Iran Unrest: क्या अमेरिका की धमकी से झुका ईरान? ट्रंप के दावे के बीच सड़कों पर और उग्र हुए प्रदर्शन
ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन और तेज हो गए हैं। इसी बीच ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका की धमकी से ईरान वार्ता को तैयार हुआ है। ईरान ने बातचीत के संकेत दिए, लेकिन युद्ध की तैयारी की बात भी दोहराई। बढ़ती हिंसा, इंटरनेट बंदी और अमेरिकी चेतावनियों ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है। आइए मामले को विस्तार से जानते हैं।
विस्तार
ईरान में सरकार विरोधी आंदोलन तेज होते जा रहे हैं और इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका की सख्त चेतावनियों से ईरान दबाव में आया है और अब बातचीत चाहता है। उधर ईरान ने भी संकेत दिए हैं कि अमेरिका से चर्चा के रास्ते खुले हैं, लेकिन साथ ही यह भी साफ किया है कि वह किसी भी हालात के लिए तैयार है।
ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उनकी हमले की धमकी के बाद ईरान की तरफ से वार्ता के संकेत मिले हैं। उन्होंने यह भी चेताया कि अगर हालात नहीं सुधरे और मृतकों की संख्या बढ़ती रही, तो बैठक से पहले ही कड़े कदम उठाए जा सकते हैं। ट्रंप के मुताबिक, अमेरिका के पास कई विकल्प हैं और वह राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा।
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ईरान सरकार का जवाब क्या आया?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अघारची ने आरोप लगाया कि देश में जारी प्रदर्शन को जानबूझकर हिंसक और खूनी बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि इसका मकसद अमेरिकी राष्ट्रपति को दखल का बहाना देना है। अराघची ने दावा किया कि स्थिति नियंत्रण में है और सरकार बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन दबाव या धमकी से फैसले नहीं लिए जाएंगे।
ईरान में अभी हालात कैसे हैं?
- तेहरान समेत कई बड़े शहरों में प्रदर्शनकारी सड़कों पर डटे हुए हैं।
- सुरक्षाबलों की कार्रवाई में करीब 600 प्रदर्शनकारियों के मारे जाने का दावा किया जा रहा है।
- कई सुरक्षाकर्मियों के भी मारे जाने की खबरें सामने आई हैं।
- सरकार ने कुछ इलाकों में इंटरनेट और संचार सेवाओं पर सख्ती की है।
- अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच हालात और संवेदनशील हो गए हैं।
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इंटरनेट बहाली पर अमेरिका की पहल
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लैविट ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने स्टारलिंक के मालिक एलन मस्क से ईरान में इंटरनेट सेवा बहाल करने को लेकर बात की है। अमेरिका चाहता है कि ईरान के नागरिकों तक सूचनाएं पहुंचें। लेविट ने कहा कि ट्रंप की प्राथमिकता कूटनीति है, लेकिन जरूरत पड़ी तो सैन्य विकल्प से भी पीछे नहीं हटेंगे।
ईरान और अमेरिका दोनों के बयानों से साफ है कि एक तरफ बातचीत की संभावना है, तो दूसरी तरफ टकराव का खतरा भी बना हुआ है। प्रदर्शन तेज होते जा रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय नजरें अब इस पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति हालात को संभाल पाएगी या क्षेत्र एक और बड़े संकट की ओर बढ़ेगा।
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