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Israel India Talks: इस्राइली विदेश मंत्री ने एस जयशंकर से की बात; ईरान, होर्मुज और लेबनान पर हुई चर्चा

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेल अवीव Published by: Devesh Tripathi Updated Tue, 14 Apr 2026 02:32 PM IST
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सार

अमेरिका-ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता के बेनतीजा रहने के बाद से ही पश्चिम एशिया में एक बार फिर से तनाव बढ़ने के आसार बन गए हैं। इस बीच इस्राइली विदेश मंत्री ने अपने भारतीय समकक्ष एस जयशंकर से कई मुद्दों पर चर्चा की। इनमें से ज्यादातर पश्चिम एशिया संघर्ष से जुड़े थे।

Israel Gideon Saar dials India EAM S Jaishankar talks on Iran Strait of Hormuz lebanon West Asia crisis US
इस्राइली विदेश मंत्री गिदोन सार और एस जयशंकर - फोटो : ANI
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विस्तार

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और उनके इस्राइली समकक्ष गिदोन सार के बीच मंगलवार को एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता हुई। इस बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की प्रमुख भू-राजनीतिक चुनौतियों, विशेष रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और लेबनान की स्थिति पर गहन विचार-विमर्श किया।
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इस बातचीत के बाद गिदोन सार ने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए अमेरिकी रुख वार्ता में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ईरान में परमाणु संवर्धन पर रोक और संवर्धित सामग्री को देश से बाहर ले जाना, पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है। सार ने स्पष्ट किया कि यह एक ऐसी शर्त है जिसका पालन सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।
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होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने को लेकर क्या बोले गिदोन सार?
बातचीत के दौरान सार ने होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान द्वारा नौवहन की स्वतंत्रता और वैश्विक अर्थव्यवस्था को बाधित करने के प्रयासों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ईरान द्वारा आर्थिक आतंकवाद के माध्यम से किए जा रहे नुकसान को देखते हुए ऐसे कदम उठाए जाने की जरूरत है, जो सभी देशों के लिए नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित कर सकें। इसमें भारत और खाड़ी क्षेत्र में भारत के मित्र देशों का भी उल्लेख किया गया, जिनकी अर्थव्यवस्थाएं समुद्री व्यापार पर बहुत अधिक निर्भर करती हैं।

'मेरे दोस्त से बातचीत अच्छी रही' : इस्राइली विदेश मंत्री
सार ने एक्स पर लिखे पोस्ट में विदेश मंत्री जयशंकर को 'मेरे दोस्त' कहकर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह हमेशा की तरह एक अच्छी बातचीत रही। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने की साझा प्रतिबद्धता इस वार्ता से और मजबूत हुई। दोनों नेताओं ने भविष्य में भी नियमित संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई।

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पश्चिम एसिया में फिर संघर्ष छिड़ने के आसार
पश्चिम एशिया में छिड़े संघर्ष को खत्म करने के लिए एक महीने से ज्यादा समय बाद अमेरिका-ईरान बातचीत की मेज पर आए थे। हालांकि, दोनों पक्षों के किसी भी समझौते पर नहीं पहुंचने की वजह से शांति वार्ता असफल रही। इसके बाद से ही पश्चिम एशिया में एक बार से तनाव बढ़ने की आशंका गहराने लगी है। इस बीच इस्लामाबाद में हुई बैठक में शामिल मिस्र, तुर्किये और पाकिस्तान फिर से अमेरिका-ईरान के बीच अगली बैठक कराने की कोशिशों में जुट गए हैं।

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