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US-ईरान शांति वार्ता अधूरी: विदेश मंत्री अब्बास अराघची बोले-अंतिम फैसले से पहले कयासों की गुंजाइश नहीं

एएनआई, तेहरान। Published by: राकेश कुमार Updated Mon, 01 Jun 2026 02:26 AM IST
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सार

अमेरिका और ईरान के बीच 'लगभग फाइनल' हो चुका समझौता डोनाल्ड ट्रंप की नई और सख्त शर्तों के कारण फिर से लटक गया है। ईरान ने साफ कर दिया है कि अंतिम फैसले से पहले आ रहे बयान महज कयासबाजी हैं और वह अपने अधिकारों की गारंटी के बिना किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगा। 

iran foreign minister abbas araghchi says no room for speculation in talks with us
अब्बास अराघची, ईरान के विदेश मंत्री - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही पर्दे के पीछे की बातचीत अब एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गई है। दोनों देशों के बीच जारी गतिरोध के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक बड़ा खुलासा किया है। अराघची ने कहा कि तमाम अड़चनों के बावजूद ईरान और अमेरिका के बीच संवाद और संदेशों का आदान-प्रदान लगातार जारी है।


ईरानी समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि जब तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच जाते, तब तक कोई भी फैसला करना मुमकिन नहीं है। उन्होंने कहा कि इस वक्त जो भी बातें कही जा रही हैं, वे सिर्फ कयासबाजी हैं। जब तक सब कुछ पूरी तरह तय नहीं हो जाता, तब तक इन बातों को गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए।
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ट्रंप की नई शर्तों से अटका समझौता
यह गुप्त बातचीत ऐसे समय में हो रही है, जब अमेरिका में सियासी मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। महज सात दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते को 'लगभग अंतिम' रूप देने की बात कही थी। लेकिन अब खबर आ रही है कि उन्होंने इस मसौदे को कुछ बदलावों के लिए वापस भेज दिया है। ट्रंप के इस कदम ने बातचीत को लंबा खींच दिया है और विवाद को खत्म करने की कोशिशों पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं।
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सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने अपने सलाहकारों के साथ बैठक में ईरान के परमाणु दायित्वों को लेकर और कड़े रुख की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते को खुला रखने के लिए बेहद सख्त शर्तें जोड़ने को कहा है। ट्रंप इस बात को लेकर भी चिंतित हैं कि समझौते के तहत ईरान को कितनी आर्थिक मदद मिलेगी। वह ओबामा प्रशासन के समय हुए परमाणु समझौते जैसी उदारता दोहराने से बचना चाहते हैं, जिसकी वे हमेशा आलोचना करते रहे हैं।

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दोनों देशों में भारी असहमति और अविश्वास
ट्रंप का यह बदला हुआ रुख हैरान करने वाला है। एक हफ्ते पहले ही उन्होंने युद्ध खत्म होने की उम्मीद जताई थी। अमेरिकी अधिकारियों को भरोसा था कि यह समझौता विवाद को रोकने, समुद्री मार्ग को सुरक्षित बनाने और ईरान के परमाणु बुनियादी ढांचे पर आगे की बातचीत का रास्ता साफ करेगा। लेकिन व्हाइट हाउस में हुई दो घंटे की अहम बैठक बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई।

सार्वजनिक बयानों ने दोनों पक्षों के बीच के मतभेदों को सामने ला दिया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि अमेरिका ईरान के समृद्ध यूरेनियम के भंडार को जब्त कर उसे नष्ट कर देगा। इसके उलट, तेहरान का कहना है कि वह मौजूदा बातचीत में अपने परमाणु ढांचे को लेकर कोई समझौता नहीं कर रहा है। ईरान पैसे के लेनदेन के बिना किसी समझौते के हक में नहीं है, जबकि ट्रंप वित्तीय लेन-देन के खिलाफ हैं। इस बीच, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने भी चेतावनी दी है कि जब तक ईरान के अधिकारों की गारंटी नहीं मिलती, संसद किसी भी समझौते को मंजूरी नहीं देगी। उन्होंने कहा कि हमें वादे नहीं, जमीन पर ठोस नतीजे चाहिए। अमेरिकी सीनेटर क्रिस कून्स ने भी माना कि ट्रंप की शर्तें कागजों पर तो ठीक हैं, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे मामलों में इन्हें लागू करना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा।
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