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Pakistan: फ्रांस की महिला से बच्चों के सामने दुष्कर्म, दोषियों को सजा-ए-मौत; मस्क ने भी कर दी फैसले की तारीफ

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Devesh Tripathi Updated Thu, 04 Jun 2026 08:26 AM IST
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सार

पाकिस्तान की लाहौर हाईकोर्ट ने 2020 के चर्चित मोटरवे सामूहिक दुष्कर्म मामले में दो दोषियों की मौत की सजा बरकरार रखी है। यह घटना तब हुई थी, जब एक फ्रांसीसी महिला अपने बच्चों के साथ यात्रा के दौरान सड़क पर फंस गई थी। आरोपियों ने महिला के बच्चों के सामने उसके साथ दुष्कर्म और लूटपाट की थी।

Motorway case French woman molestation in front of children Guilty to face death penalty elon Musk praises
मोटरवे सामूहिक दुष्कर्म मामला - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

पाकिस्तान में एक सनसनीखेज मामले में लाहौर हाईकोर्ट ने दो दुष्कर्मियों की मौत की सजा को बरकरार रखा है। इन व्यक्तियों को एक फ्रांसीसी पर्यटक से उसके बच्चों के सामने सामूहिक दुष्कर्म करने का दोषी ठहराया गया था। यह घटना सितंबर 2020 में सियालकोट-लाहौर मोटरवे पर हुई थी, जब महिला की कार का ईंधन खत्म हो गया था।



वहीं, पाकिस्तानी अदालत के इस फैसले की टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने भी खुलकर तारीफ की है। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि शाबाश पाकिस्तान। पश्चिम में भी हमें ऐसा ही करना चाहिए। 
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क्या था 2020 का मोटरवे कांड?
नौ सितंबर 2020 की रात एक फ्रांसीसी महिला अपने तीन बच्चों के साथ सियालकोट-लाहौर मोटरवे पर यात्रा कर रही थी। देर रात उनकी कार का ईंधन खत्म हो गया, जिससे परिवार सड़क किनारे फंस गया। जांचकर्ताओं के अनुसार, महिला ने मदद का इंतजार करते हुए कार के अंदर ही रहने और दरवाजे बंद रखने का प्रयास किया। 

इसी दौरान हमलावरों ने कार की खिड़की तोड़ दी, महिला को बाहर घसीटा और उसके बच्चों के सामने बंदूक की नोंक पर दुष्कर्म किया। इसके बाद, उन्होंने परिवार से नकदी, गहने और बैंक कार्ड लूट लिए और फरार हो गए।

डीएनए और मोबाइल डेटा से खुला केस
अपराधियों की तलाश तेजी से शुरू हुई। पुलिस ने मोबाइल फोन डेटा का इस्तेमाल करके संदिग्धों की तलाश को सीमित किया। इसके बाद अपराध स्थल से मिले डीएनए साक्ष्य के आधार पर आरोपियों को गिरफ्तार किया। जांचकर्ताओं ने बताया कि पीड़िता ने कानूनी कार्यवाही के दौरान दोनों पुरुषों की पहचान की थी। पकड़े गए आरोपियों में से एक शफकत अली ने मजिस्ट्रेट के सामने अपना जुर्म कबूल भी कर लिया था।

2021 में सुनाई गई थी मौत की सजा
इन सबूतों के आधार पर एक आतंकवाद-रोधी अदालत ने मार्च 2021 में दोनों को सामूहिक दुष्कर्म, अपहरण, डकैती और आतंकवाद से संबंधित अपराधों का दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी। इसके साथ ही उन्हें आजीवन कारावास और अतिरिक्त जेल की सजाएं भी दी गई थीं।

हाईकोर्ट में अपील खारिज
इस जघन्य अपराध ने पूरे देश में विरोध प्रदर्शनों और आक्रोश को जन्म दिया था। उस समय के लाहौर पुलिस प्रमुख उमर शेख की टिप्पणियों ने इस गुस्से को और भड़का दिया था, जिन्होंने सवाल उठाया था कि महिला रात में यात्रा क्यों कर रही थी और उसे कोई और रास्ता चुनना चाहिए था।

लाहौर हाईकोर्ट में दायर अपनी अपील में दोषियों के वकीलों ने अभियोजन पक्ष के मामले में कमजोरियों और विसंगतियों का दावा किया था। वकीलों ने सबूतों को अविश्वसनीय बताते हुए सजा को रद्द करने की मांग की थी। हालांकि, अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि दोनों पुरुषों के खिलाफ मामला मजबूत सबूतों पर आधारित है। इसके साथ ही निचली अदालत ने सभी उपलब्ध सामग्री की सावधानीपूर्वक जांच के बाद ही फैसला सुनाया था।

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पाकिस्तान के मीडिया आउटलेट 'डॉन' की रिपोर्टों के अनुसार, न्यायाधीश अभियोजन पक्ष की दलीलों से सहमत हुए और बुधवार को दोनों दोषियों की अपीलों को खारिज कर दिया। इस फैसले के साथ निचली अदालत द्वारा सुनाई गई मौत की सजा अब प्रभावी रहेगी।

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