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UNSC: ईरान ने यूएन सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव को किया खारिज, राजदूत इरावानी ने अन्यायपूर्ण और गैरकानूनी बताया

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: Asmita Tripathi Updated Thu, 12 Mar 2026 03:25 PM IST
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सार

ईरान ने संयुक्त राष्ट्र कीप्रस्ताव को खारिज किया है। ईरान के राजदूत ईरावानी ने इसे अन्यायपूर्ण और गैरकानूनी बताया।  इसके साथ ही उन्होंने तर्क दिया कि प्रस्ताव का पारित होना सुरक्षा परिषद की विश्वसनीयता के लिए एक गंभीर झटका है। 

Iran rejects UN Security Council resolution, Ambassador Iravani calls it unjust and illegal
ईरान के राजदूत, अमीर सईद इरावानी - फोटो : ANI
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विस्तार

संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि अमीर-सईद इरावानी ने सुरक्षा परिषद की ओर से ईरान के खिलाफ पारित किए गए प्रस्ताव पर कड़ा विरोध जताया है। सरकारी प्रसारक प्रेस टीवी की रिपोर्ट के अनुसार,  बुधवार को सुरक्षा परिषद के सत्र में बोलते हुए अमीर-सईद इरावानी ने इस दस्तावेज को अन्यायपूर्ण और गैरकानूनी बताते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने तर्क दिया कि प्रस्ताव का पारित होना सुरक्षा परिषद की विश्वसनीयता के लिए एक गंभीर झटका है। यह विश्व निकाय के इतिहास पर एक अमिट दाग छोड़ता है।

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अधिकार का घोर दुरुपयोग है

राजदूत ने दावा किया कि यह कदम सुरक्षा परिषद के अधिकार का घोर दुरुपयोग है। इसका उद्देश्य कुछ सदस्यों के राजनीतिक एजेंडे को पूरा करना है। उन्होंने आगे कहा कि यह जमीनी हकीकतों को तोड़-मरोड़ कर पेश करता है। मौजूदा क्षेत्रीय संकट के मूल कारणों को संबोधित करने में विफल रहता है। अपने कड़े शब्दों वाले भाषण में, इरावानी ने दस्तावेज की पक्षपातपूर्ण और राजनीतिक रूप से प्रेरित प्रकृति की निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पीड़ित और हमलावर की भूमिकाओं को उलट देता है।  तर्क दिया कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया दोनों शासनों को और अधिक अपराध करने के लिए प्रोत्साहित करती है।

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तेहरान परिषद के फैसले को स्वीकार नहीं करेगा

मिशन के आधिकारिक बयानों में इस बात पर जोर दिया गया कि तेहरान परिषद के फैसले को स्वीकार नहीं करेगा। इरावानी ने इस कार्रवाई को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के विपरीत बताया। इसके साथ ही कहा कि यह आक्रामकता के कृत्यों के निर्धारण को नियंत्रित करने वाले स्थापित सिद्धांतों की पूरी तरह से अवहेलना करती है। ईरानी राजनयिक ने परिषद के यूरोपीय सदस्यों की भी कड़ी आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि प्रस्ताव के लिए उनका समर्थन यह साबित करता है कि "संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून की रक्षा करने के उनके दावे खोखले शब्दों से अधिक कुछ नहीं हैं।


वाशिंगटन से मिले आदेश का पालने करने का आरोप लगाया
इरावानी ने कहा, "उनका पाखंडी और गैर-जिम्मेदाराना आचरण एक बार फिर यह दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति उनकी घोषित प्रतिबद्धता की तुलना में राजनीतिक विचार अधिक महत्वपूर्ण हैं।" उन्होंने आगे आरोप लगाया कि ये राष्ट्र स्वतंत्र रूप से कार्य करने के बजाय केवल वाशिंगटन से मिले राजनीतिक निर्देशों का पालन कर रहे हैं। राजनयिक दस्तावेजों के अनुसार, ईरानी दूत ने कुछ विशिष्ट सदस्यों पर अमेरिका और इस्राइल की कार्रवाइयों को नजरअंदाज करते हुए ईरान को दोषी ठहराने का एक घिनौना और स्पष्ट प्रयास करने का आरोप लगाया। उन्होंने विशेष रूप से मीनाब शहर में 170 स्कूली छात्राओं के नरसंहार का उल्लेख अनदेखी की गई क्रूरताओं के उदाहरण के रूप में किया। इरावानी के अनुसार, 28 फरवरी को हुए "अवैध, अनुचित और बिना उकसावे वाले सैन्य हमले के बाद संघर्ष और बढ़ गया। उन्होंने इसे इस्लामी गणराज्य के नेता, अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई और अन्य उच्च पदस्थ अधिकारियों की कायरतापूर्ण आतंकवादी हत्या से जोड़ा।
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आत्मरक्षा के अपने अधिकार का प्रयोग

तेहरान की सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए राजदूत ने जोर देकर कहा कि ईरान ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत आत्मरक्षा के अपने अधिकार का प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद द्वारा अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में विफल रहने के बाद राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा के लिए यह आवश्यक था। इरावानी ने हमलों को अंजाम देने के लिए "कुछ तीसरे देशों के क्षेत्रों का इस्तेमाल करने" को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया में ठिकानों के खिलाफ ईरान की बाद की कार्रवाई "किसी भी तरह से क्षेत्रीय देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ नहीं थी।"


 


 

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