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अमेरिका: शरण मांगने वालों के लिए नया नियम लागू, अब कई मामलों में बिना इंटरव्यू सीधे कोर्ट भेजे जाएंगे आवेदन
Tue, 28 Jul 2026 07:48 AM IST
Pavan
पीटीआई, वॉशिंगटन
पीटीआई, वॉशिंगटन
Published by: Pavan
Updated Tue, 28 Jul 2026 07:48 AM IST
सार
अमेरिका ने शरण मांगने वालों के लिए नया नियम लागू किया है। इसके तहत कुछ मामलों में अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा बिना इंटरव्यू लिए आवेदन सीधे इमिग्रेशन कोर्ट भेज सकेगी। सरकार का कहना है कि इससे 14 लाख लंबित मामलों का निपटारा तेज होगा, व्यवस्था के दुरुपयोग पर रोक लगेगी और वास्तविक शरणार्थियों के मामलों का जल्द फैसला हो सकेगा।
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अमेरिका में नया शरण नियम लागू
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
अमेरिका ने शरण मांगने वाले कुछ प्रवासियों के लिए नया नियम लागू किया है। यह नियम मंगलवार से तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। इसके तहत कुछ मामलों में अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) शरण आवेदन करने वालों का इंटरव्यू लिए बिना ही उनके आवेदन सीधे आप्रवासन अदालत भेज सकेगी। अमेरिकी सरकार का कहना है कि इस बदलाव का मकसद शरण से जुड़े लंबित मामलों का बोझ कम करना और असली जरूरतमंद लोगों के मामलों का जल्द निपटारा करना है। फिलहाल यूएससीआईएस के पास करीब 14 लाख (1.4 मिलियन) शरण आवेदन लंबित हैं।
यह भी पढ़ें- 'हमें कोई नहीं बताएगा क्या बेचना है': तुर्किये को F-35 की बिक्री नेतन्याहू से नाराज हुए ट्रंप; क्या है मामला?
यूएससीआईएस के निदेशक जोसेफ एडलो ने कहा कि अमेरिका की शरण व्यवस्था उन लोगों की सुरक्षा के लिए है, जिन्हें वास्तव में अपने देश में उत्पीड़न का डर है। नया नियम यह सुनिश्चित करेगा कि सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल ऐसे वास्तविक मामलों के निपटारे में हो, न कि उन लोगों के लिए जो व्यवस्था का गलत फायदा उठाने की कोशिश करते हैं।
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क्या है नया बदलाव?
अभी तक जो लोग अमेरिका में रहते हुए सकारात्मक शरण के लिए आवेदन करते थे और जिनके खिलाफ निष्कासन की कार्रवाई नहीं चल रही होती थी, उनका आवेदन पहले यूएससीआईएस अधिकारी सुनते थे। अगर आवेदन खारिज होता था, तो मामला इमिग्रेशन जज के पास जाता था, जहां दोबारा पूरी सुनवाई होती थी। नए नियम के बाद यूएससीआईएस चाहे तो ऐसे मामलों में बिना इंटरव्यू लिए ही आवेदन सीधे आप्रवासन जज के पास भेज सकती है। इससे एक अतिरिक्त प्रक्रिया खत्म होगी और मामलों के निपटारे में लगने वाला समय कम होगा।
किन मामलों पर होगा असर?
यह बदलाव केवल अफर्मेटिव असाइलम मामलों पर लागू होगा। जिन लोगों के खिलाफ पहले से निष्कासन की कार्रवाई चल रही है और जो अदालत में 'डिफेंसिव असाइलम'का दावा करते हैं, उनके मामलों की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
सरकार ने क्या कहा?
यूएससीआईएस का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में कई लोगों को शरण के लिए दो बार सुनवाई का अवसर मिल जाता था, जिससे पूरी प्रक्रिया लंबी हो जाती थी। नए नियम से यह समय कम होगा और लंबित मामलों का बोझ घटाने में मदद मिलेगी। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग के जनरल काउंसल जेम्स पर्सिवल ने कहा कि लंबे समय से कुछ लोग शरण प्रणाली का इस्तेमाल केवल समय बढ़ाने और काम करने की अनुमति हासिल करने के लिए कर रहे थे। उनका कहना है कि जानबूझकर मामलों में देरी करना प्रभावी आव्रजन व्यवस्था के सामने सबसे बड़ी चुनौती है।
यह भी पढ़ें- Toronto Shooting: टोरंटो में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास पर फायरिंग, चार महीने में दूसरी बार चली गोलियां; जांच तेज
कितने मामलों पर पड़ेगा असर?
गृह सुरक्षा विभाग के अनुमान के अनुसार, इस बदलाव के बाद हर साल 1.32 लाख से अधिक शरण आवेदन यूएससीआईएस से सीधे आप्रवासन कोर्ट भेजे जा सकते हैं। इससे यूएससीआईएस के लंबित मामलों में शामिल करीब 31 प्रतिशत आवेदन प्रभावित होंगे। सरकार का मानना है कि इससे शरण संबंधी मामलों का निपटारा पहले की तुलना में तेज हो सकेगा।
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यूएससीआईएस के निदेशक जोसेफ एडलो ने कहा कि अमेरिका की शरण व्यवस्था उन लोगों की सुरक्षा के लिए है, जिन्हें वास्तव में अपने देश में उत्पीड़न का डर है। नया नियम यह सुनिश्चित करेगा कि सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल ऐसे वास्तविक मामलों के निपटारे में हो, न कि उन लोगों के लिए जो व्यवस्था का गलत फायदा उठाने की कोशिश करते हैं।
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क्या है नया बदलाव?
अभी तक जो लोग अमेरिका में रहते हुए सकारात्मक शरण के लिए आवेदन करते थे और जिनके खिलाफ निष्कासन की कार्रवाई नहीं चल रही होती थी, उनका आवेदन पहले यूएससीआईएस अधिकारी सुनते थे। अगर आवेदन खारिज होता था, तो मामला इमिग्रेशन जज के पास जाता था, जहां दोबारा पूरी सुनवाई होती थी। नए नियम के बाद यूएससीआईएस चाहे तो ऐसे मामलों में बिना इंटरव्यू लिए ही आवेदन सीधे आप्रवासन जज के पास भेज सकती है। इससे एक अतिरिक्त प्रक्रिया खत्म होगी और मामलों के निपटारे में लगने वाला समय कम होगा।
किन मामलों पर होगा असर?
यह बदलाव केवल अफर्मेटिव असाइलम मामलों पर लागू होगा। जिन लोगों के खिलाफ पहले से निष्कासन की कार्रवाई चल रही है और जो अदालत में 'डिफेंसिव असाइलम'का दावा करते हैं, उनके मामलों की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
सरकार ने क्या कहा?
यूएससीआईएस का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में कई लोगों को शरण के लिए दो बार सुनवाई का अवसर मिल जाता था, जिससे पूरी प्रक्रिया लंबी हो जाती थी। नए नियम से यह समय कम होगा और लंबित मामलों का बोझ घटाने में मदद मिलेगी। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग के जनरल काउंसल जेम्स पर्सिवल ने कहा कि लंबे समय से कुछ लोग शरण प्रणाली का इस्तेमाल केवल समय बढ़ाने और काम करने की अनुमति हासिल करने के लिए कर रहे थे। उनका कहना है कि जानबूझकर मामलों में देरी करना प्रभावी आव्रजन व्यवस्था के सामने सबसे बड़ी चुनौती है।
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कितने मामलों पर पड़ेगा असर?
गृह सुरक्षा विभाग के अनुमान के अनुसार, इस बदलाव के बाद हर साल 1.32 लाख से अधिक शरण आवेदन यूएससीआईएस से सीधे आप्रवासन कोर्ट भेजे जा सकते हैं। इससे यूएससीआईएस के लंबित मामलों में शामिल करीब 31 प्रतिशत आवेदन प्रभावित होंगे। सरकार का मानना है कि इससे शरण संबंधी मामलों का निपटारा पहले की तुलना में तेज हो सकेगा।