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ईरान में कितना बड़ा हुआ आंदोलन?: जानें कैसे हिंसक हुए प्रदर्शन, खामनेई के खिलाफ कौन; अब आगे क्या

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Tue, 13 Jan 2026 09:29 AM IST
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सार

ईरान में जो प्रदर्शनों का दौर जारी है, उसकी शुरुआत कहां से हुई और इसकी वजह क्या थी? दो हफ्ते में ईरान में ऐसा क्या-क्या हुआ है, जिससे प्रदर्शनों में सत्ता परिवर्तन की मांग उठने लगी है? इस आंदोलन के पीछे का चेहरा कौन है? यह प्रदर्शन कितने बड़े स्तर पर हैं? ईरान सरकार ने इनसे निपटने के लिए क्या किया है? इसे लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या प्रतिक्रिया रही है? अमेरिका और उसके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के आंदोलनों को लेकर क्या तैयारी कर रहे हैं? आइये जानते हैं...

Iran Violent Protets Economic Crisis to Regime Change voices Ayatollah Ali Khamenei challenge US Donald Trump
ईरान में प्रदर्शनों के 16 दिन। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ईरान में दो हफ्ते पहले शुरू हुआ सरकार विरोधी आंदोलन अब विशाल रूप ले चुका है। आर्थिक संकट और बढ़ती महंगाई के असर के चलते शुरू हुए विरोध प्रदर्शन देखते ही देखते ईरान के सभी 31 प्रांतों में फैल चुके हैं। स्थिति यह है कि तेहरान में व्यापारियों का गढ़ कहे जाने वाला ग्रैंड बाजार इन प्रदर्शनों का केंद्र बना हुआ है और आर्थिक संकट के खिलाफ उठी आवाज अब सत्ता परिवर्तन की आवाज में बदल चुकी है। इस आंदोलन में अब तक 646 लोगों की मौत का दावा किया जा रहा है, जबकि 10 हजार से अधिक लोगों को हिरासत में लिए जाने की बात सामने आ रही है।
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इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एलान किया है कि ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर अमेरिका 25 फीसदी का आयात शुल्क जुर्माने के तौर पर लगाएगा। ट्रंप की इस चेतावनी के बाद चीन, रूस के साथ भारत के लिए भी चिंता की स्थिति पैदा हो गई है, क्योंकि भारत चाबहार बंदरगाह पर सहयोग को लेकर लगातार ईरान के साथ संपर्क में है। 
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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर ईरान में जो प्रदर्शनों का दौर जारी है, उसकी शुरुआत कहां से हुई और इसकी वजह क्या थी? दो हफ्ते में ईरान में ऐसा क्या-क्या हुआ है, जिससे प्रदर्शनों में सत्ता परिवर्तन की मांग उठने लगी है? इस आंदोलन के पीछे का चेहरा कौन है? यह प्रदर्शन कितने बड़े स्तर पर हैं? ईरान सरकार ने इनसे निपटने के लिए क्या किया है? इसे लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या प्रतिक्रिया रही है? अमेरिका और उसके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के आंदोलनों को लेकर क्या तैयारी कर रहे हैं? आइये जानते हैं...

ईरान में कब-क्यों-कैसे हुई प्रदर्शनों की शुरुआत?

ईरान में हालिया प्रदर्शनों की शुरुआत के दिसंबर 2025 के अंत में (मुख्य रूप से 28 दिसंबर से) हुई। इन विरोध प्रदर्शनों का मुख्य केंद्र तेहरान का ग्रैंड बाजार था। जहां दुकानदारों और व्यापारियों (बाजारी वर्ग) ने देश की गिरती अर्थव्यवस्था के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। 

1. पहले मुद्रा गिरी
प्रदर्शन शुरू होने की सबसे बड़ी वजह ईरानी मुद्रा- ईरानी रियाल की कीमत में भारी गिरावट रही, जो कि कुछ ही महीनों में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 14.6 लाख के रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिर गई। इसके चलते ईरान में महंगाई (मुद्रास्फीति) 52% से अधिक हो गई और आम ईरानियों की 'खरीद क्षमता' में भारी कमी आई।

2. फिर सरकार की किरकिरी
जनवरी 2026 की शुरुआत में सरकार ने विदेशी मुद्रा दर को स्थिर करने की कोशिशें शुरू कर दीं। इसके लिए ईरान के सेंट्रल बैंक ने जरूरी वस्तुओं के आयात पर दी जाने वाली सब्सिडी को खत्म करने का एलान कर दिया। इससे जनता में असंतोष और बढ़ गया। इसके बाद हजारों की संख्या में लोगों ने सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन शुरू किया। इन प्रदर्शनों का केंद्र बना ईरान का ग्रैंड बाजार, जो कि व्यापारियों का गढ़ है। यहां बड़ी संख्या में व्यापारियों ने आर्थिक हालात को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू किए। 

आर्थिक हालात के खिलाफ शुरू हुए प्रदर्शन, सत्ता-परिवर्तन की मांग तक कैसे पहुंचे?

ईरान में प्रदर्शनों का जो सिलसिला दिसंबर 2025 के अंत से शुरू हुआ वह देखते ही देखते अब ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई के विरोध और सत्ता-परिवर्तन की मांग तक जा पहुंचा है। यह लगातार दिन-प्रतिदिन बढ़े हैं...

इस आंदोलन के पीछे का चेहरा कौन है? 

जिस दौरान ईरान में यह प्रदर्शन भड़के उस दौरान इसमें रजा पहलवी नाम के व्यक्ति की खास दिलचस्पी देखी गई। रजा पहलवी ने ही ईरान में प्रदर्शनों को रातभर जारी रखने की बात कही। 

कौन?
65 वर्षीय रजा ईरान के अंतिम शाह- मोहम्मद रजा पहलवी के सबसे बड़े बेटे और निर्वासित क्राउन प्रिंस यानी राजकुमार हैं। उनके दादा- रजा शाह पहलवी ने पहलवी राजवंश की स्थापना की थी। हालांकि, 1979 की इस्लामिक क्रांति के दौरान उनके पिता को सत्ता से हटा दिया गया और उनका परिवार निर्वासन में चला गया। पहलवी राजवंश की जगह ईरान में धर्मगुरु के सत्ता संभालने की रिवायत शुरू हुई। अयोतुल्ला खोमैनी ईरान के सुप्रीम लीडर बने। 

विरोध प्रदर्शनों में भूमिका 
दिसंबर 2025 में शुरू हुए आर्थिक और शासन-विरोधी प्रदर्शनों के दौरान, पहलवी ने खुद को अहम रणनीतिकार और विकल्प के तौर पर पेश किया है। उन्होंने ईरानी जनता से  राष्ट्रीय क्रांति की लौ जलाने और सड़कों पर कब्जा करने के साथ-साथ देशव्यापी हड़ताल बुलाई। 8 जनवरी को उनके आह्वान पर ईरान में बड़े पैमाने पर रात भर प्रदर्शन हुए, जिसके बाद सरकार ने इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय फोन कॉल्स पर पाबंदी लगाई।

पहलवी का कहना है कि उनका मकसद सिर्फ सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि ईरान की अलग-अलग लोकतांत्रिक ताकतों, चाहे वे गणतांत्रिक हों या धर्मनिरपेक्ष या धार्मिक को एक साझा मंच पर लाना है। वह ईरान में व्यक्तिगत स्वतंत्रता, नागरिकों की समानता और धर्म को राजनीति से अलग रखने की बात कहते रहे हैं।

अमेरिका-इस्राइल से करीबी
चौंकाने वाली बात यह है कि जहां खामनेई शासन अमेरिका और इस्राइल की नीतियों का विरोध करता रहा है, वहीं रजा पहलवी अमेरिका में ही बैठकर ईरान के विपक्षी आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने 2023 में इस्राइल का दौरा किया था और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की थी। वह डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के ईरान के प्रति कड़े रुख का समर्थन करते हैं और इसे ईरानी लोगों की मदद के रूप में देखते हैं।

ईरान में प्रभाव
प्रदर्शनों के दौरान कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने रजा पहलवी के समर्थन में नारे लगाए और 'पहलवी वापस आएंगे' जैसे संदेश दिए। हालांकि, विश्लेषकों का यह भी मानना है कि उनकी लोकप्रियता का मुख्य कारण वर्तमान शासन के प्रति जनता का तीव्र आक्रोश है। यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान के भीतर उनके पास कितना संगठित समर्थन है।

ईरान के प्रदर्शनों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या प्रतिक्रिया?

1. अमेरिका-ट्रंप ने दी हमले की चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर ईरान के प्रदर्शनों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने हाल ही में कहा कि अमेरिका लॉक्ड एंड लोडेड यानी पूरी तरह तैयार है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरानी सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को मारना जारी रखती है, तो अमेरिका उनकी रक्षा के लिए आएगा।
 
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने ईरानी सैन्य ठिकानों और सुरक्षा बलों पर संभावित हवाई हमलों की योजना बनानी शुरू कर दी है। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि प्रदर्शनकारियों की हत्या उनके लिए एक रेड लाइन होगी। हालांकि, इस बीच ट्रंप ने यह भी दावा किया कि उनके कड़े रुख और हमलों की धमकी के बाद ईरान ने खुद वार्ता का प्रस्ताव दिया है।

इस बीच अमेरिकी नेता और ट्रंप के करीबी सांसद (सीनेटर) लिंडसे ग्राहम ने ईरानी नेतृत्व को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ईरान शासन ने अपने ही लोगों को मारना बंद नहीं किया, तो वे मरे हुए पाए जाएंगे। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरानी अर्थव्यवस्था को बेहद कमजोर बताया है।

2. इस्राइल ने की ईरान में प्रदर्शनकारियों की तरफदारी
इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इन आंदोलन और इसे चलाने वाले लोगों की सराहना की और इसे ईरान के लिए एक निर्णायक क्षण बताया, जहां ईरानी लोग अपने भविष्य को अपने हाथों में ले रहे हैं।

ये भी पढ़ें: Iran: क्या जंग के मुहाने पर ईरान? विदेश मंत्री ने अमेरिका-इस्राइल को दी खुली चेतावनी, कहा- देंगे करारा जवाब

3. भारत की संतुलित और रणनीतिक चिंता
भारत के लिए ये प्रदर्शन चिंता का विषय हैं, क्योंकि मौजूदा ईरानी शासन के साथ भारत के गहरे संबंध हैं। खास तौर पर चाबहार बंदरगाह के निर्माण में, जिसके जरिए भारत पश्चिम एशिया से कनेक्टिविटी और ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने पर जोर दे रहा है।
 

4. मानवाधिकार संगठन और पश्चिमी देश
एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) जैसी संस्थाएं ईरान में मौतों के बढ़ते आंकड़ों और इंटरनेट ब्लैकआउट की पुष्टि कर रही हैं।

दूसरी तरफ पश्चिमी देशों खासकर यूरोप के देशों ने ईरान के हालात पर चिंता जताई है। इसे लेकर रजा पहलवी ने यूरोपीय सरकारों से अपील की है कि वे तेहरान पर दबाव डालें ताकि ईरानी जनता के संचार माध्यमों (इंटरनेट) को बहाल किया जा सके।

5. ईरान सरकार का पलटवार 
ईरान के अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं को विदेशी दखल करार दिया है। उनका दावा है कि विदेशी शक्तियों से जुड़े नेटवर्क प्रदर्शनों को भड़का रहे हैं।


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