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ईरान-अमेरिका में सुलह कराएंगे मैक्रों?: होर्मुज संकट टालने के लिए फ्रांस ने संभाला मोर्चा, पेरिस में बड़ी बैठक
एएनआई , तेहरान
Published by: राकेश कुमार
Updated Tue, 14 Apr 2026 06:10 PM IST
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सार
होर्मुज में अमेरिकी नौसेना की घेराबंदी के बीच फ्रांस ने मध्यस्थता तेज कर दी है। राष्ट्रपति मैक्रों ने ट्रंप और पेजेशकियान से बात कर 'इस्लामाबाद वार्ता' को फिर से शुरू करने का प्रस्ताव दिया है। ईरान ने लेबनान में संघर्षविराम की शर्त रखी है, जबकि ट्रंप का फोकस ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने पर है। शुक्रवार को पेरिस में होने वाली बैठक इस संकट का समाधान निकालने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।
डोनाल्ड ट्रंप और इमैनुएल मैक्रों
- फोटो : ANI
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विस्तार
पश्चिम एशिया में युद्ध के बादलों के बीच कूटनीति की एक नई किरण दिखाई दी है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अमेरिका और ईरान के बीच ठप पड़ी शांति वार्ता को फिर से शुरू करने के लिए मोर्चा संभाल लिया है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के साथ अलग-अलग बातचीत की है।
मैक्रों की 'त्रि-स्तरीय' शांति योजना
मैक्रों का लक्ष्य इस्लामाबाद में नाकाम रही शांति वार्ता को फिर से शुरू करना है। उन्होंने एक तीन-सूत्रीय प्रस्ताव रखा है। इसके तहत, लेबनान सहित पूरे क्षेत्र में पूर्ण संघर्षविराम। बिना किसी शर्त और टैक्स के होर्मुज को दोबारा खोलना। फ्रांस और ब्रिटेन की अगुवाई में एक 'रक्षात्मक मिशन' की शुरुआत, जो समुद्र में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित बनाएगा। मैक्रों ने साफ कहा है कि इस तनाव को और ज्यादा बढ़ने से रोकने के लिए 'इस्लामाबाद संवाद' को तुरंत शुरू करना जरूरी है।
खबर यह भी है कि फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर शुक्रवार को पेरिस में एक सम्मेलन की सह अध्यक्षता करेंगे। इस सम्मेलन में वे गैर-युद्धरत राष्ट्र शामिल होंगे जो होर्मुज को लेकर चिंतित हैं। मैक्रों के कार्यालय ने बताया कि अन्य प्रतिभागी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से इसमें हिस्सा लेंगे। बयान में कहा गया है कि यूरोपीय और अन्य साझेदार एक पूरी तरह से रक्षात्मक मिशन में योगदान देने के लिए तैयार हैं। फ्रांस और ब्रिटेन पिछले कुछ हफ्तों से एक ऐसा अभियान स्थापित करने पर काम कर रहे हैं जिसके तहत तेल टैंकरों और कंटेनर जहाजों को सुरक्षा घेरा प्रदान किया जाए।
यह भी पढ़ें: सम्राट का चुनावी करियर: RJD से जीता पहला चुनाव, फिर लगातार तीन हार; BJP में आने के नौ साल में ही बनेंगे CM
'ईरान के पास परमाणु हथियार कभी नहीं होंगे'
वहीं इस बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की ओर से उन्हें बातचीत का प्रस्ताव मिला है। ट्रंप के मुताबिक, ईरान अब बहुत जल्द समझौता करना चाहता है, अमेरिकी नौसेना की घेराबंदी ने उनकी कमर तोड़ दी है। हालांकि, ट्रंप ने फिर कहा है कि ईरान के पास परमाणु हथियार कभी नहीं होंगे। दूसरी ओर, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने संकेत दिया है कि तेहरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करना होगा। ईरान ने स्पष्ट किया है कि कोई भी समझौता तभी मुमकिन है जब लेबनान में जारी हिंसा रुकेगी।
ग्राउंड जीरो पर हालात अब भी काफी नाजुक हैं। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र को पत्र लिखकर अमेरिकी घेराबंदी को संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। साथ ही, ईरान ने बहरीन, सऊदी अरब, कतर, यूएई और जॉर्डन जैसे पांच अरब देशों से मुआवजे की मांग की है। ईरान का आरोप है कि इन देशों ने अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ अमेरिकी और इस्राइली हमलों के लिए होने दिया।
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मैक्रों की 'त्रि-स्तरीय' शांति योजना
मैक्रों का लक्ष्य इस्लामाबाद में नाकाम रही शांति वार्ता को फिर से शुरू करना है। उन्होंने एक तीन-सूत्रीय प्रस्ताव रखा है। इसके तहत, लेबनान सहित पूरे क्षेत्र में पूर्ण संघर्षविराम। बिना किसी शर्त और टैक्स के होर्मुज को दोबारा खोलना। फ्रांस और ब्रिटेन की अगुवाई में एक 'रक्षात्मक मिशन' की शुरुआत, जो समुद्र में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित बनाएगा। मैक्रों ने साफ कहा है कि इस तनाव को और ज्यादा बढ़ने से रोकने के लिए 'इस्लामाबाद संवाद' को तुरंत शुरू करना जरूरी है।
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खबर यह भी है कि फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर शुक्रवार को पेरिस में एक सम्मेलन की सह अध्यक्षता करेंगे। इस सम्मेलन में वे गैर-युद्धरत राष्ट्र शामिल होंगे जो होर्मुज को लेकर चिंतित हैं। मैक्रों के कार्यालय ने बताया कि अन्य प्रतिभागी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से इसमें हिस्सा लेंगे। बयान में कहा गया है कि यूरोपीय और अन्य साझेदार एक पूरी तरह से रक्षात्मक मिशन में योगदान देने के लिए तैयार हैं। फ्रांस और ब्रिटेन पिछले कुछ हफ्तों से एक ऐसा अभियान स्थापित करने पर काम कर रहे हैं जिसके तहत तेल टैंकरों और कंटेनर जहाजों को सुरक्षा घेरा प्रदान किया जाए।
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'ईरान के पास परमाणु हथियार कभी नहीं होंगे'
वहीं इस बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की ओर से उन्हें बातचीत का प्रस्ताव मिला है। ट्रंप के मुताबिक, ईरान अब बहुत जल्द समझौता करना चाहता है, अमेरिकी नौसेना की घेराबंदी ने उनकी कमर तोड़ दी है। हालांकि, ट्रंप ने फिर कहा है कि ईरान के पास परमाणु हथियार कभी नहीं होंगे। दूसरी ओर, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने संकेत दिया है कि तेहरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करना होगा। ईरान ने स्पष्ट किया है कि कोई भी समझौता तभी मुमकिन है जब लेबनान में जारी हिंसा रुकेगी।
ग्राउंड जीरो पर हालात अब भी काफी नाजुक हैं। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र को पत्र लिखकर अमेरिकी घेराबंदी को संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। साथ ही, ईरान ने बहरीन, सऊदी अरब, कतर, यूएई और जॉर्डन जैसे पांच अरब देशों से मुआवजे की मांग की है। ईरान का आरोप है कि इन देशों ने अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ अमेरिकी और इस्राइली हमलों के लिए होने दिया।
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