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Artemis II: अंतरिक्ष में टॉयलेट का जिक्र! आर्टेमिस-2 में गए यात्रियों के कमांडर ने पहले संदेश में क्या कहा?
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: अमन तिवारी
Updated Thu, 02 Apr 2026 09:10 AM IST
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सार
नासा का आर्टेमिस-2 मिशन लॉन्च हो गया है। चार अंतरिक्ष यात्री ओरियन कैप्सूल में सवार होकर चांद की ओर बढ़ रहे हैं। 10 दिनों के इस मिशन में यात्री चांद की परिक्रमा करेंगे और गहरे अंतरिक्ष के प्रभावों का अध्ययन करेंगे। इस बीच अंतरिक्ष से कमांडर रीड वाइसमैन ने पहला संदेश भी भेजा है।
नासा का आर्टेमिस-II मिशन लॉन्च
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने आर्टेमिस-2 मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से एसएलएस (SLS) रॉकेट ने 'इंटीग्रिटी' नाम के ओरियन कैप्सूल को अंतरिक्ष में पहुंचाया। भारतीय समय के अनुसार यह लॉन्चिंग गुरुवार सुबह 4:05 बजे हुई। इस मिशन के साथ ही इंसान करीब 54 साल बाद एक बार फिर चांद की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इस मिशन को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नासा के आर्टेमिस 2 मिशन के सफल प्रक्षेपण पर नासा की टीम और अंतरिक्ष यात्रियों को बधाई दी है। उन्होंने इस लॉन्च को अद्भुत बताया।
मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल
इस ऐतिहासिक मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं। टीम की कमान रीड वाइसमैन संभाल रहे हैं। उनके साथ पायलट विक्टर ग्लोवर, मिशन विशेषज्ञ क्रिस्टीना कोच और कनाडा के जेरेमी हैनसेन यात्रा कर रहे हैं। लॉन्चिंग के एक घंटे बाद रॉकेट ने कैप्सूल को पृथ्वी की ऊंची कक्षा में पहुंचा दिया। अब अंतरिक्ष यात्री अगले 25 घंटों तक कैप्सूल के सभी सिस्टम की जांच करेंगे। इसके बाद वे चांद की ओर अपनी मुख्य यात्रा शुरू करेंगे।
ये भी पढ़ें: 54 साल बाद फिर चांद की उड़ान: नासा का आर्टेमिस-II मिशन लॉन्च; 10 दिन तक चंद्रमा की परिक्रमा करेंगे एस्ट्रोनॉट
अंतरिक्ष से आया पहला संदेश
इस बीच अंतरिक्ष से पहला संदेश भी आ गया है। संदेश में कमांडर रीड वाइसमैन ने बताया कि 'इंटीग्रिटी' पर सूर्योदय हो रहा है। इसी बीच मिशन के शुरुआती चरण में मिशन विशेषज्ञ क्रिस्टीना कोच ने अंतरिक्ष यान के टॉयलेट को ठीक करने का जरूरी काम भी संभाला ताकि 10 दिन की यात्रा आरामदायक रहे।
शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों की होगी जांच
यह दस दिन की यात्रा अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी से करीब 4.06 लाख किलोमीटर दूर तक ले जाएगी। अंतरिक्ष यात्री चांद के करीब जाएंगे लेकिन वहां उतरेंगे नहीं। वे चांद की परिक्रमा करके सुरक्षित पृथ्वी पर लौटेंगे। इस दौरान वैज्ञानिक 'ऑर्गन-ऑन-ए-चिप' तकनीक से इंसानी शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करेंगे। वे देखेंगे कि गहरे अंतरिक्ष के रेडिएशन से डीएनए (DNA) को कितना नुकसान होता है।
इस मिशन की लॉन्चिंग पहले कई बार टली थी। फरवरी और मार्च में तकनीकी दिक्कतों और ईंधन की जांच के कारण इसे समय पर नहीं भेजा जा सका था। आखिरकार सभी तैयारियों के बाद इसे एक अप्रैल (अमेरिकी समय) को लॉन्च कर दिया गया।
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मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल
इस ऐतिहासिक मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं। टीम की कमान रीड वाइसमैन संभाल रहे हैं। उनके साथ पायलट विक्टर ग्लोवर, मिशन विशेषज्ञ क्रिस्टीना कोच और कनाडा के जेरेमी हैनसेन यात्रा कर रहे हैं। लॉन्चिंग के एक घंटे बाद रॉकेट ने कैप्सूल को पृथ्वी की ऊंची कक्षा में पहुंचा दिया। अब अंतरिक्ष यात्री अगले 25 घंटों तक कैप्सूल के सभी सिस्टम की जांच करेंगे। इसके बाद वे चांद की ओर अपनी मुख्य यात्रा शुरू करेंगे।
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अंतरिक्ष से आया पहला संदेश
इस बीच अंतरिक्ष से पहला संदेश भी आ गया है। संदेश में कमांडर रीड वाइसमैन ने बताया कि 'इंटीग्रिटी' पर सूर्योदय हो रहा है। इसी बीच मिशन के शुरुआती चरण में मिशन विशेषज्ञ क्रिस्टीना कोच ने अंतरिक्ष यान के टॉयलेट को ठीक करने का जरूरी काम भी संभाला ताकि 10 दिन की यात्रा आरामदायक रहे।
शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों की होगी जांच
यह दस दिन की यात्रा अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी से करीब 4.06 लाख किलोमीटर दूर तक ले जाएगी। अंतरिक्ष यात्री चांद के करीब जाएंगे लेकिन वहां उतरेंगे नहीं। वे चांद की परिक्रमा करके सुरक्षित पृथ्वी पर लौटेंगे। इस दौरान वैज्ञानिक 'ऑर्गन-ऑन-ए-चिप' तकनीक से इंसानी शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करेंगे। वे देखेंगे कि गहरे अंतरिक्ष के रेडिएशन से डीएनए (DNA) को कितना नुकसान होता है।
इस मिशन की लॉन्चिंग पहले कई बार टली थी। फरवरी और मार्च में तकनीकी दिक्कतों और ईंधन की जांच के कारण इसे समय पर नहीं भेजा जा सका था। आखिरकार सभी तैयारियों के बाद इसे एक अप्रैल (अमेरिकी समय) को लॉन्च कर दिया गया।
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