीब एक सप्ताह होने के बावजूद नेताओं के आगमन का कोई आधिकारिक कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया है। बातचीत पर अनिश्चितता बरकरार रहने के कारण नूर खान एयरबेस के आसपास के इलाकों को खोलने, मेट्रो बस, इलेक्ट्रिक बस सेवाओं और माल परिवहन बहाल करने पर अभी फैसला नहीं लिया गया है।
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हवाई अड्डे के आसपास की सड़कें, लिंक रोड, बाजार और बैंक पिछले पांच दिनों से बंद हैं, जिससे शाह फैसल कॉलोनी, खालिद कॉलोनी, गुलजार-ए-कायद, फजल टाउन समेत कई इलाकों के लोग घरों में कैद रहने को मजबूर हैं। रावलपिंडी और इस्लामाबाद के बीच मेट्रो बस सेवा और सात रूटों पर चलने वाली इलेक्ट्रिक बसें निलंबित हैं, जबकि 19 अप्रैल से माल परिवहन भी ठप है, जिससे आम जनता को भारी परेशानी हो रही है।
कर्मचारी घरों से काम कर रहे, कॉलेज बंद
रेड जोन इलाके अब भी बंद है और वहां स्थित दफ्तरों के कर्मचारी घर से काम करने पर मजबूर हैं। रावलपिंडी के कुछ हिस्सों में भारी वाहनों को आंशिक अनुमति दी गई है, लेकिन इस्लामाबाद में ट्रक और बसों का प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित है। इससे दोनों शहरों के व्यापारिक प्रतिष्ठान बुरी तरह से प्रभावित हैं। स्कूल और कॉलेज खुले हैं, लेकिन विश्वविद्यालयों ने ऑनलाइन कक्षाएं शुरू कर दी हैं। वार्ता की शुरुआत को लेकर अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। 11 और 12 अप्रैल को इस्लामाबाद में हुई अमेरिका-ईरान वार्ता का पहला दौर बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई थी।
दूसरे दौर की बातचीत पर अनिश्चितता के बादल
बुधवार को न्यूयॉर्क पोस्ट ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हवाले से कहा कि वार्ता का दूसरा दौर शुक्रवार तक हो सकता है। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा है कि तेहरान ने अभी नई वार्ता में शामिल होने पर कोई फैसला नहीं लिया है। इससे पहले मंगलवार को ट्रंप ने ईरान के साथ दो सप्ताह के संघर्षविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया, ताकि तेहरान को युद्ध समाप्त करने के लिए एक संयुक्त प्रस्ताव तैयार करने का समय मिल सके।
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