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Explainer:...तो खत्म होने वाला है पश्चिम एशिया में युद्ध, ट्रंप ने क्यों रोके हमले, नए समझौते की क्या योजना?

Mon, 03 Aug 2026 07:40 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 03 Aug 2026 07:40 AM IST
सार

अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष शुरू हुए अब पांच महीने से ज्यादा हो चुके है। दोनों में एक बार युद्ध विराम का समझौता लागू हो चुका है, हालांकि यह एक महीने भी नहीं चल पाया और जुलाई के पहले हफ्ते से शुरू होने के बाद अब तक जारी है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक वार्ता जारी है और वह समझौते के लिए ईरान से जल्दबाजी चाहते हैं। हालांकि, ईरान इस तरह के किसी भी संभावित समझौते से इनकार कर रहा है। 

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US Planning new Deal with Iran President Donald Trump claims attack stop Hormuz Strait Opening Nuclear Threat
अमेरिका-ईरान संघर्ष बीते पांच महीने से जारी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उनके और इस्राइल के बीच अब ईरान पर हमले रोकने पर सहमति बन गई है। उन्होंने दावा किया कि ईरान के साथ महीनों पुरानी जंग को रोकने के लिए एक समझौता हुआ है, जिस तक दोनों देश तेजी से पहुंचे हैं। गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका-इस्राइल के ईरान पर साझा हमलों के बाद से ही पश्चिम एशिया लगातार जंग की आग में सुलग रहा है। जून के मध्य में अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध विराम पर समझौता भी हुआ थआ, लेकिन कुछ ही दिनों के अंदर ही होर्मुज के मुद्दे पर दोनों देश फिर आमने-सामने आ गए और हमलों का एक लंबा दौर जारी रहा। इसी पूरे घटनाक्रम के बीच अब ट्रंप ने ईरान के साथ नए समझौते तक पहुंचने का एलान कर दिया है। 
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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर फरवरी से जारी अमेरिका-ईरान संघर्ष को ट्रंप ने दूसरी बार रोकने का फैसला क्यों लिया है? इसे लेकर ईरान का क्या कहना है? ट्रंप ने दोनों देशों के जिस समझौते तक पहुंचने की बात कही है, वह क्या है? क्या इससे दोनों देशों की जंग खत्म होने की संभावना है? आइये जानते हैं...
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ट्रंप ने फिर क्यों रोके ईरान पर हमले?

1. ट्रंप का क्या दावा?
अमेरिकी राष्ट्रपति ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर एलान किया था कि अमेरिका ईरान पर हमले के लिए बिल्कुल तैयार है, लेकिन तेहरान (ईरान) और कुछ अन्य पश्चिम एशियाई देशों ने उनसे नए हमले रोकने की अपील की है, क्योंकि आगामी समझौते के परिमाप (बाहरी मुद्दों) पर सहमति बन चुकी है। 

ट्रंप ने आगे कहा, "इस अनुरोध के बाद उन्होंने दुनिया के भले और एक सफल और समृद्ध ईरान के लिए मैंने हमले रोकने पर हामी भर दी।" हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने शर्त जोड़ते हुए कहा कि यह ईरान की जल्द से जल्द समझौता करने की क्षमता पर निर्भर है। उन्होंने आगे कहा, "ईरान पर हमले न करने की प्रतिबद्धता में इस्राइल भी शामिल है। काम में जुटें सभी लोग और इसे (समझौते को) पूरा करें। 

अमेरिकी सरकार और व्हाइट हाउस की तरफ से राष्ट्रपति के इन पोस्ट्स पर आगे की जानकारी नहीं दी गई। यह भी साफ नहीं है कि जिस समझौते तक ट्रंप जल्द पहुंचने की बात कर रहे हैं, उसमें कौन शामिल है और इसमें मध्यस्थता कौन कर रहा है। 

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अमेरिका-ईरान युद्ध में संभावित डील को लेकर ट्रंप का बयान। - फोटो : अमर उजाला
2. सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस की रही भूमिका?
इस बीच अमेरिकी मीडिया ग्रुप एक्सिओस ने दावा किया है कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिस मोहम्मद बिन सलमान (एमबीएस) ने हाल ही में ट्रंप से बात की और ईरान के खिलाफ अमेरिका के बड़े स्तर के नए हमलों का सख्त विरोध किया। रिपोर्ट में कहा गया कि सलमान ने ट्रंप से तनाव को कम करने और नए हमले रोकने का अनुरोध किया। 

3. ट्रंप को अमेरिका के कम होते हथियारों के जखीरे की चिंता?
इस बीच सेंटर फॉर स्ट्रैटिजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (सीएसआईएस) की तरफ से की गई एक रिसर्च में कहा गया कि ईरान से युद्ध में अमेरिका के हथियारों के जखीरे पर भारी असर पड़ा है। खासकर पेट्रियट एंटी-मिसाइल इंटरसेप्टर्स पर, जिन्हें अमेरिका से लेकर पश्चिम एशिया के अधिकतर देश अपने बचाव के लिए इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमलों के चलते इनकी आपूर्ति पूरी नहीं हो पाई है। 

ये भी पढ़ें: युद्धपोत कम, मिसाइलें घटीं: शीर्ष जनरल की पेंटागन को चेतावनी, इस्राइल को ईरानी हमले से बचा पाएगा अमेरिका?
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अमेरिका ईरान तनाव - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
अमेरिकी सांसद (सीनेटर) क्रिस वान होलेन ने भी हाल ही में अमेरिका के घटते हथियारों के जखीरे के मुद्दे को एक टीवी चैनल के सामने उठाया था। उन्होंने कहा था- "हमने अपने इंटरसेप्टर्स, जो कि अमेरिकी फौजों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी हैं को खत्म किया है। हम उन्हें हर दिन इस्तेमाल कर रहे हैं, वह भी ऐसे समय जब पूरी दुनिया में और भी विवाद लगातार बढ़ते जा रहे हैं।"

कुछ अन्य अमेरिकी मीडिया चैनलों ने कहा है कि अमेरिकी सेना प्रमुख जनरल डैन केन ने भी अमेरिकी इंटरसेप्टर मिसाइलों की आपूर्ति में कमी का मुद्दा उठाया है, लेकिन ट्रंप ने इन चिंताओं को सीधे तौर पर खारिज कर दिया है। 

अमेरिकी रक्षा विभाग के आंतरिक आकलन के अनुसार, अमेरिका के कई अहम मिसाइल सिस्टम का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल हो चुका है। इनमें पेट्रियट के अलावा थाड जैसे एयर डिफेंस सिस्टम के करीब 50 फीसदी इंटरसेप्टर खर्च हो चुके हैं। इसके अलावा प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइल, टॉमहॉक क्रूज मिसाइल, जेएएसएसएम और एसएम-3/एसएम-6 जैसी मिसाइलों के भंडार में भी कमी आई है।

4. क्या घरेलू-राजनीतिक दबाव भी डाल रहा असर?
सर्वे एजेंसी- प्यू रिसर्च सेंटर के मुताबिक, लगभग 60% अमेरिकी नागरिक ईरान के साथ इस युद्ध का विरोध कर रहे हैं, जिससे ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट आ रही है। इसके अलावा युद्ध और तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। बढ़ते ईंधन खर्च से अमेरिकी उपभोक्ता परेशान हैं, जिसका नकारात्मक असर आगामी अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में ट्रंप प्रशासन पर पड़ सकता है।

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ईरान युद्ध में अमेरिका को हुआ पेट्रियट मिसाइलों का नुकसान। - फोटो : अमर उजाला

अमेरिका के हमले रोकने और नए समझौते पर ईरान का क्या दावा?

ट्रंप के बयान पर क्या बोला ईरान?
ईरान ने अमेरिका के हमले रोकने और नए समझौते तक पहुंचने से जुड़े डोनाल्ड ट्रंप के दावों को झुठलाया है। ईरानी सैन्य अधिकारियों और मीडिया ने ट्रंप के उस दावे को नया झूठ करार दिया है, जिसमें कहा गया था कि ईरान ने अमेरिका से हमले रोकने की गुहार लगाई है। ईरान की सरकारी मीडिया ने ट्रंप का मजाक उड़ाते हुए कहा कि ईरान ने ऐसा कोई अनुरोध नहीं किया, बल्कि ट्रंप ने खुद पीछे हटने का फैसला किया है। ईरान का आरोप है कि ट्रंप खाड़ी देशों के नेताओं पर दबाव बनाने और उनसे जबरन वसूली करने के लिए ऐसा झूठ बोल रहे हैं।

होर्मुज खोलने की शर्त के लिए कितना तैयार ईरान?
ट्रंप ने दावा किया था कि एक नए समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से खोल दिया जाएगा, लेकिन ईरान ने इस जलमार्ग पर अपने रुख में कोई बदलाव नहीं होने का संकेत दिया है। हालांकि, ईरान का स्पष्ट कहना है कि यह जलमार्ग युद्ध से पहले वाली स्थिति में अब कभी नहीं लौटेगा। ईरान केवल ओमान के साथ मिलकर समुद्री यातायात के प्रबंधन के लिए तैयार है, जिसे अमेरिका सिरे से खारिज कर चुका है।

समझौते की बातों के उलट ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य में नैविगेशन के नियमों की अनदेखी कर रहा है। ईरान का यह भी दावा है कि अमेरिका अपनी सैन्य गतिविधियों को छिपाने के लिए वाणिज्यिक जहाजों का इस्तेमाल करके और नया नौसैनिक नाकाबंदी लगाकर संघर्ष विराम का उल्लंघन कर रहा है।

'अहम ढांचों' को निशाना बनाने की धमकी पर क्या बोला ईरान?
ईरान के कार्यवाहक रक्षा मंत्री माजिद इब्न अल-रेजा ने कहा कि वे अमेरिकी धमकियों को वास्तविक और विश्वसनीय मानते हैं, चाहे वह मनोवैज्ञानिक युद्ध का ही हिस्सा क्यों न हो। ईरान ने स्पष्ट किया है कि उसकी सेना हाई अलर्ट पर है। इसके साथ ही ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका या किसी क्षेत्रीय देश ने उनके खिलाफ कोई आक्रामकता दिखाई, तो उसका निर्णायक और बराबरी का जवाब दिया जाएगा। ईरान की शीर्ष सुरक्षा संस्था से जुड़ी मीडिया संगठन के हवाले से यह भी धमकी दी है कि अगर उनके ऊर्जा ठिकानों पर हमला हुआ, तो अमेरिका के सहयोगी देशों, जैसे सऊदी अरब, यूएई, कतर और इस्राइल के तेल और गैस क्षेत्रों को राख में बदल दिया जाएगा।

ईरान का समझौते से इनकार, तो ट्रंप किस समझौते की बात कर रहे?

डोनाल्ड ट्रंप जिस संभावित समझौते की बात कर रहे हैं, उसके तहत मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत और पूरी तरह से खोलने और ईरान के परमाणु खतरे को हमेशा के लिए खत्म करने की बात कही गई है। हालांकि, इस पर अब तक किसी भी स्रोत ने आगे की जानकारी नहीं दी है। ट्रंप ने यह भी कहा था कि जेरेड कुशनर, स्टीव विटकॉफ और मार्को रुबियो सहित अमेरिकी वार्ताकार अभी भी ईरान के साथ एक समझौते तक पहुंचने में सक्षम हो सकते हैं। दूसरी तरफ ईरान ने भले ही अमेरिका से हमले रोकने की गुहार लगाने या नए समझौते की बात को सिरे से खारिज किया है, लेकिन ट्रंप का यह बयान संभवतः क्षेत्रीय मध्यस्थों द्वारा पर्दे के पीछे चल रहे कूटनीतिक प्रयासों और वार्ताओं पर आधारित है।

तो क्या पाकिस्तान, कतर अब भी मध्यस्थता की कोशिश में जुटे?
कतर, पाकिस्तान, तुर्किये और यूएई जैसे क्षेत्रीय देश अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को रोकने और कूटनीति की बहाली के लिए लगातार दबाव बना रहे हैं। पाकिस्तानी और कतरी मध्यस्थों ने अमेरिका-ईरान के बीच रुकी हुई बातचीत के फिर से शुरू होने को लेकर सतर्क आशा जताई है और उन्हें अगले हफ्ते तक इसमें सकारात्मक प्रगति की उम्मीद है। 

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रॉस हैरिसन। - फोटो : अमर उजाला
पश्चिम एशिया मामलों के विशेषज्ञ और मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट के सीनियर फेलो रॉस हैरिसन के मुताबिक, ट्रंप बार-बार धमकियां देकर पीछे हट रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और अमेरिकी नाकाबंदी हटाने पर दोनों देशों के बीच कोई स्पष्ट और ठोस सहमति नहीं बन जाती, तब तक ट्रंप की यह घोषणा कोई वास्तविक समझौता नहीं है, बल्कि युद्ध में केवल एक अस्थायी रोक है। यह कभी भी टूट सकती है। 

उन्होंने कहा कि संघर्ष में एक समय वह आ सकता है जब दोनों ही पक्ष चाह कर भी तनाव को कम नहीं कर पाएंगे, क्योंकि कोई न कोई ऐसा घटनाक्रम होता ही रहेगा, जिसके चलते दोनों पक्ष टकराव से दूरी नहीं बना पाएंगे।


 
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