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Iran: 'सेना की तैनाती कर हमें डरा नहीं सकते', पश्चिम एशिया में अमेरिकी युद्धपोत की तैनाती पर ईरान की दो टूक

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान Published by: नितिन गौतम Updated Mon, 09 Feb 2026 09:51 AM IST
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सार

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक बयान में कहा कि सेना की तैनाती ईरान को डरा नहीं सकती। साथ ही उन्होंने अमेरिका की बातचीत की मंशा पर भी सवाल उठाए और कहा कि उन्हें अमेरिका पर बेहद कम भरोसा है। 

iran says military deployment does not scare us amid donald trump warship deployment
डोनाल्ड ट्रंप, अयातुल्ला खामनेई - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार

ईरान ने अमेरिका के साथ रविवार को शुरू हुई परमाणु बातचीत के बीच अपना रुख फिर दोहराया और कहा कि तेहरान यूरेनियम संवर्धन करना नहीं छोड़ेगा। साथ ही ईरान ने अमेरिका की सैन्य ताकत के सामने झुकने से भी इनकार कर दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि इस क्षेत्र में सैन्य तैनाती हमें डराती नहीं हैं। अराघची का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका ने अपने सबसे ताकतवर युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन को पश्चिम एशिया में तैनात किया है। अराघची ने कहा कि ईरान को अमेरिका पर बहुत कम भरोसा है। अमेरिका की बातचीत की मंशा पर भी उन्होंने सवाल उठाया। 
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अमेरिका की मंशा पर ईरान के विदेश मंत्री ने उठाए सवाल
  • अराघची ने कहा कि उन्हें इस बात पर भी संदेह है कि अमेरिका बातचीत को गंभीरता से ले रहा है या नहीं। उन्होंने बताया कि ईरान इन वार्ताओं को लेकर अपने रणनीतिक साझेदार चीन और रूस से भी परामर्श कर रहा है।
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  • पश्चिमी देशों और इस्राइल का आरोप है कि ईरान परमाणु बम बनाने की कोशिश कर रहा है, जिसे ईरान ने खारिज किया है।
  • अराघची ने कहा कि ईरान किसी परमाणु हथियार की तलाश में नहीं है और उसकी असली ताकत महाशक्तियों को न कहने की क्षमता है।
  • अराघची ने कहा, 'वे हमारे परमाणु बम से डरते हैं, जबकि हम परमाणु बम की तलाश में नहीं हैं। हमारा परमाणु बम महाशक्तियों को न कहने की शक्ति है।'
  • इस बीच इस्राइल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को विश्व शांति के लिए खतरा बताया है।
  • अमेरिका और इस्राइल चाहते हैं कि बातचीत में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय सशस्त्र संगठनों को समर्थन जैसे मुद्दे भी शामिल हों, लेकिन ईरान ने इन्हें वार्ता का हिस्सा बनाने से इनकार कर दिया है।
  • अरघची ने यूरेनियम संवर्धन पर किसी भी तरह के समझौते से इनकार कर दिया और इसे रणनीति के बजाय संप्रभुता का मामला बताया। उन्होंने कहा, 'भले ही हम पर युद्ध थोपा जाए, लेकिन किसी को भी हमें अधिकार देने का हक नहीं है।' 
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