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US-इस्राइल के लिए आसान नहीं ईरान का शासन बदलना: खामेनेई के उत्तराधिकारी का है पूरा प्लान, जानें कौन है दावेदार

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: Kirtivardhan Mishra Updated Sun, 01 Mar 2026 11:56 AM IST
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सार
इस्राइल और अमेरिका के संयुक्त अभियान में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद अब यह सवाल है कि आखिर इसका देश पर क्या असर होगा? इस देश में सर्वोच्च नेता चुने जाने की प्रक्रिया क्या है और खामनेई की गैरमौजूदगी की स्थिति में उनका उत्तराधिकारी कौन होगा? इस पद के लिए कितने दावेदार हैं और इनकी क्या खासियत है? आइये जानते हैं...
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Iran Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei Successor Israel US attack from Alireza to Mojtaba explained
अयातुल्ला पद के लिए खामेनेई के उत्तराधिकारी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। अमेरिका और इस्राइल की तरफ से ईरान पर ताबड़तोड़ हमलों उसके सैन्य अधिकारियों को मार गिराने के बाद से स्थिति तनावपूर्ण है। ईरान भी जवाब में इस्राइल के प्रमुख शहरों और पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है।  


इस बीच सामने आया है कि शनिवार को जब अमेरिका और इस्राइल ने अपने संयुक्त अभियान की शुरुआत की थी तो इसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के ठिकानों को सबसे पहले निशाना बनाया गया था। रविवार सुबह इसकी पुष्टि हुई है कि खामेनेई के साथ-साथ उनके परिवार के कई सदस्य इस हमले की चपेट में आ गए। माना जा रहा है कि ईरान के सुप्रीम लीडर को निशाना बनाकर अमेरिका और इस्राइल की मंशा देश के शासन में बदलाव की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को ही एक ट्रूथ सोशल पोस्ट में अपने इरादे जाहिर भी कर दिए और देश की जनता से इस मौके का फायदा उठाने के लिए कहा। 

इस्राइल और अमेरिका के संयुक्त अभियान में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई की मौत के बाद अब यह सवाल है कि आखिर इसका देश पर क्या असर होगा? इस देश में सर्वोच्च नेता चुने जाने की प्रक्रिया क्या है और खामनेई की गैरमौजूदगी की स्थिति में उनका उत्तराधिकारी कौन होगा? इस पद के लिए कितने दावेदार हैं और इनकी क्या खासियत है? आइये जानते हैं...

सुप्रीम लीडर की गैरमौजूदगी में कैसे चलती है ईरान की शासन व्यवस्था? 

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद भी इसकी संभावना काफी कम है कि ईरान में शासन व्यवस्था में कोई बदलाव होगा। इसकी वजह यह है कि 1979 में जब ईरान में क्रांति हुई थी, तब यहां सुप्रीम लीडर द्वारा शासन की व्यवस्था आ गई। किसी एक सर्वोच्च नेता के न होने पर भी ईरान में सरकार के माध्यम से शासन की व्यवस्था पहले से तय है। इसके अलावा देश में सुप्रीम लीडर के चुने जाने की प्रक्रिया भी पहले से ही चिह्नित है। 

विशेषज्ञ सभा के उम्मीदवारों को चुनने वाली गार्डियन काउंसिल में 12 सदस्य होते हैं। इनमें छह इस्लामिक फकीह (इस्लामी कानून में विशेषज्ञ) और छह न्यायविद होते हैं। गार्डियन काउंसिल न सिर्फ ईरान में स्थानीय-राष्ट्रपति चुनाव लड़ने वालों को परखती है, बल्कि चुनाव कराने और संसद से पास कानूनों को वीटो करने का भी अधिकार रखती हैं।

खामेनेई की गैरमौजूदगी में कौन-कौन होगा सुप्रीम लीडर पद का दावेदार?

1. मोजतबा खामेनेई 
ईरान इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश में अगले सर्वोच्च नेता के लिए मोजतबा खामेनेई की दावेदारी सबसे मजबूत है। मोजतबा मौजूदा सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के दूसरे बेटे हैं और राजनीतिक तौर पर सबसे ज्यादा सक्रिय हैं। मोजतबा खामेनेई का जन्म साल 1969 में ईरान के मशहद में हुआ था। ईरान की सरकार में मोजतबा खामेनेई का गहरा प्रभाव है और कहा जाता है कि ईरान की खुफिया और सशस्त्र सेनाओं में भी मोजतबा खामेनेई के करीबी शामिल हैं। 

ये भी पढ़ें: Ali Khamenei Killed: अमेरिका-इस्राइल हमलों में अली खामेनेई की मौत, ईरानी मीडिया का दावा; 40 दिन का शोक घोषित

मोजतबा ईरान-इराक में हुए युद्ध में भी भाग ले चुके हैं। उन्होंने धार्मिक शिक्षा हासिल की है और वे इस्लामिक मामलों के जानकार हैं, लेकिन उनकी गिनती शीर्ष स्तर के धर्मगुरुओं में नहीं होती है। मोजतबा साल 1990 से ईरान की राजनीति में पर्दे के पीछे से सक्रिय हैं। 2005 तक लोगों की नजर से दूर रहे मोजतबा की मोहम्मद अहमदिनेजाद को ईरान का राष्ट्रपति बनाने में अहम भूमिका रही थी। हालांकि, बाद में दोनों में विवाद हो गया और अहमदीनेजाद ने मोजतबा पर सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया।

ईरान के मीडिया पर भी मोजतबा की पकड़ है और उन्होंने साल 2014 में ईरान के सरकारी टीवी आईआरआईबी के निदेशक को नौकरी से निकाल दिया था। देश में जब साल 2009 में विरोध प्रदर्शन हुए थे तो उन्हें सख्ती से कुचलने के पीछे भी मोजतबा का ही दिमाग माना जाता है। उस दौरान कई लोग मारे गए थे। 2021 में मोजतबा को अयातुल्ला की पदवी दी गई। ईरान का सुप्रीम लीडर बनने के लिए यह पदवी होना सबसे अहम है। बीते कुछ दशकों में ईरान में उनकी राजनीतिक पहुंच बढ़ी है। कई जानकारों का मानना है कि ईरान की सेना-रेवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) और वहां धर्मगुरुओं के बीच अच्छी पैठ होने की वजह से मोजतबा अपने पिता की जगह लेने के लिए सबसे उपयुक्त दावेदार हैं।
 

2. अलीरेजा अराफी
सुप्रीम लीडर पद के दूसरे बड़े दावेदार अलीरेजा अराफी हैं। अराफी लंबे समय से अयातुल्ला खामेनेई के करीबी रहे हैं। वे खुद सर्वोच्च नेता चुनने वाली विशेषज्ञ सभा का हिस्सा रहे हैं। वे उम्मीदवारों की छंटनी करने वाली गार्डियन काउंसिल में भी उन्होंने लंबे समय तक सेवाएं दे चुके हैं। बताया जाता है कि अराफी तकनीकी तौर पर भी काफी आगे हैं और धर्मगुरुओं से नई तकनीक को अपनाने की वकालत करते रहे हैं। 

अराफी का तर्क है कि इसके जरिए ही धार्मिक संस्थानों को सदियों पुराने अलग-थलग हो चुके रिवाजों से बाहर निकाला जा सकेगा। हालांकि, वे खामेनेई की इस्लामिक विचारधारा के पैरोकार रहे हैं। ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई जहां काले रंग का साफा सिर पर बांधते हैं वहीं, अराफी सफेद साफा बांधते हैं। माना जाता है कि काला साफा मुख्यतः सैयद पहनते हैं, जो कि खुद को पैगंबर मोहम्मद और शियाओं के पहले इमाम- इमाम अली का वंशज मानते हैं। ऐसे में अराफी के सुप्रीम लीडर बनने की राह में यह एक बड़ा अवरोध है।



हालांकि, एक गौर करने वाली बात यह भी है कि 1989 में जब ईरान के पहले सुप्रीम लीडर अयातुल्ला रुहोल्ला खोमैनी बीमार थे, तब उन्होंने अपने उत्तराधिकारी के तौर पर पहले हुसैन अली मोंताजरी को नियुक्त किया था। मोंताजरी भी सफेद साफा पहनने वाले धर्मगुरु थे।

3. अली असगर हेजाजी 
अली असगर हेजाजी अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतर्गत राजनीतिक सुरक्षा मामलों के मंत्रालय को संभालते आए हैं। उनके पास ईरानी खुफिया विभाग की जिम्मेदारी रही। उनके आईआरजीसी और शीर्ष धर्मगुरुओं के साथ अच्छे संबंध हैं। हेजाजी अक्सर ईरान के रक्षा और कूटनीतिक मामलों पर फैसले में शामिल होते हैं। हालांकि, उन्हें अब तक अयातुल्ला की पदवी नहीं मिली है, जो कि सुप्रीम लीडर बनने के लिए अनिवार्य है।


 

4. हासिम हुसैनी बुशहरी
ईरान में हासिम अली बुशहरी को भी सुप्रीम लीडर पद का अहम दावेदार माना जा रहा है। बुशहरी ईरान में प्रमुख धर्मगुरु के साथ-साथ कई और भूमिकाओं में रह चुके हैं। इनमें विशेषज्ञ सभा के पहले उप-प्रधान के अलावा धार्मिक मामलों से जुड़ी कई समितियों और प्रार्थना सभाओं की जिम्मेदारियां शामिल हैं। बुशहरी के सुप्रीम लीडर खामेनेई से भी अच्छे संबंध हैं, जो कि सर्वोच्च पद के लिए उन्हें अहम दावेदार बनाती है।

5. हसन खोमैनी
हसन खोमैनी, ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला रूहोल्लाह खोमैनी के पोते हैं। उन्हें ईरान के सुधारवादी और उदारवादी  हलकों की ओर से भविष्य के सर्वोच्च नेता के लिए एक पसंदीदा उम्मीदवार माना जाता है। उनके पास अच्छे धार्मिक प्रमाण हैं और उनकी पारिवारिक विरासत का ईरानी राजनीति में काफी प्रभाव और महत्व है।
 
हालांकि, हसन खोमैनी के पास राजनीतिक अनुभव सीमित है और उनके सामने कई मजबूत प्रतिद्वंद्वी मौजूद हैं, जो उनकी उम्मीदवारी की संभावनाओं को कम करते हैं। वर्ष 2016 में ही उन्हें असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के चुनाव में उम्मीदवार के रूप में खड़े होने से रोक दिया गया था।

ये भी पढ़ें: ईरान बोला- खामेनेई की मौत का लेंगे बदला, IRGC ने जारी की अमेरिकी सैन्य अड्डों पर विनाशकारी हमले की चेतावनी

उनके सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने की संभावनाएं पूरी तरह से बदलती हुई राजनीतिक गतिशीलता पर निर्भर करती हैं, और इस बात पर निर्भर करती हैं कि क्या ईरान का शक्तिशाली कुलीन वर्ग एक ज्यादा उदारवादी और सुधारवादी दिशा अपनाने पर आम सहमति बना पाता है।

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