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UNSC सीट के लिए भारत ने बढ़ाए कदम: यूएन प्रतिनिधिमंडल से सिबी जॉर्ज की अहम मुलाकात, बहुपक्षवाद पर रखा पक्ष
Mon, 03 Aug 2026 08:08 AM IST
राकेश कुमार
एएनआई, यूएन।
एएनआई, यूएन।
Published by: राकेश कुमार
Updated Mon, 03 Aug 2026 08:08 AM IST
सार
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में बहुपक्षवाद, संस्थागत सुधार और ग्लोबल साउथ की मजबूत भागीदारी का समर्थन दोहराया है। 2028-29 के UNSC कार्यकाल के लिए भारत का 'SHANTI' विजन वैश्विक शांति, समुद्री सुरक्षा और समावेशी विकास पर केंद्रित रहेगा।
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सिबी जॉर्ज
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में भारत ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता और वैश्विक नेतृत्व की दावेदारी को एक बार फिर मजबूती से सामने रखा है। विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने भारत दौरे पर आए संयुक्त राष्ट्र के स्थायी प्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल की अगवानी की और उनके सम्मान में रात्रिभोज का आयोजन किया। इस दौरान उन्होंने बहुपक्षवाद, वैश्विक सुधारों और संयुक्त राष्ट्र में भारत की भूमिका को लेकर देश का दृष्टिकोण साझा किया।
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वर्ष 2028-29 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की गैर-स्थायी सदस्यता के लिए भारत की उम्मीदवारी पेश की है। भारत इस कार्यकाल के दौरान वैश्विक शांति, विकास और विकासशील देशों की आवाज को मजबूती देने पर जोर दे रहा है।
'SHANTI' विजन से दुनिया को संदेश
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत की विदेश नीति SHANTI (Securing Holistic Advancement through Norms, Trust and Integrity) के सिद्धांत पर आधारित होगी। इसका उद्देश्य नियमों, विश्वास और ईमानदारी के जरिए समग्र वैश्विक विकास को बढ़ावा देना है। भारत का कहना है कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों का समाधान तभी संभव है, जब बहुपक्षीय संस्थाएं आज की वास्तविकताओं के अनुरूप काम करें और विकासशील देशों, खासकर ग्लोबल साउथ, को उचित प्रतिनिधित्व मिले।
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ग्लोबल साउथ की आवाज बनेगा भारत
भारत ने स्पष्ट किया कि यदि उसे 2028-29 के लिए सुरक्षा परिषद में जगह मिलती है तो वह वैश्विक शांति और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर ग्लोबल साउथ की चिंताओं और प्राथमिकताओं को प्रमुखता से उठाएगा। साथ ही बहुपक्षीय व्यवस्था को अधिक प्रभावी, समावेशी और भविष्य के अनुरूप बनाने की दिशा में काम करेगा।
भारत की सात प्रमुख प्राथमिकताएं
भारत का मानना है कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में संयुक्त राष्ट्र और उसकी संस्थाओं में सुधार जरूरी है। सुरक्षा परिषद में भारत की मौजूदगी विकासशील देशों की आवाज को अधिक प्रभावी ढंग से सामने रखने के साथ-साथ वैश्विक शांति, सुरक्षा और सहयोग को नई दिशा देने में मददगार हो सकती है।
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यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वर्ष 2028-29 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की गैर-स्थायी सदस्यता के लिए भारत की उम्मीदवारी पेश की है। भारत इस कार्यकाल के दौरान वैश्विक शांति, विकास और विकासशील देशों की आवाज को मजबूती देने पर जोर दे रहा है।
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'SHANTI' विजन से दुनिया को संदेश
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत की विदेश नीति SHANTI (Securing Holistic Advancement through Norms, Trust and Integrity) के सिद्धांत पर आधारित होगी। इसका उद्देश्य नियमों, विश्वास और ईमानदारी के जरिए समग्र वैश्विक विकास को बढ़ावा देना है। भारत का कहना है कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों का समाधान तभी संभव है, जब बहुपक्षीय संस्थाएं आज की वास्तविकताओं के अनुरूप काम करें और विकासशील देशों, खासकर ग्लोबल साउथ, को उचित प्रतिनिधित्व मिले।
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ग्लोबल साउथ की आवाज बनेगा भारत
भारत ने स्पष्ट किया कि यदि उसे 2028-29 के लिए सुरक्षा परिषद में जगह मिलती है तो वह वैश्विक शांति और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर ग्लोबल साउथ की चिंताओं और प्राथमिकताओं को प्रमुखता से उठाएगा। साथ ही बहुपक्षीय व्यवस्था को अधिक प्रभावी, समावेशी और भविष्य के अनुरूप बनाने की दिशा में काम करेगा।
भारत की सात प्रमुख प्राथमिकताएं
- संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों को आधुनिक तकनीक और बेहतर संसाधनों से मजबूत करना।
- 'महिला, शांति और सुरक्षा' एजेंडे को आगे बढ़ाना।
- अंतरराष्ट्रीय कानून (UNCLOS) के अनुरूप स्वतंत्र और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था सुनिश्चित करना।
- समुद्री व्यापार और जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को बढ़ावा देना।
- नाविकों और समुद्री कर्मियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना।
- मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) अभियानों को मजबूत करना।
- आधुनिक तकनीक के जिम्मेदार और सकारात्मक उपयोग को बढ़ावा देना।
भारत का मानना है कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में संयुक्त राष्ट्र और उसकी संस्थाओं में सुधार जरूरी है। सुरक्षा परिषद में भारत की मौजूदगी विकासशील देशों की आवाज को अधिक प्रभावी ढंग से सामने रखने के साथ-साथ वैश्विक शांति, सुरक्षा और सहयोग को नई दिशा देने में मददगार हो सकती है।