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Turkiye: पाकिस्तान के भाईजान को भारत ने नहीं दिया भाव, अब संबंध सुधारने की कोशिशें कर रहा तुर्किये; जानें वजह

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सिंगापुर Published by: Devesh Tripathi Updated Thu, 04 Jun 2026 10:47 AM IST
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सार

तुर्किये के विदेश मंत्री हकान फिदान ने भारत से अपील की है कि वह तुर्किये-भारत संबंधों को पाकिस्तान के नजरिए से न देखे। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच कोई द्विपक्षीय विवाद या नकारात्मक ऐतिहासिक विरासत नहीं है और सकारात्मक एजेंडे पर आगे बढ़ने की पर्याप्त संभावनाएं हैं।

India ignore Turkiye over pakistan now tries to improve relation Hakan fidan says no bilateral dispute cyprus
तुर्किये के विदेश मंत्री हाकन फिदान - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/X@HakanFidan
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विस्तार

कश्मीर से लेकर ऑपरेशन सिंदूर के मामले तक तुर्किये हर मौके पर पाकिस्तान के साथ खड़ा नजर आया है। इसके चलते भारत के साथ तुर्किये के संबंध बिगड़े हैं। हालांकि, तुर्किये के रुख में कोई खास बदलाव नजर नहीं आया है, लेकिन अब वह भारत से संबंधों को सुधारने की कोशिश में जुटा है। तुर्किये ने कहा कि हम इकलौते देश नहीं हैं, जिसके पाकिस्तान के साथ अच्छे और भाईचारे के संबंध हैं, दुनिया में ऐसे संबंधों वाले अन्य देश भी हैं। 


सिंगापुर में इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रैटजिक स्टडीज (आईआईएसएस) के कार्यक्रम में बुधवार (तीन जून) को तुर्किये के विदेश मंत्री हकान फिदान ने भारत आग्रह किया कि वे अंकारा और नई दिल्ली के संबंधों को पाकिस्तान को सामने रखते हुए न देखे। वहीं, उन्होंने पाकिस्तान के साथ तुर्किये के संबंधों के बचाव में भी दलीलें दीं।
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भारत के संबंधों को सुधारने की दिशा में कदम
हकान फिदान ने इस बात पर जोर दिया कि तुर्किये के पास भारत के साथ अच्छे संबंध रखने की पर्याप्त वजह हैं। फिदान ने कहा कि भारत के साथ तुर्की का कोई भी द्विपक्षीय विवाद नहीं है। भारत के साथ हमारा कोई बुरा इतिहास नहीं है। 
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उन्होंने कहा, ''कुछ मुद्दों पर रूस के साथ, कुछ मुद्दों पर अमेरिका के साथ, कुछ मुद्दों पर कुछ यूरोपीय देशों के साथ हमारे मतभेद हैं, लेकिन हम एक नकारात्मक मुद्दे को अलग करके सकारात्मक एजेंडा पर आगे बढ़ सकते हैं। मेरा मानना है कि तुर्किये और भारत के बीच भी यही होना चाहिए।''

तुर्किये के विदेश मंत्री की ये दलीलें ऐसे समय में सामने आई हैं, जब ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अंकारा की ओर से पाकिस्तान की खुलकर मदद करने की बात जगजाहिर हो चुकी है। तुर्किये ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को आत्मघाती ड्रोन इहा की बड़ी खेप दी थी। इतना ही नहीं, संयुक्त राष्ट्र से लेकर कई सार्वजनिक मंचों पर तुर्किये की ओर से पाकिस्तान की तरह ही कश्मीर राग अलापा गया है।

भारत ने कैसे दिया सख्त जवाब?
गौरतलब है कि ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के समर्थन में खुलकर उतरने के बाद भारत के साथ तुर्किये के संबंध ठंडे बस्ते में ही रहे हैं। भारतीय अधिकारियों ने पिछले साल राजधानी में आयोजित तुर्किये के राष्ट्रीय दिवस समारोह में भाग नहीं लिया, जिससे अंकारा के प्रति नई दिल्ली की नाराजगी स्पष्ट होती है। हालांकि, अप्रैल 2026 में दोनों देशों ने 12वीं विदेश कार्यालय परामर्श बैठक (एफओसी) आयोजित की, जिससे संबंधों में संभावित सुधार का संकेत मिला।

भारत-तुर्किये के बीच तनाव के चलते नई दिल्ली ने साइप्रस के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। साइप्रस का तुर्किये के साथ 1974 से ही क्षेत्रीय विवाद चला आ रहा है। पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली अंतरराष्ट्रीय यात्रा साइप्रस की थी। साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स भी पिछले महीने नई दिल्ली आए थे और इस दौरान उनका भव्य स्वागत किया गया था।
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