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Nepal: पूर्व पीएम केपी ओली के बाद देउबा पर भी बालेन सरकार ने कसा शिकंजा, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में वारंट जारी

आईएएनएस, काठमांडू Published by: Himanshu Singh Chandel Updated Wed, 08 Apr 2026 06:24 PM IST
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सार

नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा और उनकी पत्नी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ है। यह कार्रवाई जले हुए नोटों के मामले की जांच के बाद हुई है। दोनों इस समय देश से बाहर हैं और इंटरपोल नोटिस की तैयारी चल रही है।

Nepal  ex pm Sher Bahadur Deuba his wife arrest warrant issued  money laundering case
नेपाल के पूर्व पीएम शेर बहादुर देउबा - फोटो : IANS
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विस्तार

नेपाल की राजनीति में बड़ा उथल-पुथल देखने को मिल रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा और उनकी पत्नी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तारी वारंट जारी होने से सियासी माहौल गरमा गया है। इससे पहले केपी शर्मा ओली पर भी कार्रवाई की जा चुकी है, जिससे साफ है कि नई सरकार भ्रष्टाचार के मामलों में सख्ती दिखा रही है।

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इस पूरे मामले में काठमांडू जिला अदालत ने जांच एजेंसी की मांग पर यह वारंट जारी किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फैसला जज महेंद्र खड़का की पीठ की मंजूरी के बाद लिया गया। जांच एजेंसी लंबे समय से देउबा, उनकी पत्नी और अन्य नेताओं पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच कर रही थी।
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क्या है मनी लॉन्ड्रिंग का पूरा मामला?
बताया जा रहा है कि पिछले साल सितंबर में हुए जेन-जी आंदोलन के दौरान कई नेताओं के घरों से जली हुई नकदी की तस्वीरें और वीडियो सामने आए थे। इनमें देउबा के घर से जुड़े दृश्य भी थे। फॉरेंसिक जांच में इन नोटों के असली होने की पुष्टि हुई, जिसके बाद मामला गंभीर हो गया और व्यापक जांच शुरू की गई।

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क्या देउबा और उनकी पत्नी देश से बाहर हैं?
जानकारी के अनुसार, देउबा और उनकी पत्नी इस समय नेपाल में नहीं हैं। दोनों 26 फरवरी को इलाज के लिए सिंगापुर गए थे और उसके बाद हांगकांग भी पहुंचे। अभी तक उनकी वापसी नहीं हुई है, जिससे जांच एजेंसियों की कार्रवाई और तेज हो गई है।

क्या इंटरपोल की मदद लेने की तैयारी है?
सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तारी वारंट जारी करने का मकसद इंटरपोल रेड नोटिस जारी कराने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है। इससे विदेश में मौजूद आरोपियों को हिरासत में लेकर नेपाल लाया जा सकता है।

क्या चुनाव के बाद बदली है राजनीतिक स्थिति?
पांच मार्च को हुए चुनाव के बाद नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव आया है। नई सरकार बनने के बाद भ्रष्टाचार के मामलों में तेजी से कार्रवाई शुरू हुई है। यही वजह है कि अब देउबा और अन्य नेताओं के खिलाफ जांच का दायरा बढ़ाया गया है।

क्या देउबा का राजनीतिक करियर प्रभावित होगा?
देउबा पांच बार प्रधानमंत्री रह चुके हैं और 1991 से लगातार राजनीति में सक्रिय रहे हैं। हालांकि हालिया घटनाक्रम और जांच के चलते उनका राजनीतिक भविष्य संकट में नजर आ रहा है। नई सरकार के सख्त रुख के कारण उनके लिए स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

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