Terrorism: भारत-अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाने पर की चर्चा, US अधिकारी से राजदूत क्वात्रा की मुलाकात
भारत राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने अमेरिकी काउंटर-टेररिज्म अधिकारी सेबेस्टियन गोरका से मुलाकात कर वैश्विक आतंकवाद के खतरों और दोनों देशों के सहयोग पर चर्चा की। बैठक में आतंकवादी संगठनों के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई, 26/11 हमले के दोषियों को न्याय दिलाने और सीमा-पार आतंकवाद रोकने पर जोर दिया गया।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
Had an engaging conversation with @SebGorka Deputy Assistant to the President & Senior Director for Counterterrorism, National Security Council.
विज्ञापनविज्ञापन
We shared perspectives on the threats of terrorism, and our counter-terrorism cooperation outlined in India-USA Joint Statement of… pic.twitter.com/lBGewwyrzuविज्ञापन Trending Videos— Amb Vinay Mohan Kwatra (@AmbVMKwatra) June 7, 2026
यह भी पढ़ें- US-Israel Relations: ट्रंप-नेतन्याहू में बढ़ती दूरियां, पेंटागन को इस्राइली जासूसी का डर
पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप जता चुके हैं प्रतिबद्धता
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ने की प्रतिबद्धता जताई थी। दोनों नेताओं ने साफ कहा था कि दुनिया के किसी भी हिस्से में आतंकवाद को पनपने नहीं दिया जाएगा और आतंकियों के सुरक्षित ठिकानों को खत्म करना जरूरी है।
आतंकी संगठनों से मिलकर निपटने पर दिया गया जोर
संयुक्त बयान में अल-कायदा, आईएसआईएस, जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों से मिलकर निपटने पर जोर दिया गया। साथ ही 26/11 मुंबई हमले और अफगानिस्तान के एबी गेट बम धमाके जैसी घटनाओं को दोबारा रोकने के लिए सहयोग बढ़ाने की बात कही गई।
यह भी पढ़ें- OPEC: तेल आपूर्ति संकट के बीच बड़ा कदम, हर दिन 1.88 लाख बैरल तेल उत्पादन बढ़ाएंगे ओपेक प्लस देश
दोनों देशों ने कई अहम मुद्दों पर जताई थी सहमति
अमेरिका ने 2008 मुंबई हमले के आरोपी तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण का भी एलान किया था। इसके अलावा भारत और अमेरिका ने पाकिस्तान से भी मांग की थी कि वह 26/11 मुंबई हमला और 2016 पठानकोट एयरबेस हमले के दोषियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई करे और अपनी जमीन का इस्तेमाल आतंकवाद के लिए न होने दे। दोनों देशों ने यह भी तय किया कि वे मिलकर ऐसे खतरनाक हथियारों के फैलाव को रोकेंगे, ताकि ये आतंकियों या गैर-राज्य तत्वों के हाथ न लग सकें।