फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Just by controlling your breath your courage to take risk will increase surprising revelation emerged research

सिर्फ सांसों पर काबू, और बढ़ जाएगी जोखिम उठाने की हिम्मत: रिसर्च में सामने आया चौंकाने वाला खुलासा

Tue, 28 Jul 2026 07:04 AM IST
प्रशांत तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत तिवारी Updated Tue, 28 Jul 2026 07:04 AM IST
सार

न्यूरॉन पत्रिका में प्रकाशित एक रिसर्च के अनुसार, गहरी सांस लेकर उसे धीरे-धीरे छोड़ने की आदत न केवल तनाव कम करती है, बल्कि मस्तिष्क को संभावित लाभ के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती है। इससे जोखिम लेने की क्षमता बढ़ सकती है और व्यक्ति दबावपूर्ण परिस्थितियों में बेहतर फैसले ले सकता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तकनीक खिलाड़ियों, आपातकालीन सेवाओं से जुड़े लोगों और तनाव से जूझ रहे लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी हो सकती है।

विज्ञापन
Just by controlling your breath your courage to take risk will increase surprising revelation emerged research
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

कभी-कभी किसी कठिन या मशक्कत वाले काम के दौरान हम गहरी सांस लेते हैं और फिर नई ऊर्जा के साथ जुट जाते हैं। गहरी सांस लेने और उसे धीरे-धीरे छोड़ने की प्रक्रिया न सिर्फ तनाव कम करती है, बल्कि शरीर और दिमाग को नए जोश से भी भर देती है। प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पत्रिका न्यूरॉन में प्रकाशित एक रिसर्च के मुताबिक, यदि सांसों पर नियंत्रण को आदत बना लिया जाए तो जीवन में जोखिम भरे फैसले लेने में हिचकिचाहट काफी कम हो सकती है।

विज्ञापन


सांसों का दिमाग और शरीर पर क्या असर पड़ता है?
वैज्ञानिकों के मुताबिक, जब कोई व्यक्ति थोड़ी देर तक सांस रोककर उसे धीरे-धीरे छोड़ता है, तो पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम यानी शरीर का आराम देने वाला तंत्रिका तंत्र सक्रिय हो जाता है। इससे मस्तिष्क संभावित फायदों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है। ब्रेन स्कैन से पता चला कि इस दौरान दिल और फेफड़ों से दिमाग तक ऐसे संकेत पहुंचते हैं, जो उसे शांत करते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तकनीक का नियमित अभ्यास तनाव, चिंता, पैनिक डिसऑर्डर और खान-पान की खराब आदतों में सुधार लाने में भी मददगार हो सकता है।
विज्ञापन


किन लोगों के लिए यह तकनीक सबसे ज्यादा फायदेमंद हो सकती है?
यह तकनीक जोखिम वाले पेशों से जुड़े लोगों, खिलाड़ियों और आपातकालीन सेवाएं देने वाले कर्मचारियों के लिए बेहद कारगर साबित हो सकती है। ऐसे लोगों को लगातार दबाव और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करना पड़ता है। नियंत्रित श्वास तकनीक उन्हें मानसिक रूप से शांत रखने के साथ-साथ बेहतर निर्णय लेने और नई ऊर्जा बनाए रखने में मदद कर सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रयोग में आखिर क्या किया गया था?
इंस्टीट्यूट ने औसत 25 वर्ष आयु वाले 41 लोगों की टीम पर यह प्रयोग किया। प्रतिभागियों को दो अलग-अलग श्वास तकनीकों के साथ जोखिम उठाने का टास्क दिया गया। पहले चरण में उन्हें सामान्य रूप से सांस लेते हुए टास्क पूरा करना था, जबकि दूसरे चरण में दो सेकंड तक सांस लेकर उसे आठ सेकंड तक धीरे-धीरे छोड़ते हुए वही टास्क करना था। जीतने पर 10 से 30 यूरो का पुरस्कार और हारने पर 5 से 15 यूरो का नुकसान तय किया गया था।


ये भी पढ़ें: पश्चिम में जेंटल पैरेंटिंग का मिथक टूटा: बिना डांट-फटकार जिद्दी हो रहे बच्चे; किसने छेड़ी वैश्विक बहस?

प्रयोग के नतीजों में क्या चौंकाने वाला सामने आया?
प्रयोग के नतीजे बेहद दिलचस्प रहे। शोधकर्ताओं ने पाया कि लंबे समय तक धीरे-धीरे सांस छोड़ने वाली तकनीक अपनाने के दौरान प्रतिभागियों की हृदयगति अपेक्षाकृत तेज रही और उन्होंने अधिक जोखिम उठाने वाले फैसले लिए। वैज्ञानिकों के अनुसार, ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि इस दौरान मस्तिष्क संभावित पुरस्कार को लेकर अधिक संवेदनशील हो गया था, जिससे जोखिम लेने की मानसिक तैयारी बढ़ गई।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed