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बकरीद से पहले हमलों पर बिफरा ईरान: खामेनेई बोले-पश्चिम एशिया में अमेरिकी सेना को कहीं पनाह नहीं, बढ़ेगा तनाव?
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला।
Published by: राकेश कुमार
Updated Tue, 26 May 2026 02:27 PM IST
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सार
ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका को खुली चुनौती दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया में अब अमेरिकी ठिकानों को कोई सुरक्षा नहीं मिलेगी और ईरान हर खतरे पर सीधा पलटवार करेगा। अमेरिकी हमले और खामेनेई के बयान के बाद तनाव बढ़ना तय है।
मोजतबा खामेनेई, ईरान के सर्वोच्च नेता
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
शांति की बात करते-करते अमेरिका ने बकरीद से ठीक पहले एक बार फिर ईरान पर हमला किया है। इसके बाद ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका को बेहद कड़ी चेतावनी दी है। पद संभालने के बाद से वह कभी वीडियो या कैमरे के सामने नहीं आए हैं। वह सिर्फ सरकारी टेलीविजन के माध्यम से अपने बयान जारी कर रहे हैं। इस बार उन्होंने सीधे तौर पर अमेरिका और उसके सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इससे पूरे क्षेत्र में तनाव और ज्यादा बढ़ने की आशंका है।
अमेरिकी ठिकानों को नहीं मिलेगी ढाल- खामेनेई
सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने साफ-साफ कहा कि पश्चिम एशिया की ताकतें अब अमेरिकी सैन्य ठिकानों के लिए ढाल नहीं बनेंगी। उन्होंने कहा कि अब इस पूरे इलाके में अमेरिकी सेना के लिए कोई भी 'सुरक्षित पनाहगाह' नहीं बचेगी। युद्ध की शुरुआत से ही ईरान का यही मुख्य तर्क रहा है। ईरान चाहता है कि क्षेत्र के सभी देश मिलकर अमेरिकी मौजूदगी को पूरी तरह खत्म करें।
नए क्षेत्रीय आदेश के लिए एकजुटता की अपील
खामेनेई ने दुनिया के सभी इस्लामी देशों से अपने साझा हितों के लिए एक साथ आने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यही एकजुटता भविष्य के नए आदेश को तय करेगी। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा, 'मैं पूरी ईमानदारी और पवित्रता के साथ सभी इस्लामी देशों और सरकारों को दोस्ती और सहयोग का निमंत्रण देता हूं।'
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यह भी पढ़ें: West Asia Tension: तनाव के बीच ईरान का बड़ा दावा-सीमा लांघते ही अमेरिकी MQ-9 रीपर ड्रोन को किया ढेर
कब से जारी है तनाव?
बताते चलें कि अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच यह भीषण सैन्य टकराव इसी साल 28 फरवरी 2026 को तब शुरू हुआ, जब अमेरिका और इस्राइल ने 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत ईरान पर लगभग 900 हवाई हमले कर उसके सर्वोच्च नेता अली खामेनेई सहित कई टॉप कमांडरों को ढेर कर दिया और उसके परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया। इसके जवाब में ईरान ने पूरे पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों, इस्राइल और खाड़ी देशों पर सैकड़ों मिसाइलें और ड्रोन दागे।
इतना ही नहीं, दुनिया के सबसे संवेदनशील तेल व्यापार मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को ब्लॉक कर दिया, जिससे वैश्विक स्तर पर गंभीर ईंधन संकट पैदा हो गया। हालांकि, पाकिस्तान और अन्य देशों की मध्यस्थता के बाद 8 अप्रैल 2026 से एक बेहद नाजुक युद्धविराम लागू है, लेकिन पिछले कुछ दिनों में पर्दे के पीछे चल रही शांति वार्ता के बीच ईरान की ओर से समुद्र में माइंस बिछाने की कोशिशों और जवाब में अमेरिकी हमलों ने इस पूरे इलाके को एक बार फिर महायुद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।
अमेरिकी ठिकानों को नहीं मिलेगी ढाल- खामेनेई
सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने साफ-साफ कहा कि पश्चिम एशिया की ताकतें अब अमेरिकी सैन्य ठिकानों के लिए ढाल नहीं बनेंगी। उन्होंने कहा कि अब इस पूरे इलाके में अमेरिकी सेना के लिए कोई भी 'सुरक्षित पनाहगाह' नहीं बचेगी। युद्ध की शुरुआत से ही ईरान का यही मुख्य तर्क रहा है। ईरान चाहता है कि क्षेत्र के सभी देश मिलकर अमेरिकी मौजूदगी को पूरी तरह खत्म करें।
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नए क्षेत्रीय आदेश के लिए एकजुटता की अपील
खामेनेई ने दुनिया के सभी इस्लामी देशों से अपने साझा हितों के लिए एक साथ आने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यही एकजुटता भविष्य के नए आदेश को तय करेगी। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा, 'मैं पूरी ईमानदारी और पवित्रता के साथ सभी इस्लामी देशों और सरकारों को दोस्ती और सहयोग का निमंत्रण देता हूं।'
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कब से जारी है तनाव?
बताते चलें कि अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच यह भीषण सैन्य टकराव इसी साल 28 फरवरी 2026 को तब शुरू हुआ, जब अमेरिका और इस्राइल ने 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत ईरान पर लगभग 900 हवाई हमले कर उसके सर्वोच्च नेता अली खामेनेई सहित कई टॉप कमांडरों को ढेर कर दिया और उसके परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया। इसके जवाब में ईरान ने पूरे पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों, इस्राइल और खाड़ी देशों पर सैकड़ों मिसाइलें और ड्रोन दागे।
इतना ही नहीं, दुनिया के सबसे संवेदनशील तेल व्यापार मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को ब्लॉक कर दिया, जिससे वैश्विक स्तर पर गंभीर ईंधन संकट पैदा हो गया। हालांकि, पाकिस्तान और अन्य देशों की मध्यस्थता के बाद 8 अप्रैल 2026 से एक बेहद नाजुक युद्धविराम लागू है, लेकिन पिछले कुछ दिनों में पर्दे के पीछे चल रही शांति वार्ता के बीच ईरान की ओर से समुद्र में माइंस बिछाने की कोशिशों और जवाब में अमेरिकी हमलों ने इस पूरे इलाके को एक बार फिर महायुद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।