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China: दो पूर्व रक्षा मंत्रियों पर कार्रवाई करने के पीछे ये है चीन की मंशा, ड्रैगन के लिए 'युद्ध ही शांति' है
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का भ्रष्टाचार पर एक्शन
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अमर उजाला
विस्तार
चीन में सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दो पूर्व रक्षा मंत्रियों ली शांगफू और वेई फेंगहे को पार्टी से निष्कासित कर दिया। अब इन दोनों पर मुकदमा चलाया जाएगा, जिसमें उन्हें उम्रकैद भी हो सकती है। इससे पहले इस साल की शुरुआत में चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी के नौ वरिष्ठ अफसरों को बर्खास्त कर दिया गया था। वहीं अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग कमजोर हो रहे हैं या बड़ा तूफान आने से पहले का शोर है?चीनी सैन्य अड्डों का लगातार दौरा कर रहे शी जिनपिंग
ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) में चाइना स्टडीज के फैलो कल्पित मानकीकर कहते हैं कि चीन पिछले डेढ़ साल से चीनी सेना पीएलए में हो रहे भ्रष्टाचार को लेकर काफी एक्टिव है। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) में सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (सीएमसी) सबसे पावरफुल है, जिसके हेड खुद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग हैं। वह पिछले कुछ समय से लगातार चीनी सैन्य अड्डों का दौरा कर रहे हैं और चीनी सैनिकों से मुलाकात कर रहे हैं। अपने दौरे के दौरान वे चीनी सेना की खामियों पर भी पैनी निगाह रख रहे हैं, जहां उन्हें भ्रष्टाचार के तार सीधे पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के सैन्य जनरलों से जुड़ते दिखाई दे रहे हैं। जिन दो पूर्व रक्षा मंत्रियों ली शांगफू और वेई फेंगहे पर कार्रवाई हुई है, उसके पीछे भी भ्रष्टाचार बड़ी वजह है।
कल्पित के मुताबिक शी जिनपिंग इन दिनों सेना को आधुनिक बनाने पर जोर दे रहे हैं। हाल ही में यनान शहर में चीनी सैनिकों के साथ एक मुलाकात में शी जिनपिंग ने कहा था कि हमें अपने सैनिकों को बेस्ट ट्रेनिंग देने की जरूरत है। सेना में किसी भ्रष्ट के लिए छिपने की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। जिनपिंग का यह भी कहना था कि सेना चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के प्रति पूरी तरह से निष्ठा दिखाए। इस दौरान उऩ्होंने एक बड़ी बात भी बोली, उन्होंने कहा कि चीनी सेना की राजनीति, विचारधारा, काम की शैली और अनुशासन में 'बहुत गहराई तक समस्याएं' हैं।
'सुधारों' के जरिए, बड़ी तैयारी
यह पूछने पर कि क्या जनरलों और चीनी राष्ट्रपति के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है, तो इस पर कल्पित मानकीकर कहते हैं कि चीन अपनी अंदरूनी कमियां सुधार रहा है। चीन की रॉकेट फोर्स में भ्रष्टाचार के कई बड़े मामले सामने आए हैं। सेना में घटिया क्वॉलिटी के इक्विमेंट्स आ रहे हैं। इससे सेना के मनोबल पर असर पड़ रहा है। वह कहते हैं कि आमतौर पर अखबारों में चीनी सेना में भ्रष्टाचार को लेकर खबरें नहीं छपती हैं। लेकिन हाल ही में चीनी सरकार के मुखपत्र द पीपुल्स डेली में भी भ्रष्टाचार को लेकर कई खबरें छपी हैं। इससे जाहिर होता है कि वह सेना में ही संदेश देना चाह रहा है कि सेना में अनिमियतताएं बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। वह कहते हैं कि हो सकता है कि चीनी सेना के जनरलों और राष्ट्रपति शी जिनपिंग में कुछ अनबन हो, लेकिन वे सर्वोच्च सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के हेड हैं। चीनी राष्ट्रपति इन 'सुधारों' के जरिए, वह कुछ बड़ी तैयारी कर रहे हैं। वह कहते हैं कि जब भी शी जिनपिंग के ऊपर कोई बड़ा संकट आया है कि उनके लिए 'युद्ध ही शांति' है।
जिनपिंग ने भ्रष्टाचार पर दिखाई बेहद सख्ती
भूतपूर्व सेना अधिकारी और रक्षा मामलों के जानकार प्रवीण साहनी भी कल्पित मानकीकर की राय से इत्तेफाक रखते हैं। वह कहते हैं कि शी जिनपिंग के नेतृत्व में पीएलए में बहुत बदलाव आया है। 2012 में सत्ता संभालने के बाद से शी ने कम्यूनिस्ट पार्टी और सरकारी अधिकारियों में फैले भ्रष्टाचार पर बेहद सख्ती दिखाई है। इनमें पीपल्स लिबरेशन आर्मी खासतौर पर उनके निशाने पर रही है। दो रक्षा मंत्रियों को निकाले जाने की वजह का साफतौर पर एलान किया गया है। लेकिन इससे यह भी पता चलता है कि शी जिनपिंग पीएलए को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए कितने प्रतिबद्ध हैं? यह पीएलए को आधुनिक लड़ाई के लिए तैयार करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
भ्रष्टाचार के बावजूद चीन की सेना हो रही आधुनिक
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार प्रोफेसर रिजवान का कहना है कि चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी में भ्रष्टाचार के कई नए खुलासे सामने आए हैं। जैसे मिसाइलों में ईंधन के बजाय पानी भरा जा रहा था। मिसाइल के साइलो पर ऐसे ढक्कन लगे हैं, जो काम नहीं करते, जिससे मिसाइलों के प्रक्षेपण में बाधा उत्पन्न हुई। भ्रष्टाचार के इन मामलों ने पीएलए की क्षमताओं को कम कर दिया है। जिससे राष्ट्रपति शी जिनपिंग में अब बड़ी सैन्य कार्रवाई के बारे में सोचने की संभावना कम कर दी है। वहीं, शी जिनपिंग ने घोटाले में फंसे कम से कम एक दर्जन पीएलए नेताओं को हटाकर करारा जवाब दिया है। वह कहते हैं कि भ्रष्टाचार के बावजूद चीन की सेना अभी भी तेजी से आधुनिकीकरण कर रही है। भले ही पिछले साल पीएलए में शी जिनपिंग का भरोसा कम हुआ हो, लेकिन वह स्पष्ट रूप से कमियों को जल्द से जल्द ठीक करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, और इस बात की पूरी संभावना है कि वह इसमें सफल होंगे।
'शक्ति बंदूक की नली से निकलती है'
प्रो. रिजवान कहते हैं कि माओत्से तुंग ने कहा था कि शक्ति बंदूक की नली से निकलती है और शी जिनपिंग इस सिद्धांत को अच्छे से समझते हैं। शी जिनपिंग ने पीएलए को 2027 तक ताइवान पर कब्जा करने के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया है और उन्होंने उसी के अनुसार चीन सेना की रणनीति तैयार की जा रही है। जिनपिंग अपनी सेना को 2050 तक ‘विश्व स्तरीय' बनाने के लक्ष्य पर काम कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने अरबों डॉलर का निवेश किया है। चीनी सेना युद्ध के सभी क्षेत्रों में तेजी से खुद को मॉर्डन बना रही है। चीन की वायु सेना पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों और लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों की क्षमता में तेजी से सुधार कर रही है। इसके अलावा चीनी नौसेना की बात करें, तो उनके पास अत्यधिक सक्षम युद्धपोत हैं। कुछ तैयार हो रहे हैं, तो कुछ का ट्रायल भी शुरू हो गया है।
रिजवान के मुताबिक रॉकेट फोर्स में घोटालों का होना चीनी सेना के लिए एक बड़ा झटका है। पीएलए की रॉकेट फोर्स में नियुक्ति के लिए वरिष्ठ अफसरों की सबसे ज्यादा सख्त जांच होती है, क्योंकि उन पर देश के परमाणु हथियारों की देखरेख की जिम्मेदारी होती है। इस मामले में किसी इकलौते आदमी की बात नहीं है, बल्कि और भी कई वरिष्ठ अफसर शामिल हो सकते हैं।
चीनी पत्रकार ने पहले ही कर दी थी भविष्यवाणी
वहीं चीनी सेना के खिलाफ बेबाकी से लिखने वाली चीनी पत्रकार जेनिफर जेंग कहती हैं कि सीसीपी ने एलान किया है कि चीन के दो पूर्व रक्षा मंत्रियों ली शांगफू और वेई फेंगहे को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। अब उन्हें अदालती कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। वह कहती हैं कि उन्होंने लगभग एक साल पहले ही "भविष्यवाणी" कर दी थी कि वेई फेंगहे मुश्किल में हैं। उस समय ज़्यादातर लोग उनके बारे में बात नहीं कर रहे थे। पिछले साल रॉकेट फोर्स डिप्टी कमांडर वू गुओहुआ ने 6 जुलाई को कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। 26 जून को कमांडर ली युचाओ को एक मीटिंग के दौरान अगवा कर लिया गया। पूर्व कमांडर और रक्षा मंत्री वेई फेंगहे जांच के घेरे में हैं। तीन जनरलों का कोई अतापता नहीं हैं। इससे लगता है कि चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी में कुछ गड़बड़ है। और अगर ऐसा होता है कि इन सबका शी जिनपिंग की ताइवान पर हमले की योजना पर क्या असर पड़ेगा?
पूर्व रक्षा मंत्री ली शांगफू को लगभग दो महीने तक गायब रहने के के बाद अक्तूबर 2023 में हटा दिया गया था। वेई पांच साल के कार्यकाल के बाद 2023 में रक्षा मंत्री के तौर पर रिटायर हुए थे। ली पर आरोप है कि उन्होंने घटिया मिलि्ट्री उपकरणों राजनीतिक और औद्योगिक माहौल को खराब किया। पार्टी के उद्देश्यों, राष्ट्रीय रक्षा और सशस्त्र बलों को मानसिक तौर पर भारी नुकसान पहुंचाया। ली शांगफू पर बतौर गिफ्ट रिश्वत लेने का भी आरोप लगा है। उन पर अपने पद का फायदा उठाने, दूसरों को लाभ पहुंचाने के लिए बड़ी रकम लेने और अनुचित लाभ के लिए दूसरों को धन देने का आरोप था। उनके पूर्ववर्ती वेई फेंगहे पर भी रिश्वत लेने का आरोप लगा है। अपने पद का लाभ उठाने और दूसरों के लिए लाभा प्राप्त करने के लिए रकम लेने और अनुचित लाभ प्राप्त करने के लिए दूसरों को पैसे देने का संदेह भी है। वेई का मामला सैन्य अभियोजन में भेजा गया है।