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'मूर्ख की ताकत खत्म हो गई': US-ईरान के बीच जुबानी जंग तेज, ट्रंप के किस दावे का ईरानी मीडिया ने उड़ाया मजाक?
Mon, 03 Aug 2026 07:28 AM IST
Devesh Tripathi
एएनआई, तेहरान
एएनआई, तेहरान
Published by: Devesh Tripathi
Updated Mon, 03 Aug 2026 07:28 AM IST
सार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई टालने की घोषणा के बाद दोनों देशों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। ट्रंप ने दावा किया कि क्षेत्रीय देशों के अनुरोध और एक संभावित समझ के कारण यह फैसला लिया गया, लेकिन ईरान ने ऐसे किसी अनुरोध से इनकार किया।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI
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विस्तार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर संभावित सैन्य हमले को अस्थायी रूप से टालने की घोषणा के बाद ईरानी मीडिया ने उन पर तीखा हमला बोला और उनका मजाक उड़ाया। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में दावा किया कि यह फैसला क्षेत्र के कुछ देशों के अनुरोध के बाद लिया गया।
डोनाल्ड ट्रंप ने लिखा, "ईरान और अन्य पश्चिम एशियाई देशों ने हमसे किसी भी हमले को रोकने का अनुरोध किया है, क्योंकि समझौते की रूपरेखा पर सहमति बन गई है।" उन्होंने यह भी कहा कि इस समझ के तहत "होर्मुज जलडमरूमध्य को तत्काल, पूरी तरह और पूर्ण रूप से खोल दिया जाएगा।"
ईरान ने ट्रंप पर तंज कसते हुए क्या कहा?
वहीं, ईरान के सरकारी मीडिया में ऐसी कोई खबर नहीं आई, जिसमें सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए किसी अनुरोध की पुष्टि की गई हो या होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तेहरान के रुख में किसी बदलाव का संकेत दिया गया हो। इसके बजाय ईरानी समाचार एजेंसियों ने इस घटनाक्रम को अमेरिका के पीछे हटने के रूप में पेश किया।
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अर्द्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स ने इस खबर को प्रकाशित करते हुए लिखा, "मूर्ख ट्रंप की ताकत खत्म हो गई है।" वहीं, अर्द्ध-सरकारी समाचार एजेंसी मेहर ने इस दावे को खारिज किया कि तेहरान ने हमले रोकने का अनुरोध किया था। एजेंसी ने लिखा, "ट्रंप एक बार फिर अपनी खोखली धमकियों से पीछे हट गए और दुनिया के सामने अपनी वापसी को एक एहसान की तरह पेश किया।"
क्या खत्म हो गए अमेरिका के हथियार?
मेहर ने सैन्य अधिकारियों के हवाले से ट्रंप के बयान को "एक और झूठ" करार दिया। एजेंसी ने कहा कि ईरानी सशस्त्र बल "पूरी तरह सतर्क हैं और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं।" ईरानी मीडिया ने पश्चिमी मीडिया की उन खबरों का भी हवाला दिया, जिनमें अमेरिकी वायु रक्षा मिसाइलों के भंडार में कमी की बात कही गई है। अर्द्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम ने दावा किया कि यही कमी "ईरान पर हमला रोकने के डोनाल्ड ट्रंप के फैसले के प्रमुख कारणों में से एक है।"
तेहरान की प्रतिक्रिया के बावजूद ट्रंप ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस से बातचीत के बाद कहा कि अमेरिकी सेना "पूरी तरह तैयार है और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के खिलाफ कार्रवाई के लिए तत्पर है।" उन्होंने दोहराया कि "ईरान और अन्य पश्चिम एशियाई देशों ने हमसे किसी भी हमले को रोकने का अनुरोध किया है।"
अब तक क्या हुआ?
यह कूटनीतिक घटनाक्रम पांच महीने से अधिक समय से जारी सैन्य टकराव के बीच सामने आया है। यह संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इस्राइल ने तेहरान पर हमले शुरू किए थे। अब तक इस संघर्ष का कोई स्पष्ट समाधान नहीं निकल पाया है।
संघर्ष तेज होने के बाद वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी आ गई है। इससे पहले युद्धविराम के दौरान कीमतों में आई अस्थायी गिरावट अब समाप्त हो चुकी है। यह घटनाक्रम अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनावों से लगभग तीन महीने पहले सामने आया है, जिससे ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के लिए राजनीतिक चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
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डोनाल्ड ट्रंप ने लिखा, "ईरान और अन्य पश्चिम एशियाई देशों ने हमसे किसी भी हमले को रोकने का अनुरोध किया है, क्योंकि समझौते की रूपरेखा पर सहमति बन गई है।" उन्होंने यह भी कहा कि इस समझ के तहत "होर्मुज जलडमरूमध्य को तत्काल, पूरी तरह और पूर्ण रूप से खोल दिया जाएगा।"
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ईरान ने ट्रंप पर तंज कसते हुए क्या कहा?
वहीं, ईरान के सरकारी मीडिया में ऐसी कोई खबर नहीं आई, जिसमें सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए किसी अनुरोध की पुष्टि की गई हो या होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तेहरान के रुख में किसी बदलाव का संकेत दिया गया हो। इसके बजाय ईरानी समाचार एजेंसियों ने इस घटनाक्रम को अमेरिका के पीछे हटने के रूप में पेश किया।
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अर्द्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स ने इस खबर को प्रकाशित करते हुए लिखा, "मूर्ख ट्रंप की ताकत खत्म हो गई है।" वहीं, अर्द्ध-सरकारी समाचार एजेंसी मेहर ने इस दावे को खारिज किया कि तेहरान ने हमले रोकने का अनुरोध किया था। एजेंसी ने लिखा, "ट्रंप एक बार फिर अपनी खोखली धमकियों से पीछे हट गए और दुनिया के सामने अपनी वापसी को एक एहसान की तरह पेश किया।"
क्या खत्म हो गए अमेरिका के हथियार?
मेहर ने सैन्य अधिकारियों के हवाले से ट्रंप के बयान को "एक और झूठ" करार दिया। एजेंसी ने कहा कि ईरानी सशस्त्र बल "पूरी तरह सतर्क हैं और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं।" ईरानी मीडिया ने पश्चिमी मीडिया की उन खबरों का भी हवाला दिया, जिनमें अमेरिकी वायु रक्षा मिसाइलों के भंडार में कमी की बात कही गई है। अर्द्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम ने दावा किया कि यही कमी "ईरान पर हमला रोकने के डोनाल्ड ट्रंप के फैसले के प्रमुख कारणों में से एक है।"
तेहरान की प्रतिक्रिया के बावजूद ट्रंप ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस से बातचीत के बाद कहा कि अमेरिकी सेना "पूरी तरह तैयार है और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के खिलाफ कार्रवाई के लिए तत्पर है।" उन्होंने दोहराया कि "ईरान और अन्य पश्चिम एशियाई देशों ने हमसे किसी भी हमले को रोकने का अनुरोध किया है।"
अब तक क्या हुआ?
यह कूटनीतिक घटनाक्रम पांच महीने से अधिक समय से जारी सैन्य टकराव के बीच सामने आया है। यह संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इस्राइल ने तेहरान पर हमले शुरू किए थे। अब तक इस संघर्ष का कोई स्पष्ट समाधान नहीं निकल पाया है।
- इससे पहले भी युद्धविराम की एक रूपरेखा बनी थी, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने जैसी शर्तें शामिल थीं।
- हालांकि, वह व्यवस्था टूट गई और हाल के सप्ताहों में दोनों पक्षों के बीच हमले दोबारा शुरू होने के बाद ईरान ने इस अहम समुद्री मार्ग पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली।
- फार्स ने ईरानी वार्ताकारों के करीबी एक सूत्र के हवाले से कहा कि "जब तक अमेरिका अपनी शत्रुतापूर्ण कार्रवाई जारी रखेगा, तब तक होर्मुज बंद रहेगा।"
संघर्ष तेज होने के बाद वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी आ गई है। इससे पहले युद्धविराम के दौरान कीमतों में आई अस्थायी गिरावट अब समाप्त हो चुकी है। यह घटनाक्रम अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनावों से लगभग तीन महीने पहले सामने आया है, जिससे ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के लिए राजनीतिक चुनौतियां बढ़ सकती हैं।